RBI Forex Reserves में उछाल: ₹682 अरब के पार, जानिए क्या है वजह

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
RBI Forex Reserves में उछाल: ₹682 अरब के पार, जानिए क्या है वजह
Overview

भारतीय रुपये को संभालने के RBI के प्रयासों के बीच, देश के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) में $938 मिलियन की बढ़त देखी गई है। यह बढ़त 29 मई को समाप्त सप्ताह में हुई, जिसने पिछले दो हफ्तों में $15.5 बिलियन की गिरावट के सिलसिले को तोड़ा है। फॉरेन करेंसी एसेट्स (Foreign Currency Assets) में इजाफे से मजबूती मिली है। हालांकि, सोने की वैल्यूएशन में एडजस्टमेंट और रुपये को स्थिर करने के लिए लगातार चल रही मार्केट इंटरवेंशन (Market Intervention) केंद्रीय बैंक के लिए लिक्विडिटी मैनेजमेंट (Liquidity Management) की चुनौती बनी हुई है।

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विदेशी मुद्रा भंडार में आई रिकवरी

पिछले दो हफ्तों में $15.5 बिलियन से अधिक की गिरावट के बाद, विदेशी मुद्रा भंडार का $682.321 बिलियन तक पहुंचना एक राहत की खबर है। 29 मई को समाप्त सप्ताह में $938 मिलियन की यह शुद्ध बढ़ोतरी मुख्य रूप से फॉरेन करेंसी एसेट्स में $3.116 बिलियन की वृद्धि के कारण हुई, जो अब $546.148 बिलियन हो गया है। अमेरिकी डॉलर के टर्म्स में रिपोर्ट किए जाने वाले इन एसेट्स में नई पूंजी के इनफ्लो (Capital Inflow) और यूरो, येन और पाउंड स्टर्लिंग जैसी मुद्राओं में उतार-चढ़ाव के कारण होने वाले वैल्यूएशन इफेक्ट्स (Valuation Effects) दोनों शामिल हैं। यह बढ़ोतरी इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे पहले लगातार दो हफ्तों में भारी गिरावट आई थी, जब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) को रुपये की अस्थिरता को काबू करने के लिए सक्रिय रूप से अपने रिजर्व का इस्तेमाल करना पड़ा था।

सोने की वैल्यूएशन में बड़ा बदलाव

जहां फॉरेन करेंसी एसेट्स में बढ़ोतरी हुई, वहीं सोने के भंडार का मूल्य $2.186 बिलियन घटकर $112.6 बिलियन रह गया। केंद्रीय बैंक का कहना है कि सोने का फिजिकल स्टॉक 880.52 टन पर स्थिर है, लेकिन बाजार विश्लेषकों का मानना है कि स्थिति कुछ और जटिल है। RBI की साप्ताहिक रिपोर्ट में सोने की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद उसके वैल्यूएशन में गिरावट को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं कि कहीं बुलियन (Bullion) का इस्तेमाल रुपये को बचाने के लिए तो नहीं किया गया, ताकि डॉलर रिजर्व को कम किए बिना लिक्विडिटी (Liquidity) बढ़ाई जा सके। इस "गनपाउडर प्रिजर्वेशन" रणनीति के तहत, सोने को करेंसी बचाने के लिए इस्तेमाल करके RBI बाज़ार में भरोसा बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, खासकर वेस्ट एशिया में बढ़ते क्रूड ऑयल प्राइसेज (Crude Oil Prices) और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता (Geopolitical Uncertainty) के दबाव के बीच।

स्ट्रक्चरल रिस्क और इंटरवेंशन का असर

मई महीने के दौरान रुपया 95 प्रति डॉलर के स्तर के करीब रहा है, जो मौजूदा स्थिरता को बनाए रखने की भारी कीमत को दर्शाता है। RBI का इंटरवेंशन मैकेनिज्म, जिसमें स्पॉट मार्केट में डॉलर बेचना शामिल है, बैंकिंग सिस्टम से रुपये की लिक्विडिटी को खत्म करता है। इससे घरेलू ब्याज दरों पर भी असर पड़ सकता है। इसे रोकने के लिए, केंद्रीय बैंक ने स्टेरिलाइज्ड इंटरवेंशन (Sterilized Intervention) और स्वैप ऑक्शन (Swap Auction) पर ज्यादा भरोसा किया है। हालांकि, इन बफ़र्स (Buffers) पर निर्भरता जोखिमों से खाली नहीं है। केंद्रीय बैंक की "वेट-एंड-वॉच" (Wait-and-Watch) मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) के साथ, नीति निर्माताओं को अब ग्रोथ को सपोर्ट करने की जरूरत और सप्लाई चेन डिसरप्शन (Supply Chain Disruption) तथा अस्थिर ऊर्जा बाजार (Energy Market) से जुड़े इन्फ्लेशनरी रिस्क (Inflationary Risk) के बीच संतुलन बनाना होगा।

भविष्य की राह

आगे चलकर, फोकस केंद्रीय बैंक के हालिया नीतिगत उपायों पर होगा। इनमें सरकारी सिक्योरिटीज (Government Securities) में विदेशी निवेशकों की पहुंच बढ़ाना और एक्सटर्नल कमर्शियल बोर्रोइंग (External Commercial Borrowing) फ्रेमवर्क को उदार बनाना शामिल है, जिनका मकसद लॉन्ग-टर्म कैपिटल इनफ्लो (Capital Inflow) को बढ़ावा देना है। हालांकि इन उपायों का मकसद बैलेंस ऑफ पेमेंट्स (Balance of Payments) को मजबूत करना है, लेकिन मौजूदा रिजर्व लेवल की स्थिरता वैश्विक ब्याज दर चक्र (Interest Rate Cycle) के विकास और विनिमय दर की खोज को बाजार की ताकतों पर छोड़ने की RBI की इच्छा पर निर्भर करेगी। विश्लेषकों की नजर इस बात पर है कि क्या ये प्रशासनिक उपाय रुपये पर और अधिक बाहरी झटके लगने की स्थिति में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप की आवश्यकता को पर्याप्त रूप से बदल सकते हैं।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.