RBI का 'न्यूट्रल' स्टैंड: ग्रोथ पर फोकस, रिस्क पर नजर
RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने लगातार चौथी बार रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा है। यह फैसला सर्वसम्मति से लिया गया और इसने 'न्यूट्रल' पॉलिसी स्टान्स को भी बरकरार रखा है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के मुताबिक, यह कदम भारत की मजबूत घरेलू ग्रोथ को देखते हुए सही है, खासकर उन ट्रेड डील्स के बाद जिनसे एक्सपोर्ट और इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यह स्थायित्व (stability) बिजनेसेज और लोन लेने वालों के लिए अनुमान लगाना आसान बनाता है। ऐसे समय में जब दुनिया भर में भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical tensions) और शेयर बाजारों में भारी उथल-पुथल (volatility) है, RBI का यह कदम भारत की आर्थिक राह को स्थिर रखने की प्राथमिकता दिखाता है।
ग्रोथ रॉकेट: ट्रेड डील से मिला बूस्ट
FY26 के लिए इंडिया की रियल GDP ग्रोथ का अनुमान 7.4% लगाया गया है, जो कि काफी मजबूत है। इसका बड़ा श्रेय डोमेस्टिक डिमांड और मैन्युफैक्चरिंग व सर्विसेज सेक्टर की रफ्तार को जाता है। सर्विसेज सेक्टर के 9.1% की दर से बढ़ने की उम्मीद है। अमेरिका और EU के साथ हुए नए ट्रेड एग्रीमेंट्स को एक बड़ा गेम-चेंजर माना जा रहा है। इनसे भारत के एक्सटर्नल सेक्टर का आउटलुक काफी बेहतर हुआ है और इन्वेस्टमेंट व एक्सपोर्ट्स को बड़ा बूस्ट मिलेगा। एनालिस्ट्स का मानना है कि इन डील्स से भारत की मैन्युफैक्चरिंग कॉम्पिटिटिवनेस बढ़ेगी और FY27 तक एक्सपोर्ट $1 ट्रिलियन तक पहुंच सकते हैं। EU-India फ्री ट्रेड एग्रीमेंट, जो जनवरी 2026 में फाइनल हुआ, द्विपक्षीय व्यापार को काफी बढ़ाने का लक्ष्य रखता है।
महंगाई पर पैनी नजर
हालांकि, RBI महंगाई को लेकर सतर्क है। FY26 के लिए हेडलाइन इन्फ्लेशन (Headline Inflation) का अनुमान 2.1% पर है। दिसंबर 2025 में CPI इन्फ्लेशन 1.33% था, जो जनवरी 2026 में बढ़कर 2.75% हो गया (एक नए रिवाइज्ड सीरीज के तहत)। हालांकि, कुछ कोर इन्फ्लेशन कंपोनेंट्स (खासकर सोना-चांदी जैसी कीमती धातुओं की कीमतों में बढ़ोतरी) में थोड़ी बढ़त देखी गई है, जिसने RBI की चिंताएं थोड़ी बढ़ा दी हैं। गोल्डमैन सैक्स FY26 के लिए महंगाई दर 3.9% और क्रिसिल FY27 के लिए 4.3% रहने का अनुमान लगा रहे हैं।
ग्लोबल टेंशन का असर?
दुनिया भर में बनी 'नर्वस' सेंटीमेंट और बढ़ते जियो-पॉलिटिकल रिस्क, जैसे कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव, ग्लोबल कमोडिटी प्राइसेज को बढ़ा सकते हैं और भारत की इन्फ्लेशन आउटलुक पर दबाव डाल सकते हैं। सप्लाई चेन में रुकावटों का खतरा भी बना हुआ है। MPC के एक सदस्य, प्रोफेसर राम सिंह, ने इस निर्णय से असहमति जताई और 'अकॉमोडेटिव' (accommodative) स्टान्स की वकालत की, जो बताता है कि सभी सदस्य वर्तमान स्थिति से पूरी तरह सहज नहीं हैं। RBI लिक्विडिटी मैनेजमेंट पर भी ध्यान दे रहा है ताकि बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त पैसा बना रहे।
आगे क्या?
भविष्य को देखते हुए, इंडिया की ग्रोथ की रफ्तार बने रहने की उम्मीद है, जो कि वैश्विक औसत से बेहतर है। RBI का 'न्यूट्रल' स्टान्स इसे फ्लेक्सिबिलिटी देता है। हालांकि, ग्लोबल अनिश्चितताओं को देखते हुए RBI की यह सतर्क चाल फिलहाल जारी रहने की संभावना है, क्योंकि वह घरेलू हालात पर नजर रखते हुए वैश्विक आर्थिक परिदृश्य का आकलन करेगा।