RBI का बड़ा दांव: विदेशी निवेशकों के लिए बॉन्ड मार्केट खोला, रुपये को संभालने की कोशिश

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
RBI का बड़ा दांव: विदेशी निवेशकों के लिए बॉन्ड मार्केट खोला, रुपये को संभालने की कोशिश
Overview

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने विदेशी निवेशकों के लिए 15, 30 और 40 साल की सरकारी बॉन्ड की एक्सेस को Fully Accessible Route (FAR) के तहत खोल दिया है। इसका मकसद देश में विदेशी पूंजी के प्रवाह को बढ़ाना है।

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

क्या है RBI का मास्टरस्ट्रोक?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सरकारी बॉन्ड मार्केट में एक बड़ा बदलाव किया है। अब विदेशी निवेशक 15, 30 और 40 साल की मैच्योरिटी वाले सरकारी बॉन्ड को Fully Accessible Route (FAR) के तहत खरीद सकते हैं। इस कदम से RBI का लक्ष्य देश में विदेशी पूंजी के आने को बढ़ावा देना है, जो भारतीय रुपये को मजबूत करने में मदद कर सकता है।

क्यों उठाया यह कदम?

वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों और एनर्जी की बढ़ती कीमतों के कारण भारतीय रुपया पिछले कुछ समय से दबाव में है। ऐसे में, RBI विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) में गिरावट को थामना चाहता है। लंबी अवधि के बॉन्ड में विदेशी निवेशकों की एंट्री से एक स्थिर और लंबा पैसा आने की उम्मीद है, जो अल्पकालिक निवेशों की तरह जल्दी बाहर नहीं निकलता।

क्या हैं इसके मायने?

यह फैसला भारतीय बॉन्ड मार्केट को ग्लोबल इंडेक्स, जैसे JP Morgan GBI-EM इंडेक्स में शामिल होने के रास्ते खोल सकता है। यह उन ग्लोबल पेंशन फंड्स और सॉवरेन वेल्थ फंड्स के लिए खास तौर पर आकर्षक होगा, जिन्हें अपनी देनदारियों को पूरा करने के लिए लंबी अवधि की एसेट्स की जरूरत होती है।

क्या हैं जोखिम?

हालांकि, इस फैसले के अपने जोखिम भी हैं। जानकारों का मानना है कि पूंजी खाते को खोलने से भारतीय बॉन्ड मार्केट वैश्विक 'रिस्क-ऑफ' सेंटिमेंट के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकता है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का खतरा बना हुआ है, जिसका सीधा असर भारत के ट्रेड डेफिसिट और करेंसी पर पड़ता है। अगर विदेशी निवेशक भारतीय मैक्रो इकोनॉमिक माहौल को बहुत अनिश्चित मानते हैं, तो निवेश की सीमाएं हटाने से पूंजी के प्रवाह के बजाय बहिर्वाह तेज हो सकता है।

आगे क्या?

अब बाजार की नजरें इस बात पर होंगी कि क्या सरकार बॉन्ड पर कैपिटल गेन टैक्स हटाने जैसे और टैक्स इंसेंटिव लाती है। RBI द्वारा रेपो रेट को 5.25% पर यथावत रखने के बाद, अब सप्लाई-साइड रिफॉर्म्स पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इस FAR विस्तार की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि भारतीय बॉन्ड अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को मुद्रा और भू-राजनीतिक जोखिमों के बदले पर्याप्त रिटर्न दे पाते हैं या नहीं।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.