भारतीय परिवारों का कुल रिटेल कर्ज़ में खर्चों के लिए लिया गया लोन अब **58.4%** तक पहुंच गया है। यह महंगाई और स्थिर आय वृद्धि के बीच बढ़ती आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए लिया जा रहा कर्ज़, जहां एक ओर घरों की संपत्ति पर दबाव बना रहा है, वहीं दूसरी ओर बैंकों की स्थिरता पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
खपत के कर्ज़ की ओर बढ़ता रुझान
भारतीय परिवार अब संपत्ति बनाने वाले निवेश की बजाय रोज़मर्रा के खर्चों को पूरा करने के लिए ज़्यादा कर्ज़ ले रहे हैं। रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट के ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि मार्च 2026 तक, कुल घरेलू कर्ज़ का 58.4% हिस्सा अब हाउसिंग लोन के अलावा बाकी रिटेल लोन (जैसे पर्सनल लोन, गोल्ड लोन) का है। इसकी तुलना में, घर खरीदने के लिए लिया जाने वाला लोन, जो संपत्ति बनाने का एक अहम ज़रिया है, कुल कर्ज़ का महज़ 26.3% रह गया है।
वित्तीय स्थिरता के लिए क्यों चिंताजनक है यह ट्रेंड?
किसी भी अर्थव्यवस्था की स्थिरता के लिए यह ज़रूरी है कि घरेलू कर्ज़ में ली गई राशि को चुकाने की क्षमता लगातार आय वृद्धि से समर्थित हो। लेकिन मौजूदा हालात चिंता बढ़ाने वाले हैं। जहां एक ओर लोगों की उपभोक्ता वस्तुओं के प्रति चाहत बढ़ी है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण और शहरी, दोनों इलाकों में आय वृद्धि (Wage Growth) उम्मीद से काफी धीमी रही है। जब परिवार अपनी आय में बढ़ोतरी के बिना खर्चों को पूरा करने के लिए उधार ले रहे हैं, तो समय के साथ कर्ज़ चुकाने की उनकी क्षमता कमज़ोर पड़ जाती है। अगर डिफॉल्ट (Default) के मामले बढ़ते हैं, तो इसका असर पूरे बैंकिंग सेक्टर की सेहत पर पड़ सकता है।
गोल्ड लोन का बढ़ता दखल
RBI ने गोल्ड लोन (Gold Loan) पर बढ़ती निर्भरता को भी एक खास चिंता का विषय बताया है। सोने की ऊंची कीमतों के चलते, परिवार नकदी की ज़रूरतें पूरी करने के लिए अपने सोने के गहनों को गिरवी रख रहे हैं। सेंट्रल बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, बहुत से लोग इन लोन का इस्तेमाल न सिर्फ आपातकालीन स्थितियों के लिए कर रहे हैं, बल्कि पुराने कर्ज़ को चुकाने या अपने कैश फ्लो (Cash Flow) के अंतर को भरने के लिए भी कर रहे हैं। सोने की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का मतलब है कि अगर बाज़ार में सोने का मूल्य गिरता है, तो इन लोन के लिए सुरक्षा (Collateral) का मूल्य भी कम हो सकता है, जिससे कर्ज देने वालों और कर्ज लेने वालों, दोनों के लिए जोखिम बढ़ सकता है।
संपत्ति निर्माण पर असर
खर्चों के लिए लिया गया कर्ज़, जैसे कि गैजेट्स, यात्रा या रोज़मर्रा के बिलों के लिए पर्सनल लोन, भविष्य में कोई आय या मूल्य उत्पन्न नहीं करता है। यह एक स्वस्थ वित्तीय आदत से बिल्कुल अलग है, जहां कर्ज़ का इस्तेमाल शिक्षा, घर खरीदने या व्यवसाय शुरू करने जैसे उत्पादक कामों के लिए किया जाता है। महंगाई और स्थिर आय वृद्धि के बीच, उपभोग के लिए कर्ज़ लेने का यह चक्र लंबी अवधि की बचत को ब्याज भुगतानों में बदल रहा है। समय के साथ, यह भारतीय परिवारों की वित्तीय लचीलेपन को कम करता है और उनकी कुल संपत्ति (Net Worth) को घटाता है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
वित्तीय सेक्टर पर नज़र रखने वाले निवेशकों के लिए, मुख्य संकेतकों में बैंकों का अनसिक्योर्ड रिटेल लोन (Unsecured Retail Loans) के प्रति एक्सपोजर (Exposure) और गोल्ड लोन पोर्टफोलियो की गुणवत्ता शामिल है। निवेशक भविष्य में रिटेल लेंडिंग (Retail Lending) के मानकों पर RBI की टिप्पणियों पर नज़र रख सकते हैं कि क्या बैंक पर्सनल लोन के लिए अपनी शर्तें सख्त कर रहे हैं। इसके अलावा, मुद्रास्फीति (Inflation) की तुलना में आय वृद्धि का डेटा यह आंकने में महत्वपूर्ण होगा कि आने वाली तिमाहियों में परिवारों की कर्ज़ चुकाने की क्षमता में सुधार होगा या दबाव बना रहेगा।
