ब्याज दरों में यथावत, वजह सप्लाई शॉक!
RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने ब्याज दरों को यथावत रखने का फैसला किया है। कमेटी का मानना है कि मौजूदा समय में महंगाई का दबाव मुख्य रूप से सप्लाई-साइड की दिक्कतों, जैसे ग्लोबल जंगों और मौसम की मार, के कारण है, न कि बढ़ती मांग की वजह से। ऐसे में ब्याज दरें बढ़ाने से आर्थिक विकास (Economic Growth) बाधित हो सकता है, जबकि महंगाई पर इसका असर सीमित रहेगा।
बैंकिंग स्थिरता और रुपये पर फोकस
MPC का मुख्य ध्यान फिलहाल बैंकिंग सिस्टम को मजबूत करने, अस्थिर अंतरराष्ट्रीय पूंजी प्रवाह (volatile international capital flows) को संभालने और भारतीय रुपये की स्थिरता बनाए रखने पर है। मुश्किल वैश्विक आर्थिक माहौल में ये कदम भारत के लिए अहम हैं।
मुद्रा लोन स्कीम ने तोड़े रिकॉर्ड
आर्थिक गतिविधियों की बात करें तो, मुद्रा लोन स्कीम (Mudra loan scheme) ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है। फाइनेंशियल ईयर 2026 तक ₹5.64 लाख करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है। यह स्कीम छोटे पैमाने पर आर्थिक गतिविधियों में लगे लोगों के लिए बहुत मददगार है, जिन्हें पारंपरिक कर्ज मिलने में दिक्कतें आती हैं।
सिर्फ छह राज्यों में स्किल्ड टैलेंट का जमावड़ा
मानव पूंजी (Human Capital) के मोर्चे पर, एक स्टडी से पता चला है कि सिर्फ छह भारतीय राज्य ही अच्छी-खासी संख्या में स्किल्ड टैलेंट (White-collar talent) को आकर्षित कर पा रहे हैं। इनमें हरियाणा, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्य आगे हैं, जिसका कारण उनका बिजनेस-फ्रेंडली माहौल, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्लोबल अपील है।
आर्थिक पूर्वानुमान में नई रणनीति की जरूरत
आर्थिक पूर्वानुमान (Economic Forecasting) की बात करें तो, मौजूदा अनिश्चित दौर में यह काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है। अक्सर पारंपरिक पूर्वानुमान गलत साबित हो रहे हैं। ऐसे में सिनेरियो-आधारित पूर्वानुमान (Scenario-based forecasting) अपनाने की सलाह दी गई है, जिसमें स्पष्ट एजंप्शन और पारदर्शी कम्युनिकेशन हो।