RBI के सोने के भंडार में बड़ा फेरबदल
RBI के इस फैसले से घरेलू स्तर पर रखे सोने की मात्रा में बड़ी गिरावट आई है। मार्च 2026 तक यह घटकर 290.37 मीट्रिक टन रह जाएगी, जबकि सितंबर 2025 में यह 575.82 मीट्रिक टन और मार्च 2025 में 511.99 मीट्रिक टन थी। हालांकि, इस कटौती के बावजूद RBI के कुल सोने के भंडार में मामूली बढ़त देखी गई है, जो 880.52 मीट्रिक टन तक पहुंच गया है। अब RBI का ज्यादातर सोना लंदन स्थित बैंक ऑफ इंग्लैंड (Bank of England) और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) जैसे अंतरराष्ट्रीय कस्टोडियन के पास रखा जाएगा, जिनकी मात्रा 197.67 मीट्रिक टन है। इसके अलावा 2.80 मीट्रिक टन सोना डिपॉजिट के रूप में भी है।
विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की बढ़ी अहमियत
घरेलू भंडार में कमी के बावजूद, भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी मार्च 2026 तक बढ़कर 16.7% हो गई है, जो छह महीने पहले 13.92% थी। इस प्रतिशत में बढ़ोतरी का मुख्य कारण सोने की वैश्विक कीमतों में आई तेजी है, न कि सोने की मात्रा में वृद्धि। इस दौरान, कुल विदेशी मुद्रा भंडार थोड़ा घटकर $691.11 बिलियन रह गया, जो पहले $700.09 बिलियन था।
ग्लोबल ट्रेंड: दुनिया भर के सेंट्रल बैंक खरीद रहे सोना
यह कदम दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों (Central Banks) की उस बढ़ती प्रवृत्ति का हिस्सा है जहां वे सोने का भंडार बढ़ा रहे हैं। दुनिया भर में अनिश्चितता, महंगाई की चिंता और डॉलर से दूरी बनाने की चाहत के कारण उभरते बाजारों के केंद्रीय बैंक सोने की ओर रुख कर रहे हैं। अनुमान है कि 2025 में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने लगभग 863 टन सोना खरीदा है, और यह खरीद 2026 में भी जारी रहने की उम्मीद है। पोलैंड, चीन और उज्बेकिस्तान जैसे देश इस ट्रेंड में सबसे आगे हैं।
सुरक्षा के लिए सोना लाया जा रहा है भारत
भारत में सोने को वापस लाना (Onshoring) इस रणनीति का एक अहम हिस्सा है। मार्च 2026 तक, भारत का करीब 77% सोना, यानी 680 मीट्रिक टन, घरेलू स्तर पर रखा जाएगा, जो मार्च 2023 में सिर्फ 37% था। रूस की विदेशी संपत्ति फ्रीज होने जैसी वैश्विक घटनाओं के बाद राष्ट्रीय संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं, जिसके चलते RBI ने यह कदम उठाया है।
भौतिक सोना रखने की चुनौतियाँ
हालांकि, भौतिक सोना (Physical Gold) रखने की अपनी चुनौतियाँ भी हैं। सोने पर कोई ब्याज नहीं मिलता, जबकि विदेशी मुद्रा भंडार पर ब्याज मिलता है। यह एक 'अवसर लागत' (opportunity cost) पैदा करता है। इसके अलावा, देश में ज्यादा सोना रखने के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और वॉल्ट्स में निवेश की जरूरत होती है।
सोने की भूमिका बनी रहेगी महत्वपूर्ण
इन सबके बावजूद, सोना अभी भी केंद्रीय बैंकों के भंडार के लिए एक रणनीतिक संपत्ति बना रहेगा। वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक अनिश्चितताओं को देखते हुए, RBI भंडार को विविध बनाने और संपत्तियों को सुरक्षित रखने पर ध्यान केंद्रित करना जारी रखेगा। विश्लेषकों का मानना है कि केंद्रीय बैंक सोना खरीदना जारी रखेंगे, जिससे देशों के लिए यह एक महत्वपूर्ण पोर्टफोलियो डाइवर्सिफायर बना रहेगा।
