भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) 5 अगस्त, 2026 को अपनी मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग करने वाला है। इस बीच, बड़े इकोनॉमिस्ट्स (Economists) का मानना है कि RBI ब्याज दरों (Interest Rates) में कोई बदलाव नहीं करेगा और उन्हें स्थिर ही रखा जाएगा।
क्यों दरें स्थिर रखने की सलाह?
देश के प्रमुख अर्थशास्त्रियों का मानना है कि RBI को मौजूदा वक्त में इकोनॉमिक ग्रोथ (Economic Growth) को सहारा देने पर ध्यान देना चाहिए, न कि इंफ्लेशन (Inflation) के छोटे-मोटे उतार-चढ़ावों पर रिएक्ट करना चाहिए। पूर्व मुख्य सांख्यिकीविद (Chief Statistician) भारत, प्रणब सेन ने भी कहा है कि सेंट्रल बैंक को इस मीटिंग में दरों को बढ़ाना नहीं चाहिए। एसबीआई (SBI), सिटी (Citi), जेपी मॉर्गन (JPMorgan) और नोमुरा (Nomura) जैसी बड़ी फाइनेंशियल संस्थाओं के एक्सपर्ट्स भी इसी राय से सहमत हैं। वे मानते हैं कि RBI को कुछ और आर्थिक संकेतकों (Economic Variables) पर स्पष्टता आने का इंतजार करना चाहिए।
महंगाई और ग्रोथ में संतुलन
हालांकि, महंगाई बढ़ रही है, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि यह इतनी नहीं बढ़ी है कि तुरंत ब्याज दरें बढ़ाई जाएं। सिटी के समीरन चक्रवर्ती ने कहा कि होलसेल प्राइस (Wholesale Price) में बढ़ोतरी का पूरा असर ग्राहकों तक नहीं पहुंचेगा, क्योंकि कई कंपनियां डिमांड बनाए रखने के लिए कुछ लागतें खुद उठा रही हैं। इस साल के अंत में कोर इन्फ्लेशन (Core Inflation) में थोड़ी बढ़ोतरी की उम्मीद है, लेकिन यह चिंताजनक स्तर तक नहीं पहुंचेगी।
GDP ग्रोथ का अनुमान और जोखिम
GDP ग्रोथ (GDP Growth) के अनुमान भी अहम हैं। नोमुरा की सोनल वर्मा को उम्मीद है कि पहली तिमाही में GDP ग्रोथ RBI के 6.6% के अनुमान से बेहतर रह सकती है। लेकिन, एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि 2027 के फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) के दूसरे हाफ में मुश्किलें आ सकती हैं। इनमें कच्चे तेल (Crude Oil) की बढ़ती कीमतें और मौसम के पैटर्न, जैसे अल नीनो (El Niño) का असर शामिल है, जो खाने-पीने की चीजों के उत्पादन और ग्रामीण खर्च पर असर डाल सकता है। इन अनिश्चितताओं के बेहतर समझने तक मौजूदा अनुमानों पर टिके रहना एक समझदारी भरा कदम माना जा रहा है।
ग्लोबल फैक्टर और करेंसी पर नजर
दुनिया भर की अस्थिरता (Global Volatility) भी RBI के लिए एक बड़ा मुद्दा है। जेपी मॉर्गन के सज्जाद चिनॉय ने जोर देकर कहा कि RBI को ग्लोबल मॉनेटरी टाइटनिंग (Tighter Global Monetary Conditions), टैरिफ अनिश्चितताओं (Tariff Uncertainties) और सप्लाई चेन की दिक्कतों (Supply Chain Disruptions) जैसे अंतरराष्ट्रीय जोखिमों के लिए तैयार रहना चाहिए। इसके अलावा, भारतीय रुपये (Indian Rupee) पर भी नजर है। एसबीआई के सौम्या कांति घोष ने कहा कि रुपया अपने फंडामेंटल्स (Fundamentals) के हिसाब से मजबूत नहीं हुआ है, जिससे यह साफ है कि आने वाले महीनों में करेंसी की स्थिरता RBI के लिए एक महत्वपूर्ण निगरानी का विषय बनी रहेगी।
