ग्रोथ की रफ्तार तेज, पर ब्याज दरें जस की तस
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आज मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के नतीजों का ऐलान करते हुए कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था 7.4% की जोरदार रफ्तार से आगे बढ़ेगी। इस अनुमान के पीछे बजट में हुए बड़े सरकारी खर्च और भारत-यूरोपियन यूनियन के बीच होने वाले ट्रेड डील को अहम बताया जा रहा है। इन सबको देखते हुए, केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट को 5.25% पर ही बनाए रखा है और अपनी 'न्यूट्रल' (Neutral) नीतिगत सोच को जारी रखने का फैसला किया है।
ग्रोथ के पीछे क्या है दम?
सरकार के बढ़ते कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) और इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर देने से इकोनॉमी को बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही, एक्सपोर्ट्स (Exports) में भी मजबूती की संभावना है, खासकर भारत-यूरोपियन यूनियन के बीच चल रही ट्रेड डील से।
महंगाई पर क्या है RBI की नजर?
हालांकि, ग्रोथ के अनुमान भले ही अच्छे हों, लेकिन महंगाई को लेकर RBI थोड़ी सतर्क है। FY26 के लिए महंगाई का अनुमान थोड़ा बढ़ाकर 2.1% कर दिया गया है। ये पिछले अनुमान 2% से थोड़ा ज्यादा है। RBI ने नई महंगाई डेटा सीरीज को देखते हुए, तीसरी और चौथी तिमाही के अनुमानों को अप्रैल की MPC मीटिंग के लिए टाल दिया है।
मार्केट की क्या है राय?
बाजार की बात करें तो, निफ्टी 50 का P/E Ratio इस समय 22.2 पर है, और भारत की कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalisation) जनवरी 2026 तक लगभग $5.001 ट्रिलियन तक पहुंच चुकी है। (NSE का कुल मार्केट कैप दिसंबर 2024 में $5.13 ट्रिलियन था)।
ग्लोबल इकोनॉमी में भारत का बढ़ता कद
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) का अनुमान है कि 2026 में ग्लोबल रियल GDP ग्रोथ में भारत का योगदान 17% रहेगा, जो दुनिया की सबसे बड़ी इकोनॉमीज़ में से एक है।
फिस्कल सिचुएशन और आगे की राह
सरकार ने फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए 4.3% फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit) का लक्ष्य रखा है। बजट 2026-27 में इंफ्रास्ट्रक्चर पर ₹12.2 लाख करोड़ खर्च करने की योजना है। RBI ने फरवरी 2025 से अब तक कुल 125 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की है, और सिस्टम लिक्विडिटी (System Liquidity) में सरप्लस बना हुआ है।