RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (Monetary Policy Committee) ने 8 अप्रैल को यह अहम फैसला सुनाया। यह दरें पहले की कटौती के बाद से स्थिर बनी हुई हैं, और ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि जब तक आर्थिक हालात या नीतिगत दिशा में बड़ा बदलाव नहीं आता, होम लोन EMI स्थिर रहने की संभावना है।
नए लोन लेने वाले या मौजूदा लोन को रीफाइनेंस कराने वाले ग्राहकों को अभी भी अलग-अलग बैंकों की ब्याज दरों की अच्छी तरह जांच-पड़ताल करनी चाहिए। पब्लिक सेक्टर बैंक (Public Sector Banks) फिलहाल काफी प्रतिस्पर्धी दरें दे रहे हैं। उदाहरण के लिए, बैंक ऑफ इंडिया (Bank of India) 7.10% से, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (Union Bank of India) 7.15% से, और पंजाब नेशनल बैंक (PNB) 7.30% से अपनी ब्याज दरें शुरू कर रहे हैं। वहीं, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और केनरा बैंक (Canara Bank) 7.25% से ऑफर दे रहे हैं।
प्राइवेट सेक्टर बैंक (Private Sector Banks) भी इस रेस में पीछे नहीं हैं। कोटक महिंद्रा बैंक (Kotak Mahindra Bank), आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) और एचएसबीसी बैंक (HSBC Bank) 7.45% की शुरुआती दरों के साथ मौजूद हैं। एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) 7.70% से शुरुआत कर रहा है, जबकि एक्सिस बैंक (Axis Bank) की दरें 11.90% तक जा सकती हैं। बंधन बैंक (Bandhan Bank) 8.41% से ऑफर दे रहा है।
हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां (HFCs) भी बाजार हिस्सेदारी के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस (LIC Housing Finance) और बजाज हाउसिंग फाइनेंस (Bajaj Housing Finance) जैसी कंपनियां 7.15% से शुरुआती दरें पेश कर रही हैं। टाटा कैपिटल (Tata Capital) और पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस (PNB Housing Finance) 7.50% की प्रतिस्पर्धी शुरुआती दरों के साथ हैं, जबकि जीआईसी हाउसिंग फाइनेंस (GIC Housing Finance) 8.20% और एसएमएफजी इंडिया होम फाइनेंस (SMFG India Home Finance) 10.00% से ऑफर दे रहे हैं।
सबसे कम ब्याज दरें हासिल करने के लिए, 800 या उससे अधिक का क्रेडिट स्कोर (Credit Score) रखने वाले ग्राहक सबसे अच्छी स्थिति में हैं। अंतिम ब्याज दर, ग्राहक के रोजगार की स्थिति (जैसे कि वे वेतनभोगी हैं या स्व-रोजगार) पर भी निर्भर कर सकती है।