RBI ने बढ़ाई विदेशी निवेश की सीमाएं
RBI ने 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाले वित्तीय वर्ष 2027 (FY27) के लिए फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) के डेट मार्केट में निवेश के नियमों में बड़े बदलाव की घोषणा की है। नए नियमों के तहत, सरकारी सिक्योरिटीज (G-Secs) पर 6%, स्टेट डेवलपमेंट लोन (SDLs) पर 2%, और कॉर्पोरेट बॉन्ड्स पर 15% की मौजूदा प्रतिशत सीमाएं बरकरार रहेंगी।
लेकिन, इन प्रतिशत सीमाओं के पीछे, विदेशी निवेश की कुल ऊपरी सीमा (absolute investment ceilings) में बड़ा इजाफा किया गया है। FY27 की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर 2026) के लिए FPI डेट निवेश की कुल सीमा को बढ़ाकर ₹15.52 लाख करोड़ कर दिया गया है। वहीं, दूसरी छमाही (अक्टूबर 2026-मार्च 2027) के लिए यह सीमा और बढ़ाकर ₹16.33 लाख करोड़ कर दी गई है।
VRR का मर्जर: निवेश हुआ और आसान
इन बड़े बदलावों के साथ ही, RBI ने एक और महत्वपूर्ण संरचनात्मक (structural) परिवर्तन किया है। Voluntary Retention Route (VRR) को जनरल इन्वेस्टमेंट रूट में पूरी तरह से मर्ज कर दिया गया है। 2019 में शुरू किया गया VRR, FPIs को कुछ विशेष नियमों से छूट देकर निवेश की सुविधा देता था, बशर्ते वे एक निश्चित अवधि तक निवेश बनाए रखें। लेकिन, इस अलग रूट के कारण निवेशकों के लिए प्रक्रिया जटिल हो जाती थी। अब VRR की ₹2.5 ट्रिलियन की अलग सीमा को हटाकर, इसे जनरल रूट की सीमाओं में मिला दिया गया है, जिससे निवेश की प्रक्रिया सरल होगी और नियमों का पालन करना आसान हो जाएगा।
वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत का कदम
RBI का यह कदम ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में ऊंची ब्याज दरें (interest rates) और अनिश्चितता उभरते बाजारों (emerging markets) के लिए चुनौती बनी हुई है। ऊँची अमेरिकी ब्याज दरें अक्सर उभरते बाजारों से पूंजी को बाहर खींच लेती हैं, जिससे उनकी उधारी लागत बढ़ जाती है और मुद्रा कमजोर होती है। हालांकि, मध्य पूर्व में तनाव कम होने की उम्मीदों से कुछ राहत मिली है, लेकिन तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भारत की आयात लागत और महंगाई पर असर डाल सकता है। भारत के डेट मार्केट में विदेशी निवेश में ऐतिहासिक रूप से उतार-चढ़ाव देखा गया है, जो वैश्विक ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड के अंतर से प्रभावित होता है।
क्या वाकई बढ़ेगा निवेश?
यह देखा गया है कि मार्च 2026 तक, गैर-Fully Accessible Route (non-FAR) में उपलब्ध डेट सीमा का उपयोग केवल लगभग 18% ही हो रहा था। इसी कम उपयोग दर को देखते हुए RBI ने VRR को जनरल रूट में मिला दिया है, ताकि निवेश सुचारू हो सके। लेकिन, जानकारों का मानना है कि नियमों को सरल बनाने से ही निवेश में तुरंत भारी उछाल आ जाए, यह ज़रूरी नहीं। वैश्विक ब्याज दरों का दबाव और अन्य उभरते बाजारों से प्रतिस्पर्धा अभी भी बनी हुई है।
भविष्य का नज़रिया
कुल मिलाकर, RBI के ये रणनीतिक कदम भारतीय डेट मार्केट को विदेशी निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनाने के उद्देश्य से उठाए गए हैं। निवेश की कुल सीमा बढ़ाना और VRR को मर्ज करके पहुंच को सरल बनाना, अधिक विदेशी पूंजी को आकर्षित करने की उम्मीद जगाता है। हालांकि, इन उपायों की सफलता काफी हद तक वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों और RBI की अपनी ब्याज दर नीतियों पर निर्भर करेगी। बाजार विश्लेषक इन बदलावों पर कड़ी नजर रखेंगे कि ये लंबे समय में कितने प्रभावी साबित होते हैं।