भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास जून 2026 तक **880.52 टन** सोना जमा हो चुका है। जहां केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहा है, वहीं सरकार ने माना है कि भारतीय घरों और धार्मिक संस्थानों में रखे सोने का कोई आंकड़ा उसके पास नहीं है। इससे देश की सोने की एक बड़ी संपत्ति आधिकारिक आंकड़ों से बाहर है।
Detailed Coverage
RBI के सोने के भंडार में इजाफा
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास 28 जुलाई 2026 तक 880.52 मीट्रिक टन सोना है। यह दर्शाता है कि केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा भंडार (foreign exchange reserves) को बढ़ाने के लिए लगातार सोना खरीद रहा है। यह रणनीति दुनिया भर के कई केंद्रीय बैंकों द्वारा अपनाई जा रही है, जो अमेरिकी डॉलर जैसी फिएट मुद्राओं पर निर्भरता कम करना चाहते हैं।
पिछले 3 सालों में सोने की खरीद
वित्त मंत्रालय द्वारा जारी ऐतिहासिक आंकड़ों के मुताबिक, पिछले तीन सालों में RBI के सोने के भंडार में काफी बढ़ोतरी हुई है। 31 मार्च 2023 को जहां यह 794.63 टन था, वहीं 31 मार्च 2024 तक बढ़कर 822.10 टन हो गया। सबसे ज्यादा खरीदारी फाइनेंशियल ईयर 2025 में हुई, जब केंद्रीय बैंक ने 57.48 टन सोना खरीदा और कुल भंडार 879.58 टन तक पहुंच गया। इसके बाद, मार्च 2026 में समाप्त हुए साल में एक टन से भी कम की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
प्राइवेट होल्डिंग्स पर सरकार का रुख
जहां RBI का सोना भंडार पारदर्शी रूप से रिपोर्ट किया जाता है, वहीं भारत की कुल सोने की संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा आधिकारिक निगरानी से बाहर है। संसदीय सवालों के जवाब में, वित्त मंत्रालय ने साफ किया है कि न तो केंद्रीय बैंक और न ही आर्थिक मामलों के विभाग (Department of Economic Affairs) ने घरों या धार्मिक संस्थानों में रखे सोने की मात्रा का कोई आकलन किया है। यह प्राइवेट होल्डिंग्स दुनिया में सबसे बड़ी मानी जाती हैं, लेकिन राष्ट्रीय वित्तीय आंकड़ों (national financial statistics) में इनका कोई उल्लेख नहीं है।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
प्राइवेट सोने के स्टॉक पर आधिकारिक डेटा की कमी, निवेशकों और बाजार विश्लेषकों के लिए भारत के चालू खाते के घाटे (current account deficit) पर सोने की मांग के कुल प्रभाव का आकलन करना मुश्किल बनाती है। RBI का सोना जमा करना जहां करेंसी की अस्थिरता (currency volatility) और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के खिलाफ एक बचाव (hedge) है, वहीं अज्ञात प्राइवेट बाजार मांग का एक समानांतर स्रोत बना हुआ है। संप्रभु स्वर्ण भंडार (sovereign gold reserves) और घरेलू होल्डिंग्स के बीच के अंतर को समझना महत्वपूर्ण है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि सोने की कीमतों में भविष्य के उतार-चढ़ाव भारत के आयात बिल (import bills) और व्यापार संतुलन (trade balance) को कैसे प्रभावित कर सकते हैं। बाजार के लिए मुख्य निगरानी योग्य बिंदु RBI की रिजर्व पोर्टफोलियो के लिए चल रही रणनीति है।
