RBI की पॉलिसी का फोकस: महंगाई या रुपए की मजबूती?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने संकेत दिए हैं कि वह रुपए की मजबूती के लिए ब्याज दरें बढ़ाने की बजाय महंगाई को कंट्रोल करने को प्राथमिकता देगा। सूत्रों का कहना है कि इस स्ट्रैटेजी का मुख्य उद्देश्य इकॉनोमिक ग्रोथ को बनाए रखना है, न कि फौरन करेंसी को स्टेबल करना। RBI की टीम रुपए की वोलैटिलिटी (Volatility) को मैनेज करने के लिए मॉनेटरी टूल्स के अलावा दूसरे तरीकों पर भी गौर कर रही है। इनमें खास डॉलर डिपॉजिट स्कीम्स और डेट इन्वेस्टर्स के लिए इंसेंटिव्स शामिल हो सकते हैं।
महंगाई और ग्रोथ पर असर?
जहां एक तरफ भारत का कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) RBI के 2-6% के टारगेट बैंड में बना हुआ है, वहीं होलसेल इन्फ्लेशन (Wholesale Inflation) बढ़कर 8.3% तक पहुंच गया है। हालांकि, होलसेल प्राइस की इस बढ़ोतरी का सीधा असर आम ग्राहकों पर अभी ज्यादा नहीं दिख रहा है। अनुमान है कि RBI इस फाइनेंशियल ईयर के लिए अपने ग्रोथ फोरकास्ट को 6.9% से घटा सकता है, जो यह दर्शाता है कि इकॉनमी टाइट फाइनेंशियल कंडीशंस के प्रति कितनी संवेदनशील है।
मार्केट की उम्मीदें और RBI का रुख
इंटरेस्ट रेट स्वैप मार्केट्स (Interest Rate Swap Markets) के जानकारों का मानना है कि RBI अगले तीन महीनों में कम से कम 40 बेसिस पॉइंट्स और अगले एक साल में 100 बेसिस पॉइंट्स से ज्यादा की रेट हाइक कर सकता है। यह मार्केट सेंटिमेंट बताता है कि ट्रेडर्स को उम्मीद है कि RBI आखिर में रुपए को डिफेंड करने के लिए पॉलिसी टाइट करेगा। लेकिन, RBI का ऐतिहासिक रुख रहा है कि वह करेंसी सपोर्ट के लिए रेट हाइक को प्राइमरी तरीका नहीं मानता, सिवाय 2013 के एक खास मौके के। ऐसे में, जब तक महंगाई बहुत ज्यादा नहीं बढ़ती या रुपए पर बड़ा संकट नहीं आता, तब तक बड़ी रेट हाइक की संभावना कम ही है।
रुपए की स्थिरता के लिए दूसरे रास्ते
रेट हाइक के बजाय, RBI रुपए को सपोर्ट करने के लिए कई मोर्चों पर काम करने पर विचार कर रहा है। इसमें नॉन-रेजिडेंट इंडियंस (NRIs) के लिए नई डॉलर डिपॉजिट स्कीम्स लाना शामिल हो सकता है, ताकि फॉरेन करेंसी इनफ्लो बढ़ सके। इसके अलावा, डेट इन्वेस्टर्स के लिए टैक्स पॉलिसी में बदलाव करके रुपए-डिनॉमिनेटेड डेट को ज्यादा अट्रैक्टिव बनाया जा सकता है, जिससे करेंसी की डिमांड बढ़े। इन उपायों का मकसद बड़े पैमाने पर मॉनेटरी टाइटनिंग के बजाय टारगेटेड इंटरवेंशन से रुपए की कमजोरी को दूर करना है।
