बिक्री बढ़ी, पर मुनाफे पर दबाव क्यों?
यह जानकारी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के लेटेस्ट आंकड़ों से सामने आई है, जो एक महत्वपूर्ण विरोधाभास दिखाती है। जहां कंपनियां अपनी सेल्स को तेजी से बढ़ा रही हैं, वहीं इस ग्रोथ को मुनाफे में बदलना मुश्किल हो रहा है। 2025 की दिसंबर तिमाही के नतीजे बताते हैं कि नेट प्रॉफिट की ग्रोथ में भारी गिरावट आई है, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में काफी कम है। यह साफ संकेत है कि बढ़ती लागतें, विशेष रूप से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में, लाभप्रदता (Profitability) को प्रभावित कर रही हैं, भले ही वहां सेल्स की रफ्तार तेज रही हो।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की सेल्स ग्रोथ और लागतों का खेल
RBI के विश्लेषण के अनुसार, प्राइवेट नॉन-फाइनेंशियल कंपनियों की सेल्स में ग्यारह तिमाहियों के बाद पहली बार डबल-डिजिट ग्रोथ दर्ज की गई। इस उछाल का नेतृत्व मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने किया, जिसकी बिक्री में 11.4% का इजाफा हुआ। ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिकल मशीनरी और नॉन-फेरस मेटल जैसे सेगमेंट्स ने इसमें अहम भूमिका निभाई। हालांकि, इसी अवधि में, नेट प्रॉफिट की ग्रोथ में उल्लेखनीय नरमी देखी गई। इस स्थिति के पीछे मुख्य कारण लागतों में आई तेजी है। मैन्युफैक्चरिंग फर्मों के लिए स्टाफ कॉस्ट में 12.4% की बढ़ोतरी हुई, जबकि कच्चे माल (Raw Material) के खर्चों में 12.7% का उछाल आया। इसके परिणामस्वरूप, कच्चे माल-से-सेल्स का अनुपात 55.9% से बढ़कर 57.5% तक पहुंच गया, जो बढ़ती इनपुट कॉस्ट इन्फ्लेशन (Input Cost Inflation) का साफ संकेत है।
सेक्टरों में बढ़ता अंतर: IT vs मैन्युफैक्चरिंग
यह लागत दबाव सभी सेक्टर्स में समान रूप से नहीं है। जहां मैन्युफैक्चरिंग में बिक्री बढ़ी, वहीं आईटी सेक्टर की सेल्स ग्रोथ 8.8% रही, जो पिछले क्वार्टर से थोड़ी बेहतर है। लेकिन यहां भी लागतों ने असर दिखाया। आईटी फर्मों की स्टाफ कॉस्ट 6.6% बढ़ी। इन आंकड़ों को शेयर बाजार के प्रदर्शन से भी समझा जा सकता है। Nifty India Manufacturing Index ने पिछले एक साल में लगभग 23.1% का रिटर्न दिया है और इसका मार्केट कैप लगभग ₹1.06 लाख करोड़ है, जबकि PE रेश्यो करीब 28.4 है। इसके विपरीत, Nifty IT Index पिछले एक साल में -22.1% का रिटर्न दे चुका है और इसका PE रेश्यो 21.2 से 22.7 के बीच बना हुआ है।
AI और लेबर कोडिंग का IT पर असर
IT सेक्टर पर लागत दबाव के अलावा कुछ खास चिंताएं भी हैं। नई लेबर कोडिंग के कारण Q3 FY26 में छह सबसे बड़ी IT फर्मों पर ₹5,400 करोड़ का एकमुश्त चार्ज लगा, जिसने सीधे तौर पर उनके मुनाफे को कम किया। इसके अतिरिक्त, AI-संचालित ऑटोमेशन भविष्य में पारंपरिक मानव-आधारित ग्रोथ मॉडल के लिए एक गंभीर चुनौती पेश कर सकता है।
भविष्य की राह और चुनौतियों का सामना
भविष्य की ओर देखें तो, नैसकॉम (Nasscom) का अनुमान है कि FY26 में IT सेक्टर 6.1% की दर से बढ़कर $315 अरब तक पहुंच जाएगा। वहीं, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए, FICCI सर्वे में 57% निर्माताओं ने उत्पादन लागत में वृद्धि की बात कही है। मैन्युफैक्चरिंग PMI भी दिसंबर 2025 में घटकर 55.0 पर आ गया, जो दो साल का निचला स्तर है, यह गतिविधि की गति में नरमी का संकेत है। इन बढ़ती लागतों और संभावित मांग में नरमी के बीच, कंपनियों को अपने मार्जिन को बनाए रखने के लिए रणनीतिक रूप से काम करना होगा।