क्यों उठानी पड़ी RBI को ये सख्त कदम?
भारतीय रुपया इस साल लगभग 3% तक गिर चुका है और इन दिनों अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.20 के स्तर के करीब कारोबार कर रहा है। यह एशिया की सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली प्रमुख करेंसी बन गई है। RBI के इस निर्देश का सीधा मकसद डॉलर की मांग को कम करना है, जो रुपये को लगातार कमजोर करने का एक मुख्य कारण है।
कौन सी कंपनियां प्रभावित होंगी?
RBI का यह निर्देश खास तौर पर इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) जैसी बड़ी सरकारी तेल रिफाइनरियों के लिए है। ये कंपनियां भारत की कुल रिफाइनिंग क्षमता का लगभग आधा हिस्सा संभालती हैं और कच्चे तेल के आयात का भुगतान करने के लिए डॉलर की बड़ी खरीदार हैं। इसलिए, इनकी डॉलर की मांग पर नियंत्रण करेंसी की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रुपये की कमजोरी की जड़ें
रुपये की कमजोरी का सीधा संबंध कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से है, जो पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण और भी बढ़ गई हैं। भारत अपनी 85% से अधिक कच्चे तेल की जरूरतें आयात से पूरी करता है, जिससे यह सप्लाई में रुकावटों और कीमतों में उछाल के प्रति बेहद संवेदनशील हो जाता है। तेल की ऊंची लागतें भारत के आयात बिल को बढ़ाती हैं और इसके ट्रेड डेफिसिट को भी बढ़ा देती हैं, जो फाइनेंशियल ईयर 2026 में $119.3 बिलियन तक पहुंच गया था।
फॉरेन करेंसी रिजर्व और RBI की रणनीति
देश का फॉरेन करेंसी रिजर्व फरवरी 2026 में रिकॉर्ड $728.5 बिलियन तक पहुंचने के बाद अप्रैल 2026 की शुरुआत तक लगभग $697.1 बिलियन पर था। हालांकि, RBI आम तौर पर करेंसी की अस्थिरता को प्रबंधित करने के लिए हस्तक्षेप करता है, न कि किसी खास एक्सचेंज रेट को लक्षित करने के लिए। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की क्रेडिट लाइन के माध्यम से रिफाइनरियों की डॉलर मांग को निर्देशित करने की यह वर्तमान रणनीति, RBI की होल्डिंग्स से सीधे डॉलर बेचने की तुलना में रिजर्व पर कम दबाव डालने वाला एक सीधा तरीका हो सकता है।
रिफाइनरियों के फाइनेंशियल पर एक नजर
जिन सरकारी रिफाइनरियों पर इसका असर पड़ेगा, वे बाजार में बड़ी भूमिका निभाती हैं। उदाहरण के लिए, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) का P/E रेशियो लगभग 5.56 और मार्केट कैप ₹2,03,572 करोड़ है। वहीं, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL) का P/E 4.99 और मार्केट कैप ₹78,783 करोड़ है, जबकि भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) का P/E 5.28 और मार्केट कैप ₹1,33,973 करोड़ है।
आगे की राह और चुनौतियां
इन उपायों के बावजूद, रुपये को लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। विदेशी निवेशकों ने 2026 में अब तक $19 बिलियन से अधिक के भारतीय एसेट्स बेच दिए हैं, और चालू खाता घाटा (current account deficit) चिंता का विषय बना हुआ है। विश्लेषकों का अनुमान है कि भू-राजनीतिक जोखिमों और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के कारण रुपया 2027 की पहली तिमाही तक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 97.4 तक जा सकता है। रुपये का भविष्य काफी हद तक मध्य पूर्व के तनावों में कमी और तेल की कीमतों में स्थिरता पर निर्भर करेगा।