RBI ने ₹35,000 करोड़ के ट्रेजरी बिल जारी करने के लिए बुलाई गई नीलामी में सभी बोलियां इसलिए रद्द कर दीं क्योंकि निवेशकों ने 0.05% से 0.10% तक की अधिक ब्याज दर की मांग की थी, जो केंद्रीय बैंक को स्वीकार्य नहीं था।
यह फैसला बैंकों में नकदी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए उठाया गया है। हाल के दिनों में बड़े टैक्स भुगतान (जैसे एडवांस टैक्स और GST) और रुपये को स्थिर करने के लिए RBI के विदेशी मुद्रा बाजार (Forex) में हस्तक्षेप के कारण सिस्टम से नकदी कम हो गई थी।
91-दिन, 182-दिन और 364-दिन की सभी अवधियों के लिए बोलियां रद्द करना, RBI के इस इरादे को दर्शाता है कि वह बाजार में ब्याज दरों को अपनी इच्छानुसार नियंत्रित करना चाहता है।
सरकार के पास लगभग ₹4.5 लाख करोड़ का मजबूत कैश रिजर्व है, जिसने RBI को इस नीलामी के प्रस्ताव को ठुकराने में लचीलापन दिया है।
हालांकि, बार-बार इस तरह बोलियां रद्द करने से बाजार में कुछ तनाव के संकेत मिल रहे हैं। इससे भविष्य में सरकार के लिए उधार लेना महंगा हो सकता है।
RBI अपनी लिक्विडिटी प्रबंधन रणनीति के तहत Open Market Operation (OMO) के जरिए ₹6,39,203 करोड़ से अधिक के बॉन्ड खरीद चुका है और Variable Rate Repo (VRR) के माध्यम से नकदी भी डाल रहा है।
बाजार की नजरें अब अप्रैल-जून तिमाही के लिए सरकारी उधारी कार्यक्रम पर हैं। बेंचमार्क 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड (yield) लगभग 6.88% के आसपास बना हुआ है, जो वैश्विक और घरेलू लिक्विडिटी की स्थिति से प्रभावित है।