RBI ने नहीं बढ़ाई ब्याज दरें: ग्रोथ को प्राथमिकता, जानिए क्या है वजह

ECONOMY
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
RBI ने नहीं बढ़ाई ब्याज दरें: ग्रोथ को प्राथमिकता, जानिए क्या है वजह
Overview

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने ब्याज दरों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। कमेटी ने मौजूदा महंगाई को सप्लाई शॉक (Supply Shock) से जुड़ा मानते हुए, ग्रोथ को सहारा देने और वित्तीय स्थिरता (Financial Stability) को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है।

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ब्याज दरों में यथावत, वजह सप्लाई शॉक!

RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने ब्याज दरों को यथावत रखने का फैसला किया है। कमेटी का मानना है कि मौजूदा समय में महंगाई का दबाव मुख्य रूप से सप्लाई-साइड की दिक्कतों, जैसे ग्लोबल जंगों और मौसम की मार, के कारण है, न कि बढ़ती मांग की वजह से। ऐसे में ब्याज दरें बढ़ाने से आर्थिक विकास (Economic Growth) बाधित हो सकता है, जबकि महंगाई पर इसका असर सीमित रहेगा।

बैंकिंग स्थिरता और रुपये पर फोकस

MPC का मुख्य ध्यान फिलहाल बैंकिंग सिस्टम को मजबूत करने, अस्थिर अंतरराष्ट्रीय पूंजी प्रवाह (volatile international capital flows) को संभालने और भारतीय रुपये की स्थिरता बनाए रखने पर है। मुश्किल वैश्विक आर्थिक माहौल में ये कदम भारत के लिए अहम हैं।

मुद्रा लोन स्कीम ने तोड़े रिकॉर्ड

आर्थिक गतिविधियों की बात करें तो, मुद्रा लोन स्कीम (Mudra loan scheme) ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है। फाइनेंशियल ईयर 2026 तक ₹5.64 लाख करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है। यह स्कीम छोटे पैमाने पर आर्थिक गतिविधियों में लगे लोगों के लिए बहुत मददगार है, जिन्हें पारंपरिक कर्ज मिलने में दिक्कतें आती हैं।

सिर्फ छह राज्यों में स्किल्ड टैलेंट का जमावड़ा

मानव पूंजी (Human Capital) के मोर्चे पर, एक स्टडी से पता चला है कि सिर्फ छह भारतीय राज्य ही अच्छी-खासी संख्या में स्किल्ड टैलेंट (White-collar talent) को आकर्षित कर पा रहे हैं। इनमें हरियाणा, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्य आगे हैं, जिसका कारण उनका बिजनेस-फ्रेंडली माहौल, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्लोबल अपील है।

आर्थिक पूर्वानुमान में नई रणनीति की जरूरत

आर्थिक पूर्वानुमान (Economic Forecasting) की बात करें तो, मौजूदा अनिश्चित दौर में यह काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है। अक्सर पारंपरिक पूर्वानुमान गलत साबित हो रहे हैं। ऐसे में सिनेरियो-आधारित पूर्वानुमान (Scenario-based forecasting) अपनाने की सलाह दी गई है, जिसमें स्पष्ट एजंप्शन और पारदर्शी कम्युनिकेशन हो।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.