RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान **6.6%** लगाया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट और मॉनसून की अनिश्चितता प्रमुख जोखिम हैं। खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने से महंगाई का अनुमान भी बढ़ाकर **5.1%** कर दिया गया है, लेकिन केंद्रीय बैंक स्थिरता और आर्थिक विकास में संतुलन बनाए रखने पर जोर दे रहा है।
आर्थिक भविष्य को लेकर RBI गवर्नर की चेतावनी
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने देश की आर्थिक स्थिति को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहा संकट और मॉनसून की संभावित अनियमितताएं अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौतियां बन सकती हैं। हाल के वर्षों में भारत की ग्रोथ 7% से ऊपर बनी हुई है, लेकिन इस वित्तीय वर्ष के लिए केंद्रीय बैंक का अनुमान 6.6% ग्रोथ का है। गवर्नर दास ने यह भी कहा कि इन बाहरी जोखिमों का घरेलू कृषि उत्पादन पर क्या असर पड़ेगा, इस पर करीबी नजर रखी जाएगी।
महंगाई का अनुमान बढ़ा
RBI ने इस बार महंगाई के अनुमानों में भी बढ़ोतरी की है। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2027 के लिए खुदरा महंगाई (Retail Inflation) का अनुमान बढ़ाकर 5.1% कर दिया है, जो पहले 4.6% था। जून में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.38% हो गई थी, जो मई में 3.93% थी। गवर्नर दास ने बताया कि खाद्य पदार्थों की सप्लाई में आ रही दिक्कतों के कारण महंगाई बढ़ी है। चूंकि कृषि भारत की GDP में करीब 17% का योगदान करती है, इसलिए मॉनसून का प्रदर्शन खाद्य पदार्थों की उपलब्धता और महंगाई पर सीधा असर डालेगा।
बाहरी और बैंकिंग सेक्टर में स्थिरता
वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव और अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने के बावजूद, RBI गवर्नर ने भारतीय रुपये को स्थिर बताया। निवेश की बात करें तो, पिछले साल $95 अरब का रिकॉर्ड विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) आया था। इस वित्तीय वर्ष के पहले दो महीनों में लगभग $7 अरब का नेट FDI दर्ज किया गया है।
बैंकिंग सेक्टर भी अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहा है, जून में साल-दर-साल क्रेडिट ग्रोथ बढ़कर लगभग 18% हो गई, जो मई में 17.5% थी। RBI बैंकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी नई टेक्नोलॉजी अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है, बशर्ते वे साइबर सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी के मानकों का सख्ती से पालन करें।
ग्रोथ और महंगाई नियंत्रण में संतुलन
गवर्नर दास ने दोहराया कि RBI का मुख्य लक्ष्य महंगाई पर काबू पाना और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। मौजूदा फ्लेक्सिबल इन्फ्लेशन-टारगेटिंग फ्रेमवर्क के तहत, इन दोनों लक्ष्यों को एक-दूसरे का पूरक माना जाता है। गवर्नर ने यह भी संकेत दिया कि विदेशी मुद्रा भंडार और निवेश का मौजूदा स्तर वैश्विक झटकों से निपटने के लिए पर्याप्त है। निवेशकों को मॉनसून की प्रगति और खाद्य कीमतों पर आने वाले आंकड़ों पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि ये आने वाली नीतिगत फैसलों को प्रभावित कर सकते हैं।
