डिजिटल फ्रॉड पर RBI का सख्त रवैया
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) कंज्यूमर प्रोटेक्शन के लिए एक बड़ा रीवाइटलाइज़ेशन प्लान ला रहा है। इस प्लान के तहत, छोटे डिजिटल फ्रॉड के शिकार हुए ग्राहकों को राहत देने के लिए ₹25,000 तक की भरपाई का प्रस्ताव है। यह राशि ग्राहकों के हुए नुकसान का 85% या ₹25,000 (जो भी कम हो) हो सकती है। यह एक वन-टाइम ऑफर होगा, जिसमें ऐसे ग्राहक शामिल होंगे जिन्होंने वन-टाइम पासवर्ड (OTP) जैसी संवेदनशील जानकारी शेयर करने के कारण पैसे गंवाए हों।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि RBI ने 2017 के कस्टमर लायबिलिटी वाले फ्रेमवर्क की समीक्षा की है, क्योंकि बैंकिंग और पेमेंट सेक्टर में टेक्नोलॉजी बहुत तेजी से बदली है। इस नए कंपनसेशन फ्रेमवर्क सहित संशोधित ड्राफ्ट गाइडलाइंस जल्द ही पब्लिक फीडबैक के लिए जारी की जाएंगी। पहले बार फ्रॉड का शिकार होने वाले ग्राहकों के लिए, RBI नुकसान का 70% कवर करेगा, जबकि बाकी 30% का खर्च बैंक और ग्राहक मिलकर उठाएंगे।
गलतबिक्री (Mis-selling) और लोन रिकवरी पर भी लगेगी लगाम
डिजिटल फ्रॉड के अलावा, RBI रेगुलेटेड एंटिटीज द्वारा फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स की गलतबिक्री (mis-selling) पर भी नकेल कसने की तैयारी में है। गवर्नर मल्होत्रा ने गलतबिक्री के गंभीर नतीजों पर जोर दिया, खासकर ग्राहकों और संस्थानों दोनों के लिए। अब बैंक काउंटरों पर बेचे जाने वाले थर्ड-पार्टी प्रोडक्ट्स की ग्राहकों की जरूरत और रिस्क एपेटाइट के हिसाब से उपयुक्तता सुनिश्चित की जाएगी। फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स की एडवरटाइजिंग, मार्केटिंग और सेल्स को लेकर विस्तृत गाइडलाइंस भी जल्द ही फीडबैक के लिए आएंगी।
इसके साथ ही, RBI लोन रिकवरी और रिकवरी एजेंट्स की एंगेजमेंट को लेकर नियमों को भी हार्मोनाइज करेगा। ग्राहकों की तरफ से लगातार आने वाली शिकायतों को देखते हुए, यह पहल विभिन्न रेगुलेटेड एंटिटीज के लिए एक समान कंडक्ट-रिलेटेड निर्देश बनाने का लक्ष्य रखती है। इन हार्मोनाइज्ड प्रैक्टिसेज को बताने वाले ड्राफ्ट नॉर्म्स भी पब्लिक कमेंट के लिए जारी किए जाएंगे।