RBI की मार्केट लिक्विडिटी बढ़ाने की कवायद
लिक्विडिटी (liquidity) को मजबूत करने और बाजार की अस्थिरता (volatility) को बेहतर ढंग से संभालने की अपनी रणनीति के तहत, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने प्राइमरी डीलर्स के लिए बॉन्ड ट्रेडिंग के लक्ष्यों में भारी बढ़ोतरी का निर्देश दिया है। यह कदम गवर्नर संजय मल्होत्रा की प्राथमिकताओं में से एक है, जिसका उद्देश्य सॉवरेन डेट मार्केट (sovereign debt market) में तरलता को और गहरा करना है।
प्राइमरी डीलर्स के लिए नए निर्देश
RBI ने अपने 21 प्राइमरी डीलर्स के लिए सालाना बॉन्ड ट्रेडिंग टारगेट में 48% का इजाफा किया है। अब हर डीलर को चालू फाइनेंशियल ईयर के लिए न्यूनतम ₹4 ट्रिलियन ($41.8 बिलियन) के बॉन्ड ट्रेड करने होंगे। यह Mandatory trading volume में एक महत्वपूर्ण वृद्धि है, जो इन इंटरमीडियरीज पर बड़ी जिम्मेदारी डालती है। ये डीलर्स सरकारी डेट को अंडरराइट करने और सेकेंडरी मार्केट लिक्विडिटी बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। RBI का यह कदम, विशेष रूप से करेंसी में उतार-चढ़ाव और वैश्विक कमोडिटी प्राइसेज जैसी बाहरी अस्थिरता के बीच, एक मजबूत बाजार बनाने की दिशा में है।
बढ़ी मार्केट एक्टिविटी
ट्रेडिंग टारगेट में इस वृद्धि का असर मार्केट पर दिखने लगा है। अप्रैल के बाद से, भारत के 10-वर्षीय बेंचमार्क बॉन्ड (10-year benchmark bond) में दैनिक ट्रेडिंग वॉल्यूम 40% तक बढ़ गया है, जबकि इसी अवधि में कुल बॉन्ड ट्रेडिंग में 15% का इजाफा हुआ है। यह बढ़ी हुई एक्टिविटी RBI के निर्देशों का सीधा परिणाम है।
डीलर के लिए चुनौतियां और जोखिम
हालांकि, प्राइमरी डीलर्स के लिए इस बढ़ी हुई ट्रेडिंग वॉल्यूम को पूरा करना आसान नहीं होगा। उभरते बाजारों में, प्राइमरी डीलर्स को प्राइस और फॉरेन एक्सचेंज वोलेटिलिटी (foreign exchange volatility) जैसे उच्च जोखिमों का सामना करना पड़ता है। यह देखा जाना बाकी है कि क्या डीलर इन बढ़ी हुई मात्राओं को पूरा करते हुए अपनी मार्जिन को बनाए रख पाएंगे। इन्फ्लेशन (inflation), करेंसी डेप्रिसिएशन (currency depreciation), और जियोपॉलिटिकल टेंशन (geopolitical tension) जैसे कारक बाजार में अनिश्चितता बढ़ा सकते हैं, जिससे बॉन्ड यील्ड (bond yield) पर दबाव आ सकता है।
भविष्य का दृष्टिकोण
RBI के इस कदम से बाजार में वॉल्यूम एलिवेटेड रहने की उम्मीद है, जो निवेशकों को करेंसी वैल्यू और वैश्विक तेल कीमतों से प्रेरित अस्थिरता से बचाने में मदद करेगा। भारतीय बॉन्ड का ग्लोबल इंडेक्स (global indices) में शामिल होना एक सकारात्मक संकेत है, जिससे फॉरेन इनफ्लो (foreign inflows) आकर्षित होने की उम्मीद है। हालांकि, निकट भविष्य में बॉन्ड यील्ड वैश्विक ब्याज दरों और भू-राजनीतिक घटनाओं के प्रति संवेदनशील बने रहेंगे। RBI को लिक्विडिटी सपोर्ट को इन्फ्लेशन के जोखिमों के साथ संतुलित करना होगा।