महंगाई की मार, RBI की चिंता बढ़ी
RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि फिस्कल ईयर 2026-27 (FY27) में महंगाई दर बढ़कर 4.6% तक पहुंच सकती है, जो FY26 के अनुमान 2.1% से काफी ज्यादा है। इस बढ़त की मुख्य वजह पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव है, जिसके कारण कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें $100-$120 प्रति बैरल के स्तर पर बनी हुई हैं। भारत अपनी तेल की जरूरत का लगभग 90% आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल के दाम बढ़ने से इंपोर्ट बिल बढ़ता है और देश में महंगाई का दबाव बढ़ता है।
एक अस्थायी यूएस-ईरान सीजफायर (US-Iran Ceasefire) से कुछ समय के लिए राहत मिली थी, जिससे ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) $100 से नीचे आकर $95 के आसपास आ गया था और रुपये को भी मजबूती मिली थी। लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि यह राहत ज्यादा दिन टिकने वाली नहीं है और तेल की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं। पिछले एक साल में भारतीय रुपया करीब 7.40% कमजोर हुआ है, जो मार्च 2026 में रिकॉर्ड 99.82 के स्तर तक चला गया था। RBI ने रुपये की अस्थिरता को संभालने के लिए फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व (Foreign Exchange Reserves) का इस्तेमाल किया है, लेकिन लंबे समय तक बाहरी झटकों से रुपये को गिरना नहीं रोक सकता।
GDP ग्रोथ पर भी असर की आशंका
बढ़ती महंगाई और ग्लोबल अनिश्चितता के बीच भारत की आर्थिक विकास दर (GDP Growth) के अनुमानों में भी कटौती की जा रही है। RBI ने FY26 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7.6% कर दिया है, लेकिन FY27 के लिए इसे 6.9% पर रखा है। वहीं, कई स्वतंत्र विश्लेषकों का अनुमान इससे भी कम है। मॉर्गन स्टेनली (Morgan Stanley) ने सप्लाई की दिक्कतों और एनर्जी की बढ़ी कीमतों को देखते हुए FY27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 0.3% घटाकर 6.2% कर दिया है। कुछ अन्य विश्लेषक तो जून 2026 तक ग्रोथ के 5.9% तक गिरने की बात कह रहे हैं।
रुपया क्यों है दबाव में? RBI क्या कर रहा है?
भारतीय रुपया लगातार बाहरी झटकों और कुछ अंदरूनी कमजोरियों के चलते दबाव में है। 8 अप्रैल 2026 तक रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 92.63 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। इसका मुख्य कारण पश्चिम एशिया संघर्ष से कच्चे तेल का महंगा होना और विदेशी निवेशकों (Foreign Investors) का सुरक्षित निवेश की ओर जाना है। RBI रुपये की गिरावट को थामने के लिए फॉरेन रिजर्व बेचने जैसे कदम उठा रहा है। हालांकि, 8 अप्रैल को एक अस्थायी सीजफायर की खबर से रुपये को कुछ शुरुआती मजबूती मिली थी, लेकिन यह स्थिति कितनी देर तक बनी रहेगी, यह देखना बाकी है।
संरचनात्मक कमजोरियां बन रहीं सिरदर्द
भारत अपनी लगभग 90% तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, जो इसे पश्चिम एशिया में किसी भी बड़े झटके के प्रति बेहद संवेदनशील बनाता है। यदि तेल की कीमतें $110-$150 प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं, तो महंगाई RBI की 6% की सीमा को पार कर सकती है और GDP ग्रोथ 5.7% तक गिर सकती है। इसके अलावा, मौजूदा चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) जो FY27 के लिए 2.5% रहने का अनुमान है, और पूंजी प्रवाह (Capital Inflows) की धीमी गति रुपये के लिए जोखिम बढ़ा रही है। विदेशी निवेश का लगातार बाहर जाना भी रुपये को कमजोर कर रहा है।