7.5% ग्रोथ, वो भी बिना महंगाई के?
पूनम गुप्ता ने बताया कि भारतीय अर्थव्यवस्था में 7.5% से भी ऊपर की ग्रोथ हासिल करने की क्षमता है, और यह बिना महंगाई को भड़काए संभव है। उन्होंने हालिया आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि ग्रोथ 4% के लक्ष्य से नीचे बनी हुई है।
मजबूत बैलेंस ऑफ़ पेमेंट्स (Balance of Payments)
इस ग्रोथ की सबसे बड़ी वजह अर्थव्यवस्था का मजबूत बैलेंस ऑफ़ पेमेंट्स है। रेमिटेंस (Remittances), सर्विसेज एक्सपोर्ट्स (Services Exports) और एफडीआई (FDI) इनफ्लोज़ लगातार बने हुए हैं, जो वैश्विक आर्थिक झटकों के खिलाफ एक मज़बूत सहारा देते हैं। गुप्ता ने जोर देकर कहा कि यह मजबूती अस्थायी नहीं, बल्कि स्ट्रक्चरल (Structural) है।
मॉनेटरी पॉलिसी का प्रभावी असर
मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) के असर पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक के ब्याज दर (Interest Rate) में बदलाव का असर अर्थव्यवस्था पर उतना ही या उससे भी बेहतर हो रहा है, जितना कि पिछली बार दरों में कटौती के दौरान हुआ था। शॉर्ट-टर्म रेट्स (Short-term rates) पर इसका लगभग पूरा असर दिख रहा है, जबकि लॉन्ग-टर्म रेट्स (Long-term rates) वैश्विक रुझानों और महंगाई के अनुमानों से ज़्यादा प्रभावित होते हैं।
महंगाई मापन में सुधार
भविष्य को देखते हुए, गुप्ता ने महंगाई मापने के लिए इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं और सेवाओं की टोकरी (Basket of Goods and Services) को अपडेट करने की आवृत्ति (Frequency) की समीक्षा करने का सुझाव दिया। वर्तमान में यह टोकरी हर 12 साल में अपडेट होती है, जबकि उन्होंने हर तीन से पांच साल में इसकी समीक्षा का प्रस्ताव दिया है। इससे महंगाई नियंत्रण की रणनीति और पैनी हो सकती है।
महंगाई लक्ष्य पर जनता की राय
उन्होंने महंगाई ढांचे (Inflation Framework) पर RBI द्वारा जारी चर्चा पत्रों (Discussion Papers) पर जनता की राय भी साझा की। ज्यादातर लोगों ने हेडलाइन सीपीआई (Headline CPI) को महंगाई लक्ष्य बनाए रखने, 4% के लक्ष्य और मौजूदा +/- 2% के टॉलरेंस बैंड (Tolerance Band) पर सहमति जताई।
