RBI ने दरों पर लगाई रोक, महंगाई का खतरा बढ़ा
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने 8 अप्रैल, 2026 को हुई अपनी बैठक में प्रमुख नीतिगत रेपो रेट (Policy Repo Rate) को 5.25% पर अपरिवर्तित रखने का फैसला किया। इसके साथ ही, केंद्रीय बैंक ने अपने 'न्यूट्रल' (Neutral) मॉनेटरी पॉलिसी स्टान्स को भी बनाए रखा है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच एक अस्थायी युद्धविराम (Ceasefire) के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों में आई अस्थिरता कुछ कम हुई है।
बॉन्ड मार्केट में दिखी राहत, तेल की कीमतों में गिरावट
इस अस्थायी शांति की खबर से भारतीय बेंचमार्क 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड्स (Bond Yields) में तुरंत गिरावट आई, जो 7.04% से गिरकर करीब 6.92% पर आ गए। साथ ही, ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude Oil) की कीमतें भी धड़ाम से नीचे गिरीं और $100 प्रति बैरल के नीचे पहुंच गईं। हालांकि, RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि बाजार की यह सकारात्मक प्रतिक्रिया महंगाई को लेकर बनी चिंताओं से कहीं कम है।
महंगाई का अनुमान खतरनाक स्तर पर पहुंचा
तेल की कीमतों में आई अस्थायी गिरावट के बावजूद, केंद्रीय बैंक ने वित्तीय वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए अपने महंगाई अनुमान (Inflation Forecast) में भारी बढ़ोतरी की है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर का अनुमान अब 4.6% पर पहुंच गया है, जो FY26 के 2.1% के मुकाबले काफी ज्यादा है। तिमाही आधार पर देखें तो Q1 में 4.0%, Q2 में 4.4%, Q3 में 5.2% के शिखर पर और Q4 में 4.7% रहने का अनुमान है। गवर्नर मल्होत्रा ने जोर देकर कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष वैश्विक ऊर्जा और कमोडिटी की कीमतों में भारी अनिश्चितता और उतार-चढ़ाव पैदा कर रहा है।
ग्रोथ आउटलुक स्थिर, पर बाहरी खतरे मौजूद
आर्थिक विकास (GDP Growth) के मोर्चे पर, RBI ने FY27 के लिए 6.9% की वृद्धि दर का अनुमान लगाया है, जो FY26 के अनुमानित 7.6% से थोड़ी कम है। तिमाही आधार पर ग्रोथ के अनुमान Q1 में 6.8%, Q2 में 6.7%, Q3 में 7.0% और Q4 में 7.2% रखे गए हैं। RBI का मानना है कि घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण शिपिंग मार्गों में रुकावटें, और माल ढुलाई व बीमा लागत में बढ़ोतरी निर्यात और विनिर्माण को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकती हैं।
महंगाई और विकास के बीच संतुलन की कोशिश
वर्तमान आर्थिक परिदृश्य केंद्रीय बैंकों के सामने एक आम दुविधा पेश करता है: महंगाई से लड़ना या आर्थिक विकास को बढ़ावा देना। FY27 के लिए RBI का 4.6% का महंगाई अनुमान उसके 2-6% के लक्ष्य बैंड से काफी ऊपर है, जो नीतिगत गलतियों की चिंता बढ़ा सकता है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि केंद्रीय बैंक जल्दबाजी में ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं, जिससे आर्थिक गतिविधि बाधित हो सकती है, या कार्रवाई में बहुत देर कर सकते हैं, जिससे महंगाई की उम्मीदें बढ़ जाएंगी। पश्चिम एशिया में ऐतिहासिक संघर्षों ने भारत में महंगाई को बढ़ाया है, खासकर तेल आयात पर देश की निर्भरता को देखते हुए।
एनालिस्ट्स को थी RBI की सतर्कता की उम्मीद
विश्लेषकों को बड़े पैमाने पर RBI के दरों को स्थिर रखने और 'वेट एंड वॉच' (Wait and Watch) यानी 'देखें और इंतजार करें' की सतर्क रणनीति की उम्मीद थी। महंगाई के अनुमानों में बढ़ोतरी और सतर्क रुख वैश्विक अनिश्चितताओं को दर्शाता है। अस्थायी युद्धविराम ने अल्पकालिक बाजार राहत तो दी है, लेकिन तेल आपूर्ति और कीमतों पर जोखिम अभी भी बने हुए हैं। फिलहाल, भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 93 पर कारोबार कर रहा है। रुपये का कमजोर होना आयातित महंगाई को और बढ़ा सकता है, जिससे एक मुश्किल आर्थिक चक्र बन सकता है।