RBI का बड़ा फैसला: रेपो रेट स्थिर, महंगाई पर चिंता, ग्रोथ को सहारा!

ECONOMY
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
RBI का बड़ा फैसला: रेपो रेट स्थिर, महंगाई पर चिंता, ग्रोथ को सहारा!
Overview

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आज अपनी मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) की घोषणा करते हुए प्रमुख रेपो रेट (Repo Rate) को **5.25%** पर स्थिर रखने का फैसला किया है। RBI ने आगे भी न्यूट्रल पॉलिसी स्टैंस (Neutral Policy Stance) बनाए रखने के संकेत दिए हैं।

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क्यों लिया गया यह फैसला?

RBI का यह कदम महंगाई (Inflation) को कंट्रोल करने और इकोनॉमिक ग्रोथ (Economic Growth) को सहारा देने के बीच संतुलन बनाने की कोशिश को दर्शाता है। RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने साफ किया कि अब वो दौर खत्म हो गया है जब महंगाई कम थी और ग्रोथ मजबूत थी। अब बाहरी जोखिमों पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है।

महंगाई का बढ़ता खतरा

वैश्विक स्तर पर बढ़ती महंगाई RBI की चिंता का सबसे बड़ा कारण है। खासकर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छू रही हैं। EIA के अनुसार, 2026 में ब्रेंट क्रूड $96 प्रति बैरल तक जा सकता है, जो भारत जैसे देश के लिए बड़ी चिंता है, क्योंकि हम अपनी करीब 85% तेल की जरूरतें आयात से पूरी करते हैं। RBI का अनुमान है कि कच्चे तेल में हर $10 की बढ़ोतरी से भारत की खुदरा महंगाई 0.60% तक बढ़ सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए RBI ने फाइनेंशियल ईयर 27 (FY27) के लिए सीपीआई (CPI) महंगाई दर का अनुमान बढ़ाकर 4.6% कर दिया है। इसके अलावा, अल नीनो (El Niño) जैसे मौसम संबंधी कारक और घरेलू खाद्य पदार्थों की कीमतें भी महंगाई बढ़ा सकती हैं।

ग्रोथ आउटलुक पॉजिटिव, पर चुनौतियां भी

इन चिंताओं के बावजूद, RBI फाइनेंशियल ईयर 27 (FY27) के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.9% पर बरकरार रखा है। हालांकि, वैश्विक मंदी और विदेशी मांग में कमी की आशंकाओं के चलते शुरुआती दो तिमाहियों के लिए ग्रोथ अनुमान को थोड़ा कम किया गया है। IMF ने 2026 के लिए वैश्विक ग्रोथ का अनुमान 3.3% लगाया है, जो एक मिली-जुली तस्वीर पेश करता है। RBI का मानना है कि बढ़ते खर्च और संभावित रूप से घटती उपभोक्ता मांग ग्रोथ को प्रभावित कर सकती है।

बैंकों और MSMEs को राहत

RBI ने वित्तीय क्षेत्र को सहारा देने के लिए कुछ अहम कदम भी उठाए हैं। लिक्विडिटी (Liquidity) को मैनेज किया जाएगा ताकि क्रेडिट फ्लो बना रहे। बैंकों के लिए कैपिटल एडिक्वेसी (Capital Adequacy) के कुछ नियमों को आसान बनाया गया है और इन्वेस्टमेंट फ्लक्चुएशन रिजर्व (IFR) की अनिवार्यता को खत्म कर दिया गया है। इससे बैंकों की पूंजी बढ़ेगी और वे अधिक लोन दे पाएंगे। MSME सेक्टर के लिए नियमों को सरल बनाया गया है, जिससे कारोबार करना आसान होगा।

आगे क्या देखना होगा?

RBI फिलहाल पॉलिसी रेट को FY27 तक स्थिर रखने की उम्मीद कर रहा है, बशर्ते पश्चिम एशिया में शांति बनी रहे और महंगाई काबू में रहे। लेकिन अगर महंगाई उम्मीद से ज्यादा बढ़ती है या पश्चिम एशिया में संघर्ष लंबा खिंचता है, तो RBI को ब्याज दरों में बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। बाजार की नजरें RBI के अगले निर्देशों पर होंगी, ताकि यह समझा जा सके कि वे महंगाई और ग्रोथ के बीच कैसे संतुलन बना रहे हैं।

मुख्य जोखिम: तेल की कीमतों में अचानक उछाल, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, और घरेलू खाद्य महंगाई।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.