कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मई में विदेशी मुद्रा बाजार में शुद्ध रूप से **$6 अरब** बेचे हैं। यह कदम रुपये में अस्थिरता को कम करने के लिए उठाया गया है। हालांकि यह अप्रैल के **$8.95 अरब** की बिक्री से कम है, पर चालू वित्त वर्ष में अब तक RBI **$53.13 अरब** बेच चुका है, जो एक रिकॉर्ड है।
Detailed Coverage
मई में RBI की बड़ी डॉलर बिक्री
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मई महीने में विदेशी मुद्रा बाजार में $6 अरब डॉलर की शुद्ध बिकवाली की है। इसका मुख्य उद्देश्य कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण भारतीय रुपये पर पड़ रहे दबाव को कम करना है। भारत अपनी तेल की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में तेल महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ जाती है, जिससे रुपये पर दबाव आता है।
बाजार पर असर
इस बड़ी बिकवाली के बावजूद, भारतीय रुपया मई में केवल 0.1% के मामूली गिरावट के साथ अपेक्षाकृत स्थिर रहा। अप्रैल के मुकाबले यह बिकवाली कम थी, जब RBI ने $8.95 अरब डॉलर बेचे थे। RBI के आंकड़ों के मुताबिक, मई में कुल $22.2 अरब डॉलर खरीदे गए और $16.2 अरब डॉलर बेचे गए, जिससे साफ होता है कि केंद्रीय बैंक करेंसी में अचानक आने वाले उतार-चढ़ाव को स्मूथ करने पर ध्यान दे रहा है।
वित्त वर्ष 2026 में रिकॉर्ड बिकवाली
मई की यह बिक्री चालू वित्त वर्ष (FY26) में डॉलर की बिकवाली के एक अभूतपूर्व ट्रेंड को दिखाती है। FY26 में अब तक RBI $53.13 अरब डॉलर की शुद्ध बिकवाली कर चुका है। यह किसी भी एक वित्त वर्ष में अब तक की सबसे बड़ी शुद्ध डॉलर बिकवाली है। यह आंकड़ा पिछले वित्त वर्ष (FY25) में हुई $34.51 अरब की बिकवाली से कहीं ज्यादा है। इससे वैश्विक आर्थिक दबावों के बीच करेंसी की स्थिरता बनाए रखने के RBI के प्रयासों का पता चलता है।
फॉरवर्ड मार्केट में भी सक्रियता
स्पॉट मार्केट के अलावा, फॉरवर्ड फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में भी गतिविधियां बढ़ी हैं। मई के अंत तक, डॉलर के मुकाबले नेट शॉर्ट पोजिशन (यानी ऐसे कॉन्ट्रैक्ट जो भविष्य में डॉलर मजबूत होने के खिलाफ हेज करते हैं) बढ़कर $106.7 अरब हो गई है। अप्रैल के अंत में यह आंकड़ा $95.3 अरब था। यह बढ़ोतरी बताती है कि बाजार प्रतिभागी संभावित भविष्य के उतार-चढ़ावों से खुद को हेज कर रहे हैं, या RBI अपनी लिक्विडिटी और करेंसी की उम्मीदों को बड़े पैमाने पर मैनेज करने के लिए फॉरवर्ड इंस्ट्रूमेंट्स का इस्तेमाल कर रहा है।
निवेशकों और बाजार के जानकारों के लिए, आने वाले समय में RBI के विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़े और वैश्विक कमोडिटी कीमतों पर केंद्रीय बैंक की भविष्य की टिप्पणियां महत्वपूर्ण होंगी। इस तरह के बड़े पैमाने पर हस्तक्षेपों की निरंतरता भारत के विदेशी मुद्रा भंडार की मजबूती और अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों के रुख पर निर्भर करेगी।
