RBI का बड़ा दांव: रुपये को बचाने के लिए Forex पोजीशंस पर लगाई **$100 मिलियन** की लिमिट!

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
RBI का बड़ा दांव: रुपये को बचाने के लिए Forex पोजीशंस पर लगाई **$100 मिलियन** की लिमिट!
Overview

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने फॉरेन एक्सचेंज (Forex) मार्केट में बैंकों की नेट ओपन पोजीशन को **$100 मिलियन** प्रतिदिन तक सीमित कर दिया है, जो 10 अप्रैल से प्रभावी होगा। यह कदम रुपये में आ रही रिकॉर्ड गिरावट और विदेशी निवेशकों द्वारा बिकवाली के बीच उठाया गया है।

RBI का बड़ा कदम: Forex मार्केट पर कसे शिकंजे!

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश के रुपये को संभालने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब से बैंक फॉरेन एक्सचेंज (Forex) मार्केट में प्रतिदिन $100 मिलियन से ज्यादा की नेट ओपन पोजीशन नहीं रख पाएंगे। यह नया नियम 10 अप्रैल से लागू हो जाएगा।

रुपया क्यों गिर रहा है?

यह फैसला रुपये में लगातार हो रही भारी गिरावट को रोकने के लिए लिया गया है। विदेशी बाजारों में तनाव (खासकर मध्य पूर्व में) और विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजारों से भारी मात्रा में पैसा निकालने के कारण रुपया पिछले कुछ समय से दबाव में है। 27 मार्च 2026 को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड 94.84 के स्तर पर पहुँच गया था। हाल के दिनों में रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 4% कमजोर हुआ है।

एशिया की कई करेंसी पर दबाव

एक साल पहले, मार्च 2025 में, डॉलर के मुकाबले रुपया 83.00-83.50 के दायरे में कारोबार कर रहा था। लेकिन अब यह काफी कमजोर हो गया है। दिलचस्प बात यह है कि सिर्फ भारत ही नहीं, मध्य पूर्व में बढ़ते तेल के दामों और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण इंडोनेशियाई रुपिया और थाई बाह जैसे कई एशियाई देशों की करेंसी भी डॉलर के मुकाबले गिरी हैं।

महंगाई पर लगाम लगाने की कोशिश

विश्लेषकों का मानना है कि भारत में 5-6% के आसपास रहने वाली महंगाई (Inflation) की चिंता भी RBI के इस सख्त रवैये का एक कारण हो सकती है। कमजोर रुपये से आयातित सामान महंगे हो जाते हैं, जिससे महंगाई और बढ़ सकती है। RBI इस पर लगाम लगाने की कोशिश कर रहा है।

मार्केट पर क्या होगा असर?

हालांकि, RBI का यह कदम रुपये को स्थिर करने में मदद कर सकता है, लेकिन $100 मिलियन की यह डेली लिमिट इंटरबैंक मार्केट में लिक्विडिटी (तरलता) की समस्या पैदा कर सकती है। ऐसे कड़े नियमों से मार्केट में कारोबार करने वाले झिझक सकते हैं, जिससे अस्थिरता (Volatility) बढ़ सकती है और कंपनियों के लिए अपने विदेशी सौदों का हेजिंग (Hedging) करना महंगा हो सकता है। कुछ जानकारों का यह भी मानना है कि यह एक अस्थायी समाधान है, और अगर पूंजी के पलायन (Capital Outflows) और भू-राजनीतिक जोखिमों जैसे मूल कारणों का समाधान नहीं हुआ तो इसका दीर्घकालिक असर कम होगा। RBI के इस कड़े कदम से भविष्य में विदेशी निवेशक भी भारत में निवेश करने से कतरा सकते हैं, क्योंकि उन्हें लगेगा कि मार्केट में कम फ्लेक्सिबिलिटी है।

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