RBI का फॉरवर्ड मार्केट पर शिकंजा
RBI ने यह बड़ा फैसला रुपये में आई हालिया तेज गिरावट और इससे जुड़े रेगुलेटरी मुद्दों को देखते हुए लिया है। बैंकों को अब 10 अप्रैल तक अपनी मौजूदा NDF पोजीशन को खत्म करना होगा। पहले RBI ने नेट ओपन रूपी पोजीशन पर $100 मिलियन की दैनिक सीमा तय की थी, लेकिन अब यह कदम उठाया गया है ताकि ऑफशोर मार्केट में रुपये की कीमतों में हेरफेर को रोका जा सके।
बैंकों पर दबाव और भारी नुकसान का खतरा
देश के अंदर और बाहर के बैंक करीब $30 बिलियन से $40 बिलियन की सकल ऑनशोर पोजीशन पर काबिज हैं। इन पोजीशन को $100 मिलियन की नई सीमा तक लाने के लिए बैंकों को भारी मात्रा में अपने सौदे वापस लेने होंगे। इस प्रक्रिया में बैंकों को मौजूदा तिमाही में मार्क-टू-मार्केट (MTM) नुकसान झेलना पड़ सकता है। Jefferies के विश्लेषकों का मानना है कि अगर रुपया डॉलर के मुकाबले ₹1 भी गिरता है, तो बैंकिंग सेक्टर को ₹30,000-40,000 करोड़ का एकमुश्त नुकसान हो सकता है। कुछ बैंक रेगुलेटरी राहत के लिए अनुग्रह (grandfathering) या समय सीमा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
रुपये की चाल और हेजिंग की मुश्किलें
हाल ही में भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले ₹95.22 के ऑल-टाइम लो के करीब कारोबार कर रहा था। ऐसे में ऑनशोर फॉरवर्ड और ऑफशोर NDF की कीमतों के बीच का स्प्रेड 40 पैसे से बढ़कर ₹1.35 हो गया था, जो बाजार में तनाव का संकेत था। RBI के इस कदम से यह अंतर और भी बढ़ सकता है। RBL Bank के ट्रेजरी हेड, अंशुल चंदक के मुताबिक, ये नए नियम बैंकों और बड़ी कंपनियों के लिए प्रभावी ढंग से हेज (hedging) करना और भी मुश्किल बना देंगे।
आगे क्या?
RBI के इस कड़े कदम से रुपये की तत्काल भविष्य में और अधिक अस्थिरता देखने को मिल सकती है, क्योंकि बाजार इन नए निर्देशों को समझने की कोशिश कर रहा है। हेजिंग के कम होते विकल्प और पोजीशन को तुरंत खत्म करने का दबाव कीमतों में बड़े उतार-चढ़ाव को बढ़ा सकता है। पहले जो अनुमान लगाए जा रहे थे कि USD/INR क्वार्टर-एंड तक 93.89 और 12 महीने में 93.09 तक जा सकता है, वे अब बदल सकते हैं। RBI का लक्ष्य व्यवस्थित बाजार बनाए रखना है, लेकिन वैश्विक आर्थिक ताकतों के सामने इन सख्त उपायों की प्रभावशीलता रुपये की दिशा तय करेगी।