राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) में एक प्रस्तावित संशोधन के तहत, अंत्योदय अनाजThe National Food Security Act (NFSA) के तहत अनाज आवंटन में बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है। एक नए मसौदे के अनुसार, अब प्रति व्यक्ति 7 किलोग्राम अनाज मिलेगा, लेकिन प्रति परिवार यह अधिकतम 35 किलोग्राम तक सीमित रहेगा। इस बदलाव से देशभर में हर महीने अनाज वितरण में 23 करोड़ किलोग्राम से ज्यादा की कमी आ सकती है। यह प्रस्ताव आवंटन में असंतुलन को दूर करने के उद्देश्य से लाया गया है, लेकिन इसका असर छोटे परिवारों और पांच या उससे अधिक सदस्यों वाले परिवारों पर पड़ सकता है।
नए प्रस्ताव से परिवारों को मिलेगा कितना अनाज?
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) में एक महत्वपूर्ण संशोधन का मसौदा सामने आया है, जिससे भारत में अंत्योदय परिवारों को अनाज बांटने के तरीके में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। वर्तमान में, हर महीने प्रति परिवार 35 किलोग्राम अनाज का एक निश्चित कोटा मिलता है, भले ही उस घर में कितने भी लोग रहते हों। लेकिन नए प्रस्ताव के तहत, यह कोटा प्रति व्यक्ति 7 किलोग्राम होगा, और इसे प्रति परिवार अधिकतम 35 किलोग्राम पर सीमित कर दिया जाएगा।
परिवारों के हिसाब से वितरण पर असर
इस प्रस्ताव से परिवारों को मिलने वाले अनाज की मात्रा उनके सदस्यों की संख्या के आधार पर बदलेगी। उदाहरण के तौर पर, एक व्यक्ति वाले परिवार को जहां अभी 35 किलोग्राम अनाज मिलता है, वहीं इस नए नियम के तहत केवल 7 किलोग्राम ही मिलेगा। इसी तरह, दो सदस्यों वाले परिवार को 14 किलोग्राम और तीन सदस्यों वाले परिवार को 21 किलोग्राम अनाज मिलेगा। पाँच या उससे अधिक सदस्यों वाले बड़े परिवारों के लिए 35 किलोग्राम की कैप जारी रहेगी, जिसका मतलब है कि इन परिवारों में भी प्रति व्यक्ति अनाज का हिस्सा कम हो जाएगा।
राष्ट्रीय स्तर पर अनाज आवंटन में संभावित कमी
NFSA डैशबोर्ड के 15 जुलाई, 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, देश में 2.32 करोड़ से अधिक अंत्योदय राशन कार्ड हैं, जिनके तहत 8.33 करोड़ से ज्यादा लाभार्थी जुड़े हुए हैं। फिलहाल, हर महीने अनाज की कानूनी जरूरत लगभग 81.36 करोड़ किलोग्राम है। अगर प्रस्तावित बदलाव लागू होते हैं, तो कुल मासिक आवंटन घटकर करीब 58.34 करोड़ किलोग्राम रह सकता है। यह हर महीने कम से कम 23.02 करोड़ किलोग्राम अनाज की कमी या लगभग 28.3% की कटौती को दर्शाता है।
खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग (Department of Food and Public Distribution) का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य अनाज वितरण को तर्कसंगत बनाना और उन असंतुलनों को दूर करना है, जहां छोटे परिवारों को बड़े परिवारों की तुलना में प्रति व्यक्ति अधिक अनाज मिल रहा है। हालांकि, यह प्रस्ताव अभी केवल चर्चा के चरण में है और इसे कानून का रूप नहीं दिया गया है। इसे लागू होने से पहले संसद की औपचारिक मंजूरी और राष्ट्रपति की सहमति की आवश्यकता होगी।
निवेशक और आर्थिक परिप्रेक्ष्य
खाद्य-अनाज आवंटन में संभावित कमी व्यापक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सरकार के खाद्य सब्सिडी खर्च को प्रभावित कर सकती है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में बदलाव अक्सर सरकारी खर्च को प्रभावित करते हैं, जो केंद्रीय बजट का एक अहम हिस्सा है। निवेशकों और बाजार विश्लेषकों के लिए, मुख्य बात यह होगी कि अंतिम नीति क्या बनती है और क्या इससे खाद्य सुरक्षा पर राजकोषीय खर्च में बदलाव आता है। चूँकि यह एक मसौदा प्रस्ताव है, इसलिए अभी भी पूरे देश में प्रति परिवार 35 किलोग्राम का मौजूदा कोटा लागू है। इस संशोधन के विधायी प्रगति पर भविष्य के अपडेट खाद्य सब्सिडी बिल और राज्य-स्तरीय वितरण दक्षता पर संभावित दीर्घकालिक प्रभाव को समझने के लिए महत्वपूर्ण होंगे।
