RBI का 'नो चेंज' फैसला: ग्लोबल तूफानों के बीच भारत की आर्थिक मजबूती
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने आम सहमति से रेपो रेट को 5.25% पर यथावत रखने का निर्णय लिया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा द्वारा घोषित यह फैसला, RBI की तटस्थ मॉनेटरी पॉलिसी स्टान्स (neutral monetary policy stance) को भी बनाए रखता है। इस निर्णय के पीछे मुख्य वजह देश की मजबूत घरेलू आर्थिक रफ्तार और नियंत्रण में दिख रही महंगाई दर है। हालांकि, RBI ने वैश्विक स्तर पर बढ़ती आर्थिक अनिश्चितताओं (global headwinds) को भी स्वीकार किया है, लेकिन हाल ही में अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसे देशों के साथ हुए व्यापार समझौते और एक सहायक यूनियन बजट ने भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रति आशावाद को बढ़ाया है।
वैश्विक नीतियों से अलग भारत की राह
यह 'होल्ड' (hold) का फैसला भारत को उस वैश्विक परिदृश्य से अलग खड़ा करता है जहां विभिन्न देशों की मॉनेटरी पॉलिसी में भिन्नता देखने को मिल रही है। जहां एक ओर अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने जनवरी 2026 में अपने फेडरल फंड्स रेट को 3.50%–3.75% की सीमा में बनाए रखा, वहीं बैंक ऑफ इंग्लैंड ने दिसंबर 2025 में अपनी दर को 3.75% तक घटाकर आगे और धीरे-धीरे राहत देने के संकेत दिए हैं। यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) ने भी अपनी डिपॉजिट रेट 2% पर स्थिर रखी है। इन सबके बीच, भारत की नीतिगत स्थिरता (policy pause) घरेलू विकास चालकों (domestic growth drivers) में विश्वास को दर्शाती है, जो अर्थव्यवस्था को वैश्विक अनिश्चितताओं से काफी हद तक बचा रहे हैं।
**### ग्रोथ और महंगाई के अनुमान
RBI के अनुमानों के अनुसार, FY2025-26 के लिए जीडीपी ग्रोथ का लक्ष्य 7.4% रखा गया है। FY2026-27 की पहली और दूसरी तिमाही (Q1 and Q2) के लिए ग्रोथ के अनुमान को क्रमशः 6.9% और 7.0% तक बढ़ाया गया है। इन्फ्लेशन की बात करें तो, कुछ तिमाहियों में बेस इफेक्ट्स (base effects) के कारण मामूली वृद्धि देखी गई है, लेकिन FY2025-26 के लिए औसत इन्फ्लेशन 2.1% रहने का अनुमान है, जबकि कोर इन्फ्लेशन (core inflation) नरम बनी हुई है।
**### निवेशकों के लिए मायने
RBI के यथास्थिति बनाए रखने के फैसले का मतलब है कि होम लोन की ईएमआई (EMI) में तत्काल किसी और कटौती की उम्मीद नहीं है, हालांकि 2025 की शुरुआत से अब तक हुए 1.25% की कुल रेपो रेट कटौती से पहले ही काफी राहत मिल चुकी है। फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की दरों में भी धीरे-धीरे नरमी जारी रहने की संभावना है। ऐसे में, निवेशकों को अलग-अलग अवधियों (tenures) में अपने निवेश को विविधतापूर्ण (diversify) रखने की सलाह दी जा रही है। म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए, यह स्थिर दर का माहौल मध्यम से लंबी अवधि के डेट पोर्टफोलियो (debt portfolios) के लिए सकारात्मक माना जा रहा है, वहीं इक्विटी मार्केट्स (equity markets) को नीतिगत निरंतरता (policy continuity) से लाभ हो सकता है। वर्तमान बाजार मूल्यांकन (market valuations) के अनुसार, निफ्टी 50 का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो लगभग 22.2 है, और सेंसेक्स का P/E रेश्यो लगभग 22.9-23.05 है। 10-वर्षीय भारतीय सरकारी बॉन्ड यील्ड (bond yield) लगभग 6.68% पर है, और भारतीय रुपया (Indian Rupee) अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग 90.37 पर कारोबार कर रहा है। ऐतिहासिक रूप से, बाजार की उम्मीदों पर खरी उतरने वाली नीतिगत स्थिरता अक्सर बाजार में स्थिरता लाती है, जो केंद्रीय बैंक के डेटा-आधारित भविष्य की कार्रवाइयों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।