नीतिगत स्थिरता पर RBI का जोर!
शुक्रवार, 6 फरवरी 2026 को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने सर्वसम्मति से 5.25% पर रेपो रेट को अपरिवर्तित रखने का फैसला किया। यह कदम पिछले 125 बीपीएस (bps) के ईजिंग साइकिल (Easing Cycle) के अंत का साफ संकेत देता है। HSBC ग्लोबल इन्वेस्टमेंट रिसर्च के अनुसार, यह फैसला नीतिगत स्थिरता की ओर एक रणनीतिक मोड़ है, जिसका अर्थ है कि केंद्रीय बैंक अर्थव्यवस्था को बड़े झटके लगने की स्थिति को छोड़कर, और अधिक ग्रोथ स्टिमुलस (Growth Stimulus) देने से बचेगा। यह कदम यूरोपीय संघ (EU) और संयुक्त राज्य अमेरिका (US) के साथ हुए अनुकूल व्यापार समझौतों (Trade Deals) को देखते हुए बाजार की उम्मीदों के अनुरूप है, जिनसे भविष्य में ग्रोथ की संभावनाओं को बल मिलने की उम्मीद है।
ग्रोथ की रफ्तार तेज, महंगाई पर पैनी नजर
दरें स्थिर रखते हुए, RBI ने अपने मैक्रोइकॉनॉमिक फोरकास्ट (Macroeconomic Forecasts) में कुछ बदलाव किए हैं। Q4 फाइनेंशियल ईयर 26 (FY26) के लिए इन्फ्लेशन (Inflation) का अनुमान 2.9% से बढ़ाकर 3.2% कर दिया गया है। वहीं, FY27 की पहली छमाही (H1 FY27) के लिए इन्फ्लेशन का अनुमान 4.0% से थोड़ा बढ़ाकर 4.1% किया गया है। हालांकि, RBI ने जोर देकर कहा कि ये बढ़ोतरी मुख्य रूप से प्रीशियस मेटल्स (Precious Metals) की कीमतों में तेजी के कारण हुई है, जिनका इन्फ्लेशन पर अनुमानित 60-70 बीपीएस का प्रभाव है। वहीं, घरेलू स्तर पर इन्फ्लेशनरी प्रेशर (Inflationary Pressures) अभी भी नियंत्रित हैं। इसी के साथ, FY27 की पहली छमाही के लिए ग्रोथ फोरकास्ट (Growth Forecast) को 20 बीपीएस बढ़ाकर 7.0% कर दिया गया है। विभिन्न आर्थिक सर्वे FY27 में भारत की जीडीपी ग्रोथ (GDP Growth) को 6.8% से 7.2% के बीच रहने का अनुमान लगा रहे हैं। यह मजबूती घरेलू मांग, प्रभावी सुधारों और विवेकपूर्ण फिस्कल मैनेजमेंट (Fiscal Management) का नतीजा है, भले ही वैश्विक व्यापार की स्थिति अनिश्चित बनी हुई है।
मार्केट की चाल और लिक्विडिटी मैनेजमेंट
रेपो रेट को होल्ड करने के फैसले और इन्फ्लेशन के अनुमानों में मामूली बढ़ोतरी के चलते, बाजार का ध्यान अब RBI द्वारा लिक्विडिटी मैनेजमेंट (Liquidity Management) पर केंद्रित हो गया है। वैश्विक बॉन्ड यील्ड्स (Bond Yields) में वृद्धि को स्वीकार करते हुए, RBI ने कहा कि पॉलिसी ईजिंग (Policy Easing) का लाभ घरेलू लेंडिंग (Lending) और डिपॉजिट रेट्स (Deposit Rates) में लगातार दिख रहा है। ओवरनाइट कॉल रेट (Overnight Call Rate) को रेपो रेट के साथ संरेखित करने और लिक्विडिटी की उतार-चढ़ाव को प्रबंधित करने की प्रतिबद्धता से बाजार के सेंटिमेंट (Market Sentiment) को समर्थन मिलने की उम्मीद है। 10-साल के जी-सेक यील्ड (10-year G-Sec Yield) वर्तमान में लगभग 6.7% के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो एक स्थिर यील्ड वातावरण को दर्शाता है। बाहरी स्थिरता के मोर्चे पर, व्यापारिक समझौते भारत के करेंट अकाउंट (Current Account) और बैलेंस ऑफ पेमेंट्स (BOP) को समर्थन देने, USD/INR को स्थिर करने और फॉरेन एक्सचेंज मार्केट्स (Foreign Exchange Markets) में RBI के हस्तक्षेप की आवश्यकता को कम करने की उम्मीद है। USD/INR की विनिमय दर वर्तमान में लगभग 90.25 के आसपास बनी हुई है। एशियाई बाजारों में, 2026 तक केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियों में भिन्नता देखने की उम्मीद है, कुछ टाइटनिंग (Tightening) कर सकते हैं जबकि अन्य अकॉमडेटिव (Accommodative) रुख बनाए रखेंगे।
विश्लेषकों की राय और आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि RBI का यह कदम विवेकपूर्ण है, जो ग्रोथ की जरूरतों को इन्फ्लेशन की सतर्कता के साथ संतुलित करता है। एक्सिस म्यूचुअल फंड (Axis Mutual Fund) के देवांग शाह ने कहा कि अनुकूल व्यापार सौदे और यूनियन बजट (Union Budget) FY27 में एक टिकाऊ ग्रोथ साइकिल के लिए भारत के मैक्रो आउटलुक (Macro Outlook) को मजबूत करते हैं। ICRA की अदिति नायर जैसे विश्लेषकों को उम्मीद है कि व्यापार सौदों का भारत की FY2027 जीडीपी ग्रोथ पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। सरकार का बजट 2026 FY27 के लिए 4.3% के फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit) का लक्ष्य रखता है, जो फिस्कल कंसोलिडेशन (Fiscal Consolidation) की निरंतरता को दर्शाता है। हालांकि बाजारों में शुरुआती गिरावट देखी गई, जिसमें निफ्टी (Nifty) 0.57% गिरा, विश्लेषकों का सुझाव है कि स्थिर दर व्यवस्था (Stable Rate Regime) मध्यम से लंबी अवधि के डेट इन्वेस्टमेंट्स (Debt Investments) का समर्थन करती है। अब ध्यान RBI की लिक्विडिटी प्रदान करने की निरंतर चपलता और वैश्विक कमोडिटी प्राइसेस (Commodity Prices), विशेष रूप से प्रीशियस मेटल्स, के इन्फ्लेशन आउटलुक पर पड़ने वाले प्रभाव पर शिफ्ट हो गया है।