RBI की पैनी नज़र: ब्याज दरें स्थिर, ग्रोथ पर फोकस
RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने 4-6 फरवरी, 2026 को हुई अपनी बैठक में सर्वसम्मति से प्रमुख ब्याज दर, रेपो रेट को 5.25% पर बनाए रखने का निर्णय लिया है। यह फैसला मौजूदा आर्थिक स्थिरता को बनाए रखने और देश की मजबूत घरेलू ग्रोथ को बढ़ावा देने के इरादे को दर्शाता है। RBI का यह कदम वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में बढ़ती अनिश्चितताओं और महंगाई के दबावों के बीच एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। पॉलिसी दरों को स्थिर रखकर, RBI संकेत दे रहा है कि वर्तमान मौद्रिक नीतियां अर्थव्यवस्था के लिए पर्याप्त हैं, जिससे निवेशकों और व्यवसायों को एक हद तक स्थिरता मिलेगी। इस बैठक के मिनट्स 20 फरवरी को जारी होंगे, जिनसे नीतिगत बारीकियों पर और प्रकाश पड़ेगा।
भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत तस्वीर: ग्रोथ के अच्छे संकेत
RBI ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अपने ग्रोथ अनुमानों को लेकर आशावादी रुख बनाए रखा है। 2025-26 के फाइनेंशियल ईयर के लिए रियल GDP ग्रोथ का अनुमान 7.4% रखा गया है। इसके साथ ही, अगले फाइनेंशियल ईयर (2026-27) की पहली दो तिमाहियों के लिए भी ग्रोथ का अनुमान क्रमशः 6.9% और 7.0% तक बढ़ाया गया है। यह उम्मीद निजी खपत में मजबूती, बेहतर कॉर्पोरेट बैलेंस शीट और सरकारी पूंजीगत व्यय से प्रेरित निवेश गतिविधियों के साथ-साथ सेवा क्षेत्र के शानदार प्रदर्शन पर आधारित है। अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसे प्रमुख भागीदारों के साथ सक्रिय व्यापार समझौतों से निर्यात को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
महंगाई पर नियंत्रण, मगर सतर्कता ज़रूरी
घरेलू स्तर पर महंगाई की स्थिति फिलहाल नियंत्रण में दिख रही है, जिसका श्रेय खाद्य पदार्थों की कीमतों में नरमी और स्थिर ईंधन लागत को जाता है। RBI ने 2025-26 के लिए कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) महंगाई का अनुमान घटाकर 2.1% कर दिया है। हालांकि, चौथी तिमाही में बेस इफेक्ट्स के कारण इसमें थोड़ी बढ़ोतरी की उम्मीद है, लेकिन कुल मिलाकर मूल्य स्थिरता का परिदृश्य काफी सुखद है। इसके बावजूद, RBI वैश्विक कारकों जैसे कीमती धातुओं और ऊर्जा बाज़ारों में उतार-चढ़ाव, और व्यापक भू-राजनीतिक विकास को लेकर चिंतित है। इन बाहरी दबावों से महंगाई बढ़ने का जोखिम बना हुआ है, इसलिए RBI आगे भी स्थिति पर कड़ी नज़र रखेगा।
बाज़ार की प्रतिक्रिया और आगे की राह
RBI के इस फैसले का बाज़ारों पर मिला-जुला असर दिखा। भारतीय बॉन्ड यील्ड्स (Bond Yields) स्थिर बने रहे, क्योंकि यह निर्णय काफी हद तक अपेक्षित था। वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद, भारतीय रुपया (INR) अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूती से टिका रहा, जो घरेलू अर्थव्यवस्था में विश्वास को दर्शाता है। कई उभरते बाज़ारों के केंद्रीय बैंक जहां महंगाई से निपटने के लिए दरों में वृद्धि के दबाव का सामना कर रहे हैं, वहीं भारत की मजबूत ग्रोथ और स्थिर महंगाई की स्थिति RBI को अधिक धैर्यपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने की अनुमति देती है। RBI ने स्पष्ट किया है कि भविष्य के नीतिगत निर्णय आते रहने वाले ग्रोथ और महंगाई के आंकड़ों के साथ-साथ वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक परिदृश्य पर निर्भर करेंगे। विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान मौद्रिक नीति आर्थिक सुधार का समर्थन करने के लिए अच्छी स्थिति में है, बशर्ते बाहरी जोखिम बड़े पैमाने पर न बढ़ें।