RBI का दम, रुपया मजबूत! शेयर बाजार औंधे मुंह गिरा, तेल और टेंशन का डबल अटैक

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
RBI का दम, रुपया मजबूत! शेयर बाजार औंधे मुंह गिरा, तेल और टेंशन का डबल अटैक
Overview

भारतीय रुपये में जबरदस्त रिकवरी आई है, जो **128 पैसे** बढ़कर **93.57** पर कारोबार कर रहा है। यह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा बैंकों की फॉरेन एक्सचेंज पोजिशन पर नए लिमिट लगाने का नतीजा है। हालांकि, घरेलू शेयर बाजारों में बिकवाली का दबाव देखा गया।

RBI का एक्शन: रुपया संभला, पर शेयर बाजार बेहाल

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने फॉरन एक्सचेंज (Forex) पोजीशन पर जो नए नियम लागू किए हैं, उनसे भारतीय रुपये को फौरन सहारा मिला है। बैंकों की नेट ओपन पोजीशन (NOP) को $100 मिलियन तक सीमित करने के इस कदम का मकसद करेंसी पर हो रही सट्टेबाजी को रोकना है। लेकिन, देश के शेयर बाजार में तेज बिकवाली देखने को मिली। चढ़ते कच्चे तेल (Crude Oil) के दाम और गहराते भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशकों में घबराहट फैल गई है।

रुपये में आई रिकवरी

RBI के नए रेगुलेशन का असर साफ दिखा। शुरुआती गिरावट के बाद, भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 128 पैसे मजबूत होकर 93.57 पर कारोबार कर रहा है। यह कदम 27 मार्च को घोषित किया गया था और 10 अप्रैल से प्रभावी है। इसके तहत, बैंकों को डोमेस्टिक मार्केट में डॉलर की अपनी पोजिशन कम करनी पड़ रही है, जिससे रुपये को मजबूती मिली है। ट्रेडर्स का कहना है कि इस एक्शन से पहले से बनी पोजीशन्स को अनवाइंड (unwind) करना पड़ा है।

शेयर बाजार में भारी गिरावट

इस बीच, घरेलू शेयर बाजारों में तेज बिकवाली देखने को मिली। BSE सेंसेक्स 1,191.24 अंक गिरकर 72,391.98 पर आ गया, जबकि NSE निफ्टी 349.45 अंक फिसलकर 22,470.15 पर पहुंच गया। शुक्रवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा ₹4,367.30 करोड़ की बिकवाली ने इस गिरावट को और तेज कर दिया।

कच्चे तेल का बढ़ता बोझ

बाजार पर सबसे बड़ा दबाव कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का है। ब्रेंट क्रूड ऑयल का दाम $115.30 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है, जो पिछले एक महीने में 48.32% की भारी बढ़ोतरी है। सप्लाई में कमी और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं।

रुपये और बाजार के सामने खड़ी चुनौतियां

RBI के दखल के बावजूद, रुपया कई मुश्किलों का सामना कर रहा है। भारत एक बड़ा तेल आयातक देश है, इसलिए तेल के दाम बढ़ने से आयात के भुगतान के लिए डॉलर की मांग बढ़ जाती है, जो सीधे तौर पर रुपये पर दबाव डालता है। ये महंगे तेल की कीमतें महंगाई को भी बढ़ा रही हैं, जिससे RBI के लिए मॉनेटरी पॉलिसी बनाना मुश्किल हो सकता है और आर्थिक ग्रोथ भी धीमी पड़ सकती है। अनुमान है कि तेल की कीमत में हर $10 की बढ़ोतरी से भारत की GDP ग्रोथ 0.25-0.27% तक कम हो सकती है।

इसके अलावा, ग्लोबल भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच यूएस डॉलर इंडेक्स (DXY) 100 के पार मजबूती दिखा रहा है। इंपोर्ट पर निर्भरता, तेल से बढ़ी महंगाई, और मजबूत डॉलर का यह कॉम्बिनेशन भारतीय रुपये (INR) के लिए एक चुनौतीपूर्ण परिदृश्य बना रहा है।

वैल्यूएशन और निवेशकों की सतर्कता

भारतीय शेयर बाजार, यानी निफ्टी 50, फिलहाल 20.0 के प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेशियो पर ट्रेड कर रहा है, जो इसके लॉन्ग-टर्म एवरेज 23.43 से नीचे है। ऐतिहासिक रूप से यह बहुत महंगा नहीं लगता, लेकिन 22 से ऊपर का P/E खतरे का संकेत माना जाता है। वहीं, निफ्टी बैंक इंडेक्स 14.0 के P/E रेशियो के साथ ज्यादा आकर्षक दिख रहा है।

FIIs की लगातार बिकवाली निवेशकों के सतर्क रवैये को दर्शाती है। ऐसे में, डोमेस्टिक रेगुलेटरी एक्शन ग्लोबल दबाव के मुकाबले सिर्फ थोड़े समय के लिए स्थिरता दे सकता है।

भविष्य इन ग्लोबल फैक्टर्स पर करेगा निर्भर

फिलहाल, बाजार का सेंटिमेंट भू-राजनीतिक घटनाओं और कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव से प्रभावित है। एनालिस्ट्स 2026 के लिए USD/INR एक्सचेंज रेट का अनुमान 87-88 से लेकर 93-95 तक लगा रहे हैं। बाजार की दिशा मुख्य रूप से मध्य पूर्व के तनाव का समाधान, तेल की कीमतों में स्थिरता, ग्लोबल मॉनेटरी पॉलिसी में बदलाव और FIIs के फ्लो पर निर्भर करेगी।

Disclaimer:This content is for informational purposes only and does not constitute financial or investment advice. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making decisions. Investments are subject to market risks, and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors are not liable for any losses. Accuracy and completeness are not guaranteed, and views expressed may not reflect the publication’s editorial stance.