RBI का बड़ा फैसला: ब्याज दरें जस की तस! विकास दर पर भरोसा, ग्लोबल टेंशन के बीच राहत

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AuthorNeha Patil|Published at:
RBI का बड़ा फैसला: ब्याज दरें जस की तस! विकास दर पर भरोसा, ग्लोबल टेंशन के बीच राहत
Overview

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने एक बार फिर ब्याज दरों पर यथास्थिति बनाए रखने का फैसला किया है। MPC ने अपनी अहम बैठक में पॉलिसी रेपो रेट को **5.25%** पर अपरिवर्तित रखा है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने वित्त वर्ष 2027 (FY27) की पहली तिमाही के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान **6.9%** और दूसरी तिमाही के लिए **7.0%** तक बढ़ाया है।

ब्याज दरों में ठहराव, ग्रोथ पर फोकस

RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने 6 फरवरी, 2026 को हुई अपनी बैठक में एक बार फिर बड़ा फैसला लेते हुए प्रमुख ब्याज दर, यानी पॉलिसी रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा है। यह पिछले चार नीतिगत समीक्षाओं में तीसरी बार है जब दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि जहां वैश्विक स्तर पर अनिश्चितताएं बनी हुई हैं, वहीं भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को देखते हुए वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 6.9% और दूसरी तिमाही के लिए 7.0% कर दिया गया है। यह फैसला देश की आर्थिक रफ्तार पर RBI के भरोसे को दर्शाता है।

पॉलिसी पॉज: पिछली कट की ट्रांसमिशन पर जोर

फरवरी 2025 से अब तक कुल 125 बेसिस पॉइंट्स की ब्याज दरों में कटौती के बाद, दिसंबर 2025 में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती के बाद यह एक ठहराव का संकेत है। माना जा रहा है कि RBI अब पिछली दर कटौतियों के असर को अर्थव्यवस्था में पूरी तरह से पहुंचने (ट्रांसमिशन) और सिस्टम में लिक्विडिटी (तरलता) को मैनेज करने पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर रहा है। इंफ्लेशन (मुद्रास्फीति) के आरामदायक स्तर पर रहने और इकोनॉमी में लगातार मजबूती से विश्लेषकों को इसी तरह के ठहराव की उम्मीद थी। RBI का यह रुख दर्शाता है कि वे भविष्य में आर्थिक हालातों के आधार पर अपनी पॉलिसी में बदलाव के लिए लचीलापन बनाए रखना चाहते हैं।

ग्लोबल हेडविंड्स के बीच मजबूत डोमेस्टिक इकोनॉमी

मौजूदा समय में दुनिया भर की इकोनॉमीज में कई तरह की चुनौतियां हैं, लेकिन भारत की डोमेस्टिक इकोनॉमी काफी मजबूत दिख रही है। दिसंबर 2025 में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) इंफ्लेशन 1.33% पर रहा, जो RBI के 2-6% के लक्ष्य बैंड के काफी अंदर है। अच्छी सप्लाई कंडीशंस और सब्जियों की कीमतों में नरमी से इंफ्लेशन कंट्रोल में मदद मिली है। इस स्थिति ने RBI को पॉलिसी दरों पर नरमी बरतने की गुंजाइश दी है। बाहरी मोर्चे पर, भू-राजनीतिक तनाव और व्यापारिक बाधाएं जारी हैं, लेकिन हाल के कुछ डेवलपमेंट, जैसे भारत-अमेरिका व्यापार समझौते, एक्सपोर्ट और ग्रोथ को सहारा दे सकते हैं। इस बीच, दुनिया के बड़े सेंट्रल बैंक जैसे यूएस फेडरल रिजर्व, यूरोपियन सेंट्रल बैंक और बैंक ऑफ इंग्लैंड ने भी ब्याज दरें स्थिर रखी हैं, जो एक जैसी सतर्क आशावादिता को दर्शाती है।

आगे की राह और मार्केट सेंटीमेंट

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ 6.8% से 7.2% के बीच रहने का अनुमान है। यह मजबूत डोमेस्टिक डिमांड, इन्वेस्टमेंट और नीतिगत सुधारों का नतीजा है। हालांकि पॉलिसी के ऐलान पर मार्केट की प्रतिक्रिया फिलहाल शांत रही, लेकिन RBI का लिक्विडिटी और ट्रांसमिशन पर जोर इकोनॉमिक रिकवरी के लिए अच्छा माना जा रहा है। RBI का नजरिया कीमतों को स्थिर रखते हुए ग्रोथ को सपोर्ट करने का है, जिसने भारत को एक लचीली प्रमुख इकोनॉमी के रूप में स्थापित किया है।

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