Purple Economy: दिव्यांगों को शामिल कर भारत की GDP में जुड़ सकते हैं ₹150 बिलियन!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Purple Economy: दिव्यांगों को शामिल कर भारत की GDP में जुड़ सकते हैं ₹150 बिलियन!

Deloitte और EnAble India की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, अगर दिव्यांगजनों को सही ट्रेनिंग और रोज़गार मिले, तो भारत की अर्थव्यवस्था में ₹150 बिलियन की भारी बढ़ोतरी हो सकती है। यह रिपोर्ट कहती है कि दिव्यांगों को सिर्फ CSR (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) का हिस्सा न मानकर, इसे आर्थिक विकास की मुख्य रणनीति बनाना चाहिए।

भारत के लिए ₹150 बिलियन का बड़ा अवसर

Deloitte India और EnAble India की एक ताज़ा रिपोर्ट ने भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा अवसर उजागर किया है। रिपोर्ट का अनुमान है कि अगर दिव्यांगजनों को मुख्यधारा के आर्थिक ढांचे में सफलतापूर्वक शामिल किया जाए, तो देश की अर्थव्यवस्था में लगभग ₹150 बिलियन का इजाफा हो सकता है। यह रिपोर्ट दिव्यांगों को सिर्फ कल्याण या CSR (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) के नज़रिए से देखने के बजाय, राष्ट्रीय उत्पादकता और नवाचार (innovation) के लिए एक बड़ी रणनीति के तौर पर पेश करती है।

अनदेखी प्रतिभा और उपभोक्ताओं का बाज़ार

रिपोर्ट एक चौंकाने वाली सच्चाई बताती है: भारत में दिव्यांगजनों की रोज़गार दर 25% से भी काफी कम है, जबकि सामान्य आबादी में यह दर लगभग 60% है। बेहतर ट्रेनिंग और कार्यस्थलों पर सुगमता (accessibility) बढ़ाकर, लाखों दिव्यांगजनों को सक्रिय कार्यबल में शामिल किया जा सकता है। सिर्फ कार्यबल ही नहीं, यह वर्ग एक विशाल उपभोक्ता आधार भी है। दुनिया भर में, दिव्यांगजन और उनके परिवार लगभग $18 ट्रिलियन के बाज़ार का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो कि अब तक के सबसे बड़े अनदेखे बाज़ारों में से एक है।

राष्ट्रीय विकास की नई रूपरेखा

इस आर्थिक क्षमता का लाभ उठाने के लिए, रिपोर्ट एक 'राष्ट्रीय विकास फ्रेमवर्क' का सुझाव देती है। इसमें मज़बूत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (Digital Public Infrastructure) का निर्माण और 'पर्पल इकोनॉमिक ज़ोन' (Purple Economic Zones) बनाना शामिल है, जहाँ सुगमता को प्राथमिकता दी जाए। इन पहलों से शोधकर्ताओं द्वारा बताए गए 'पर्पल डेल्टा' (Purple Delta) यानी वर्तमान बहिष्करण (exclusion) के कारण खोए हुए आर्थिक अवसर को पाटने में मदद मिलेगी। यह रणनीति 'पर्पल इकोनॉमी फ्लाईव्हील' (Purple Economy Flywheel) की भी बात करती है, जहाँ बढ़ी हुई सुगमता से नवाचार (innovation) बढ़ेगा, रोज़गार दर सुधरेगी और अंततः कई क्षेत्रों में बाज़ार का विस्तार होगा।

किन सेक्टर्स में है सबसे ज़्यादा संभावना?

रिपोर्ट में ऐसे कई सेक्टर्स की पहचान की गई है जहाँ समावेशी (inclusive) नीतियों को लागू करने से बड़ा फायदा हो सकता है। बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं, टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर और रिटेल जैसे उद्योग विशेष रूप से शामिल डिज़ाइन और भर्ती नीतियों को अपनाकर लाभान्वित हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, सुगम डिजिटल बैंकिंग प्लेटफॉर्म और समावेशी रिटेल वातावरण बनाने से ऐसे ग्राहक वर्ग को आकर्षित किया जा सकता है, जिनकी अनदेखी की गई है, जिससे इन क्षेत्रों में अग्रणी कंपनियों के लिए लंबी अवधि में राजस्व वृद्धि (revenue growth) में सुधार हो सकता है।

निवेशकों और बाज़ार विश्लेषकों के लिए, इस पहल का दीर्घकालिक प्रभाव काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि कॉर्पोरेट सेक्टर इसे कितनी तेज़ी से अपनाता है और सरकार सहायक इंफ्रास्ट्रक्चर को लागू करने में कितनी सफल होती है। अगले चरणों में 'पर्पल इकोनॉमिक ज़ोन' से जुड़ी विशिष्ट नीतियों का विकास और प्रमुख कंपनियों द्वारा समावेशी रोज़गार और सुगमता पहलों पर ESG (Environmental, Social, and Governance) रिपोर्टिंग में डेटा का खुलासा देखना महत्वपूर्ण होगा।

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