RBI का बड़ा दांव: 'रुपये' को सट्टेबाजों से बचाने की तैयारी, Forex Rules टाइट!

ECONOMY
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AuthorNeha Patil|Published at:
RBI का बड़ा दांव: 'रुपये' को सट्टेबाजों से बचाने की तैयारी, Forex Rules टाइट!
Overview

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी मुद्रा बाजारों में चल रही सट्टेबाजी पर नकेल कसने के लिए कुछ अस्थायी कदम उठाए हैं, जिसका मकसद भारतीय रुपये (Indian Rupee) को स्थिर करना है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने साफ किया कि नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड्स (NDFs) पर हालिया प्रतिबंधों का उद्देश्य ट्रेडर्स को मूल्य अंतर का फायदा उठाने से रोकना है। पिछले महीने भू-राजनीतिक तनावों और बढ़ती तेल कीमतों के बीच रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर **95** के करीब पहुंच गया था। इसी बीच, RBI ने अपनी प्रमुख उधारी दर (Repo Rate) को **5.25%** पर अपरिवर्तित रखा है, ताकि महंगाई को काबू में रखते हुए आर्थिक विकास को भी सहारा दिया जा सके।

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NDFs पर पाबंदियों का मतलब क्या है?

RBI ने साफ किया है कि नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड्स (NDFs) पर ये पाबंदियां पूरी तरह अस्थायी हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि सट्टेबाज इन ऑफशोर मार्केट्स का इस्तेमाल करके रुपये पर आर्टिफिशियल दबाव बना रहे थे। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि ऐसे आर्बिट्रेज (arbitrage) गतिविधियों को रोकना जरूरी है, जो रुपये की कीमत को प्रभावित करती हैं। बता दें कि NDFs एक तरह के ऑफशोर कांट्रैक्ट होते हैं, जो डॉलर में सेटल होते हैं और ट्रेडर्स को मुद्रा की चाल पर दांव लगाने की सुविधा देते हैं।

रुपया थोड़ा संभला, पर आगे क्या?

RBI के इन कदमों के बाद रुपये में कुछ रिकवरी देखने को मिली है। जहां मार्च में यह डॉलर के मुकाबले 95 के पार चला गया था, वहीं 8 अप्रैल 2026 तक यह 92.58 के स्तर के आसपास कारोबार कर रहा था। हालांकि, रुपये के भविष्य को लेकर अनुमानों पर अब ज्यादा बारीकी से गौर किया जा रहा है। RBI की खुद की भविष्यवाणी थी कि फाइनेंशियल ईयर 2027 तक रुपया 94 प्रति डॉलर रहेगा, जो कि तब मानी गई क्रूड ऑयल की 85 डॉलर प्रति बैरल की औसत कीमत पर आधारित थी। लेकिन, अब ब्रेंट क्रूड (Brent crude) 90 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है, जिससे RBI का अनुमान थोड़ा आशावादी नजर आ रहा है।

ब्याज दरों पर RBI का फैसला

इसके साथ ही, RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (Monetary Policy Committee) ने लगातार दूसरी बार बेंचमार्क रेपो रेट (Repo Rate) को 5.25% पर स्थिर रखने का फैसला किया है। यह दर्शाता है कि केंद्रीय बैंक अभी भी महंगाई को नियंत्रण में रखने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जिसके लिए FY27 में 4.6% का अनुमान रखा गया है। RBI अपनी वर्तमान फ्लेक्सिबिलिटी का इस्तेमाल कर रहा है, जो कि कम महंगाई दर के चलते संभव हुआ है। इसका मतलब है कि RBI ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं से निपटने के लिए तैयार है। इस स्थिति को देखते हुए, RBI ब्याज दरों में कटौती को फिलहाल लंबा खींच सकता है, जब तक कि महंगाई लक्ष्य हासिल न हो जाए और भू-राजनीतिक स्थिति स्थिर न हो।

इमर्जिंग मार्केट्स पर दबाव

रुपये की यह अस्थिरता दुनिया भर की कई इमर्जिंग मार्केट्स की मुद्राओं (emerging market currencies) में दिख रही है। मजबूत होते अमेरिकी डॉलर और कैपिटल आउटफ्लो (capital outflows) के चलते इन मुद्राओं पर दबाव है। दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अब अपने विदेशी मुद्रा भंडार (foreign exchange reserves) के प्रबंधन में ज्यादा विविधता ला रहे हैं। RBI द्वारा सीधे ऑफशोर NDF मार्केट्स में दखल देना, अपने विदेशी मुद्रा भंडार को ज्यादा खर्च किए बिना मुद्रा की अस्थिरता को प्रबंधित करने का एक लक्षित तरीका माना जा रहा है।

एनालिस्ट्स की राय

एक्सपर्ट्स NDF प्रतिबंधों की प्रभावशीलता पर थोड़ी सावधानी बरत रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, RBI के कदम उठाने से पहले NDF मार्केट में आर्बिट्रेज के बड़े सौदे हो रहे थे। अगर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो भारत का चालू खाता घाटा (current account deficit) बढ़ सकता है और आयातित महंगाई (imported inflation) का जोखिम फिर से पैदा हो सकता है। यह RBI और सरकार दोनों के लिए नीतिगत निर्णय लेना मुश्किल बना देगा। RBI द्वारा FY27 के लिए 94 INR/USD का अनुमान, मौजूदा बाजार की अस्थिरता और रुपये की गिरावट को देखते हुए, काफी आशावादी लग रहा है। साथ ही, युद्धविराम की नाजुक स्थिति को लेकर भी चिंताएं बनी हुई हैं, जिससे आर्थिक सुधार की अवधि पर अनिश्चितता है। इसी बढ़ते जोखिम को देखते हुए, Moody's Ratings और EY जैसी संस्थाओं ने भारत के GDP ग्रोथ अनुमानों को पहले ही कम कर दिया है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.