यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब बैंकिंग सिस्टम में अनुमानित ₹4.5 लाख करोड़ की अतिरिक्त नकदी जमा हो गई थी। यह पिछले करीब चार सालों में सबसे बड़ा सरप्लस था, जिसने शॉर्ट-टर्म इंटरेस्ट रेट्स को RBI की पॉलिसी रेपो रेट से नीचे धकेल दिया था। इससे मॉनेटरी पॉलिसी के असर पर सवाल खड़े हो रहे थे।
RBI की बड़ी ऑक्शन का मकसद
इस समस्या से निपटने के लिए, RBI ने 7-दिन की वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) ऑक्शन का सहारा लिया। इस ऑक्शन के जरिए RBI ने ₹2 लाख करोड़ की नकदी को बैंकिंग सिस्टम से सोख लिया। यह सिस्टम में मौजूद कुल सरप्लस नकदी का लगभग आधा है।
बाजार पर तत्काल असर
इस कदम का तत्काल असर मनी मार्केट पर देखा गया। बेंचमार्क 10-साल के सरकारी बॉन्ड यील्ड (Yield) में करीब 3-5 बेसिस पॉइंट की तेजी आई और यह 7% के स्तर के करीब पहुंच गया। यह बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी बाजार में टाइट लिक्विडिटी की उम्मीदों को दर्शाती है।
मॉनेटरी पॉलिसी ट्रांसमिशन को मजबूती
RBI का मुख्य उद्देश्य शॉर्ट-टर्म रेट्स, जैसे वेटेड एवरेज कॉल रेट, को पॉलिसी रेपो रेट के करीब लाना है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि RBI की मॉनेटरी पॉलिसी के फैसले अर्थव्यवस्था में प्रभावी ढंग से लागू हों और उधार लेने की लागत (Borrowing Costs) पर असर पड़े।
आर्थिक और वैश्विक परिदृश्य
यह कार्रवाई ऐसे वक्त में हुई है जब वेस्ट एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव जैसे कारक ग्रोथ और महंगाई के अनुमानों के लिए जोखिम पैदा कर रहे हैं। RBI ने फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए GDP ग्रोथ 6.9% और महंगाई 4.6% रहने का अनुमान लगाया है।
संभावित जोखिम और संरचनात्मक सवाल
हालांकि, RBI के इस आक्रामक कदम में कुछ जोखिम भी हैं। अगर नकदी सोखने के पैमाने या अवधि का गलत अनुमान लगाया गया, तो यह ओवर-टाइटिनिंग का कारण बन सकता है, जिससे शॉर्ट-टर्म उधार लेने की लागत बढ़ सकती है और वैश्विक भू-राजनीतिक जोखिमों का सामना कर रहे व्यवसायों पर दबाव आ सकता है। बाजार की संवेदनशीलता बॉन्ड यील्ड की तत्काल प्रतिक्रिया से स्पष्ट थी।
विश्लेषकों का यह भी कहना है कि अगर यह अतिरिक्त नकदी संरचनात्मक (Structural) साबित होती है, तो RBI को और बड़े और लगातार सोखने की रणनीति अपनानी पड़ सकती है। वहीं, रुपये को सहारा देने के प्रयास भी स्थानीय मुद्रा की नकदी को कम कर सकते हैं, जो RBI के लिए एक दोहरी चुनौती पेश कर रहा है।
भविष्य की रणनीति
भविष्य को देखते हुए, विश्लेषक उम्मीद करते हैं कि RBI VRRR ऑक्शन का उपयोग करके सक्रिय, शॉर्ट-टर्म लिक्विडिटी मैनेजमेंट की अपनी रणनीति जारी रखेगा। सेंट्रल बैंक मूल्य स्थिरता और ग्रोथ को लेकर प्रतिबद्ध है।