RBI का Forex पर रिकॉर्ड मुनाफा, पर रुपए की अस्थिरता के बड़े संकेत

ECONOMY
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AuthorMehul Desai|Published at:
RBI का Forex पर रिकॉर्ड मुनाफा, पर रुपए की अस्थिरता के बड़े संकेत
Overview

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने फॉरेन एक्सचेंज (Forex) में रिकॉर्ड **₹1.69 लाख करोड़** का मुनाफा कमाया है। लेकिन, रुपए को बचाने के लिए की गई भारी-भरकम डॉलर की बिकवाली और फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स पर हुए ऐतिहासिक नुकसान से इसकी असली कीमत सामने आ गई है। इस वित्तीय वर्ष में रुपया लगभग **10%** कमजोर हुआ है।

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करेंसी डिफेंस की भारी कीमत

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के फॉरेन एक्सचेंज ट्रांजैक्शन में 52% की बढ़ोतरी से हुआ मुनाफा एक दोधारी तलवार की तरह है। यह मुनाफा पिछले सफल दांवों को तो दिखाता है, लेकिन इसके पीछे $195 अरब डॉलर को स्पॉट मार्केट में लगाकर रुपए की 9.85% की गिरावट को रोकना भी शामिल है। सीधे शब्दों में कहें तो, RBI रुपए की कमजोरी को भरने के लिए अपनी कमाई का इस्तेमाल कर रहा है, और यह स्ट्रैटिजी भू-राजनीतिक तनाव के बीच और भी बड़े दखल की मांग करती है।

फॉरवर्ड में बढ़ता दखल

फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स पर ₹43,403 करोड़ का 'मार्क-टू-मार्केट' नुकसान पिछले पांच सालों के प्रदर्शन से एक बड़ा बदलाव है। RBI ने अपने फॉरवर्ड बुक में नेट शॉर्ट पोजीशन को $103.06 अरब डॉलर तक बढ़ा दिया है, जिससे लिक्विडिटी और वोलैटिलिटी को मैनेज करने के लिए डेरिवेटिव स्ट्रक्चर्स पर निर्भरता बढ़ गई है। यह दिखाता है कि RBI अब मीडियम-टर्म में अपनी ही करेंसी की स्थिरता के खिलाफ दांव लगा रहा है। यह सिर्फ स्पॉट एसेट्स रखने से हटकर, ग्लोबल इंटरेस्ट रेट्स और कैपिटल फ्लो पर निर्भर, ज्यादा जटिल और लीवरेज्ड एक्सपोजर की ओर बढ़ रहा है।

स्ट्रक्चरल कमजोरी और मैक्रो दबाव

शांत माहौल के विपरीत, मौजूदा माहौल में RBI का बैलेंस शीट 20.6% बढ़कर ₹91.97 लाख करोड़ हो गया है। इस ग्रोथ में सोने और विदेशी निवेश की बढ़ी हुई वैल्यू का बड़ा हाथ है, जो बाहरी झटकों के प्रति संवेदनशील हैं। अगर ग्लोबल रिस्क लेने की क्षमता में बदलाव आता है या एनर्जी इंपोर्ट के कारण बाहरी घाटा और बढ़ता है, तो RBI की बैलेंस शीट की इंटीग्रिटी से समझौता किए बिना अपनी इंटरवेंशन की गति बनाए रखने की क्षमता पर गंभीर सवाल उठेंगे। ऐतिहासिक डेटा बताता है कि जब सेंट्रल बैंक रियलाइज्ड गेन से फॉरवर्ड बुक्स में लगातार अनरियलाइज्ड लॉस की ओर बढ़ते हैं, तो यह अक्सर पॉलिसी की सीमित गुंजाइश वाले दौर से पहले होता है।

असरदारता घटने का जोखिम

RBI अब एक मुश्किल चक्र में फंस गया है। जहां एक ओर इनकम 26.4% बढ़ी है, वहीं फॉरवर्ड पर हुए अनरियलाइज्ड लॉस को सोखने की जरूरत यह संकेत देती है कि अगर रुपया गिरता रहा तो भविष्य की मुनाफेबाजी पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, वोलैटिलिटी को दबाने के लिए लगातार डॉलर बेचने से उन बफ़र्स में कमी आ सकती है जिनका इस्तेमाल डोमेस्टिक क्रेडिट साइकल को मैनेज करने के लिए किया जा सकता था। जैसे-जैसे मार्केट पार्टिसिपेंट्स फॉरवर्ड बुक में बढ़ती शॉर्ट पोजीशन को देखेंगे, रुपए के रिस्क को हेज करने की प्रीमियम बढ़ने की संभावना है, जो एक सेल्फ-फुलफिलिंग साइकिल बना सकता है। इससे भविष्य में और भी आक्रामक और महंगे इंटरवेंशन की जरूरत पड़ेगी।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.