RBI का बड़ा संकेत: ब्याज दरें रहेंगी स्थिर
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) के सदस्य सौगत भट्टाचार्य ने साफ कर दिया है कि प्रमुख ब्याज दरों (रेपो रेट) में बढ़ोतरी की गुंजाइश 'नगण्य' है। यानी, RBI फिलहाल ब्याज दरों को बढ़ाने के मूड में नहीं है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भू-राजनीतिक तनाव के कारण महंगाई बढ़ने का खतरा बना हुआ है।
ग्रोथ पर RBI का फोकस
RBI की पॉलिसी का मुख्य जोर भारतीय अर्थव्यवस्था की ग्रोथ को सहारा देना है। मजबूत घरेलू खपत (consumption) और बढ़ते क्रेडिट (credit) विस्तार को देखते हुए, RBI का मानना है कि अर्थव्यवस्था सही रास्ते पर है। देश की इकोनॉमी का लगभग दो-तिहाई हिस्सा घरेलू खपत से आता है, और यही ग्रोथ का सबसे बड़ा इंजन है।
महंगाई पर क्या है RBI का नज़रिया?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, H1 FY27 तक महंगाई दर (inflation) थोड़ी बढ़कर 4% के आसपास पहुँच सकती है। इसके पीछे बेस इफेक्ट (base effects) और कमोडिटी (commodity) की कीमतों में बढ़ोतरी जैसे कारण बताए जा रहे हैं। हालांकि, RBI का मानना है कि इन अस्थिर कारकों को हटा दें, तो अंदरूनी महंगाई (underlying inflation) काबू में है। FY26 के लिए महंगाई का अनुमान 2.1% है, जबकि FY27 की पहली दो तिमाहियों में यह 4.0%-4.2% रह सकती है।
इकोनॉमी में दिख रहे मजबूती के संकेत
- क्रेडिट ग्रोथ (Credit Growth): कॉर्पोरेट्स, मिड-कॉर्पोरेट्स, MSMEs और NBFCs को लोन देने में अच्छी बढ़ोतरी देखी जा रही है। दिसंबर 2025 तक बड़े कॉर्पोरेट्स को क्रेडिट ग्रोथ 7.5% थी, जो दिसंबर 2024 के 5.5% से ज्यादा है। मिड-कॉर्पोरेट्स के लिए यह 20% और MSMEs के लिए 29% रही। NBFCs को लोन भी लगभग तीन गुना हो गया है।
- कैपेसिटी यूटिलाइजेशन (Capacity Utilization): फैक्ट्रियों की उत्पादन क्षमता का उपयोग करीब 75% के स्तर पर है, जो औद्योगिक विस्तार की गुंजाइश दिखाता है।
- निर्यात (Exports): ग्लोबल ट्रेड में अनिश्चितताओं के बावजूद, भारत का निर्यात मजबूत बना हुआ है। निर्यातकों ने अपने डेस्टिनेशन को डाइवर्सिफाई किया है, जिससे बाहरी झटकों का असर कम हुआ है।
- GDP ग्रोथ अनुमान: इकोनॉमिक सर्वे के अनुसार, FY26 के लिए रियल GDP ग्रोथ 7.4% रहने का अनुमान है।
जोखिम और आगे का रास्ता
हालांकि, RBI कुछ जोखिमों से भी वाकिफ है। अगर जियो-पॉलिटिकल टेंशन बढ़ती है तो कमोडिटी की कीमतें और बढ़ सकती हैं, जिससे महंगाई उम्मीद से ज्यादा रह सकती है। घरेलू खपत पर ज्यादा निर्भरता भी एक जोखिम है। इसके अलावा, ग्लोबल इकोनॉमी में बड़ी मंदी निर्यात को प्रभावित कर सकती है। RBI इन सबको ध्यान में रखते हुए 5.25% के रेपो रेट को बनाए रखने की रणनीति पर चल रहा है, ताकि इकोनॉमी को मजबूत सहारा मिलता रहे।