3P Investment Managers के दिग्गज निवेशक प्रशांत जैन का भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर बड़ा नज़रिया सामने आया है। उनका मानना है कि अगले तीन सालों में भारतीय इक्विटी बाज़ार से सालाना **15%** तक का रिटर्न मिल सकता है।
क्यों बढ़ाया भारतीय बाज़ार पर भरोसा?
प्रशांत जैन का कहना है कि पिछले दो सालों से भारतीय अर्थव्यवस्था पर जो बाहरी दबाव (External Pressures) थे, अब वो कम हो रहे हैं। कंपनी की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, इस बदलाव से इक्विटी बाज़ार के लिए एक स्थिर माहौल बनेगा। 3P Investment Managers को उम्मीद है कि अगले तीन सालों में औसतन 14% से 15% का सालाना रिटर्न मिलेगा।
आर्थिक मोर्चे पर कैसे हो रहा सुधार?
इस पॉजिटिव आउटलुक की वजह भारत के एक्सटर्नल अकाउंट में दिख रहा सुधार है। पहले जहां सोने का ज़्यादा इम्पोर्ट, कच्चे तेल की बढ़ी कीमतें और फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट (FPI) का बाहर जाना जैसी चीज़ें बड़ी रुकावटें थीं, अब उनमें नरमी आ रही है। जैन बताते हैं कि गोल्ड इम्पोर्ट, जो पहले $50 बिलियन से $80 बिलियन सालाना तक पहुंच गया था, अब कम होने की उम्मीद है। हाल ही में 15% इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ने और ग्लोबल गोल्ड प्राइस में नरमी इसका कारण है। वहीं, कच्चे तेल की कीमतें $70 प्रति बैरल के आसपास स्थिर होने से करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) को राहत मिली है।
कैपिटल अकाउंट में क्या है उम्मीद?
कैपिटल अकाउंट के मोर्चे पर, 3P Investment Managers को उम्मीद है कि FY27 तक नेट फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) में सुधार होगा। हालांकि, मल्टीनेशनल कंपनियों और प्राइवेट इक्विटी फर्मों के कुछ एग्जिट हुए हैं, लेकिन FY26 में भारत में ग्रॉस एफडीआई लगभग $95 बिलियन पर स्थिर बना हुआ है। बैंकिंग, मैन्युफैक्चरिंग, डेटा सेंटर्स और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टर्स में अच्छा खासा कैपिटल फ्लो हो रहा है। इसके अलावा, फर्म का मानना है कि FPI की बिकवाली अपने चरम पर है और जून में बाइंग के शुरुआती संकेत मिले हैं।
फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व और पॉलिसी का असर
सरकार और रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) की पॉलिसी पहलों का फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व को मज़बूत करने में अहम रोल होगा। अनुमान है कि फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट (FCNR) बैंक डिपॉजिट और एक्सटर्नल कमर्शियल बोर्रोइंग (ECB) जैसे कदम आने वाले महीनों में $70 बिलियन से $100 बिलियन तक आकर्षित कर सकते हैं। साथ ही, टैक्स छूट और बॉन्ड मार्केट की पहुंच से जुड़े प्रयासों से भारत के ग्लोबल बॉन्ड इंडेक्स में शामिल होने की उम्मीद है, जिससे अगले एक साल में $20 बिलियन से $25 बिलियन अतिरिक्त आ सकते हैं।
निवेशकों को इन बाहरी सुधारों पर नज़र रखनी होगी कि ये डोमेस्टिक इकोनॉमिक स्टेबिलिटी में कैसे बदलते हैं। 3P Investment Managers भले ही FY27 में $50 बिलियन का बैलेंस ऑफ पेमेंट्स (BoP) सरप्लस देख रही है, लेकिन मार्केट पर इसका असल असर कॉर्पोरेट अर्निंग्स में लगातार ग्रोथ और ग्लोबल ऑयल प्राइस की स्थिरता पर निर्भर करेगा। फर्म स्मॉल और मिड-कैप सेगमेंट्स में एक्सपोजर बढ़ाने की योजना बना रही है, जिससे पता चलता है कि मैक्रोइकॉनॉमिक व्यू पॉजिटिव होने के बावजूद, बॉटम-अप स्टॉक पिकिंग उनकी स्ट्रैटेजी का अहम हिस्सा बनी रहेगी।
