RBI का बड़ा फैसला! Forex से प्रतिबंध हटे, रुपया 0.4% फिसला

ECONOMY
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AuthorAditya Rao|Published at:
RBI का बड़ा फैसला! Forex से प्रतिबंध हटे, रुपया 0.4% फिसला
Overview

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से फॉरेक्स (Forex) ट्रेडिंग पर लगी पाबंदियों में आंशिक ढील देने के बाद मंगलवार को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले **0.4%** कमजोर होकर **93.50** के स्तर पर आ गया। डीलर्स ने घरेलू बाजार में रुपया खरीदने और विदेशी बाजारों में बेचने की गतिविधियां फिर से शुरू कर दीं, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ा।

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RBI ने Forex ट्रेडिंग नियमों में दी ढील

केंद्रीय बैंक के मंगलवार से प्रभावी हुए नए नियमों के अनुसार, बैंक अब संबंधित पक्षों (Related Parties) के साथ कुछ विशेष करेंसी ट्रांजैक्शन्स (Currency Transactions) कर सकेंगे। इसमें मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट्स को अनविंड (Unwind) करना और मैच्ड ट्रेड (Matched Trades) करना शामिल है। इस आंशिक रोलबैक (Rollback) से करेंसी ट्रेडर्स को घरेलू बाजार में रुपया खरीदने और विदेशी बाजारों में बेचने की इजाजत मिल गई। यही वजह है कि दिन के कारोबार में रुपये में 0.4% की गिरावट आई।

डीलर्स की वापसी और रुपये में कमजोरी

दिन के अंत में रुपया डॉलर के मुकाबले 93.12 के पिछले बंद भाव से गिरकर 93.50 पर बंद हुआ। फ़िनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी (Finrex Treasury Advisors LLP) के ट्रेजरी हेड अनिल कुमार भंसाली (Anil Kumar Bhansali) ने कहा, "रुपया कमजोर हुआ क्योंकि करेंसी डीलर्स ने घरेलू स्तर पर खरीद और विदेश में बिक्री फिर से शुरू कर दी, हालांकि इसका असर सीमित रहा।" उन्होंने यह भी कहा कि इस आंशिक ढील के बावजूद रुपये में कोई बड़ी गिरावट आने की उम्मीद नहीं है।

पहले क्यों लगाई गई थीं पाबंदियां?

यह पाबंदियां 27 मार्च को लगाई गई थीं, जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते तेल की कीमतों में आई उछाल के बाद रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया था। इन उपायों से पहले, बाजार के जानकारों का अनुमान था कि बैंकों के पास लगभग $30 अरब से $35 अरब के बकाया करेंसी कॉन्ट्रैक्ट्स थे। ऑयल रिफाइनर्स को भी डॉलर खरीदने के लिए विशेष चैनलों के माध्यम से सहायता प्रदान की गई थी।

आउटलुक: बची हुई पाबंदियां गिरावट को सीमित करेंगी

हालांकि कुछ नियमों में ढील दी गई है, लेकिन संबंधित पक्षों से जुड़े करेंसी डेरिवेटिव सौदों (Currency Derivative Deals) पर महत्वपूर्ण प्रतिबंध अभी भी लागू हैं, साथ ही ओपन पोजिशन्स पर $100 मिलियन की सीमा भी बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये मौजूदा प्रतिबंध रुपये में किसी भी तेज गिरावट को रोकेंगे। एक साल के लिए रुपया की हेजिंग (Hedging) की लागत, जिसे फॉरवर्ड प्रीमियम (Forward Premium) कहते हैं, RBI की घोषणा के बाद लगभग 30 बेसिस पॉइंट्स गिर गई थी, हालांकि बाद में इसमें कुछ सुधार देखा गया। डीलर्स ने देखा कि ऑफशोर रुपया मार्केट (NDF) में शुरुआती पाबंदियों के बाद उच्च अस्थिरता वाले दौर में देखे गए चौड़े गैप की तुलना में केवल मामूली प्रीमियम दिख रहा था।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.