RBI का बड़ा फैसला: रेपो रेट **5.25%** पर स्थिर, पर महंगाई पर कड़ी नजर!

ECONOMY
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AuthorAditya Rao|Published at:
RBI का बड़ा फैसला: रेपो रेट **5.25%** पर स्थिर, पर महंगाई पर कड़ी नजर!
Overview

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने महंगाई को लेकर चिंता जताते हुए वित्त वर्ष **2026-27** (FY27) के लिए उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति (consumer price inflation) का अनुमान **4.6%** लगाया है। वैश्विक अनिश्चितताओं और ऊंची कमोडिटी कीमतों को मुख्य जोखिम बताते हुए, केंद्रीय बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने सर्वसम्मति से प्रमुख **रेपो रेट (repo rate)** को **5.25%** पर अपरिवर्तित रखा है और अपनी **न्यूट्रल (neutral)** नीतिगत मंशा को बनाए रखा है।

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महंगाई पर RBI की पैनी नजर, पर रेट्स में कोई बदलाव नहीं

RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति (CPI) 4.6% रहने का अनुमान जताया है, जो कि चिंता का विषय है। इसके अलावा, तीसरी तिमाही (Q3 FY27) में महंगाई दर 5.2% तक पहुंचने की आशंका है। पहली बार, RBI ने कोर इन्फ्लेशन (core inflation) का अनुमान भी 4.4% जारी किया है, जो खाद्य और ऊर्जा की कीमतों को छोड़कर महंगाई के असली रुझान को समझने में मदद करेगा। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने साफ किया कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा व कमोडिटी की ऊंची कीमतें महंगाई के लिए बड़े जोखिम हैं, जो अनुमान से ऊपर जा सकती हैं।

'वेट एंड वॉच' मोड में RBI, रेपो रेट 5.25% पर स्थिर

मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने सर्वसम्मति से प्रमुख रेपो रेट (repo rate) को 5.25% पर स्थिर रखने का फैसला किया है। यह दर दिसंबर 2025 से अपरिवर्तित है। केंद्रीय बैंक ने अपनी न्यूट्रल (neutral) नीतिगत मंशा को बनाए रखा है, जिसका अर्थ है कि RBI 'प्रतीक्षा करो और देखो' (wait and watch) की रणनीति अपना रहा है। यह कदम दर्शाता है कि RBI आगे की आर्थिक गतिविधियों और वैश्विक घटनाओं पर बारीकी से नजर रखेगा।

विकास दर का अनुमान थोड़ा घटाया, पर अर्थव्यवस्था मजबूत

आर्थिक विकास दर (GDP growth) के मोर्चे पर, RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विकास दर का अनुमान थोड़ा घटाकर 6.9% कर दिया है। हालांकि, हालिया आर्थिक आंकड़ों ने अर्थव्यवस्था में मजबूती दिखाई है, जिसमें सर्विसेज सेक्टर की अच्छी ग्रोथ, कंपनियों की मजबूत वित्तीय स्थिति और शहरी इलाकों में बढ़ता उपभोक्ता खर्च शामिल है। लेकिन, ऊंची एनर्जी और कमोडिटी की कीमतों का विकास दर पर असर पड़ सकता है।

'इम्पोर्टेड इन्फ्लेशन' और गिरते रुपये का खतरा

भारत के लिए सबसे बड़ा जोखिम 'आयातित महंगाई' (imported inflation) का है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव तेल (oil) और एलपीजी (LPG) की आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है, जिससे भारत की आयात लागत बढ़ सकती है। पिछले साल भारतीय रुपया () में 7.40% की गिरावट भी आयात को महंगा बना रही है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर कच्चे तेल (crude oil) की कीमतें $85-100 प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं, तो महंगाई 6.4-6.6% तक जा सकती है, जो RBI के लक्ष्य से काफी ऊपर है।

वैश्विक मंदी की आहट और RBI का संतुलन

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो, मूडीज (Moody's) ने FY27 में महंगाई 4.8%, जबकि ओईसीडी (OECD) ने 5.1% रहने का अनुमान लगाया है। RBI की महंगाई पर पैनी नजर और कोर इन्फ्लेशन जैसे नए मापदंडों का उपयोग, वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच उम्मीदों को प्रबंधित करने की ओर इशारा करता है। RBI की भविष्य की नीतियां इस बात पर निर्भर करेंगी कि वैश्विक माहौल और महंगाई का दबाव कैसे रहता है, खासकर पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.