अब पेंशन पाने वाले रिटायर्ड लोग भी अपनी पेंशन इनकम पर स्टैंडर्ड डिडक्शन का फायदा उठा सकते हैं। इससे टैक्स देनदारी कम होगी। यह नियम पुराने और नए, दोनों टैक्स रिजीम पर लागू होंगे।
क्या है नया नियम?
रिटायरमेंट के बाद पेंशन आय पर स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction) का लाभ मिलेगा या नहीं, इसे लेकर अक्सर लोगों में कन्फ्यूजन रहता है। लेकिन अब यह साफ हो गया है कि पेंशनर्स अपनी पेंशन आय पर स्टैंडर्ड डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं। यह जानकारी फाइनेंशियल ईयर 2025-2026 के लिए टैक्स प्लानिंग कर रहे लोगों के लिए काफी अहम है, क्योंकि इससे उनकी कुल टैक्स योग्य आय (Taxable Income) सीधे कम हो जाएगी।
पेंशनर्स के लिए क्यों है ज़रूरी?
कई रिटायर्ड लोगों के लिए पेंशन ही आय का मुख्य जरिया होती है। इनकम टैक्स एक्ट के तहत, पेंशन को 'सैलरी' (Salaries) हेड के तहत आय माना जाता है, भले ही यह पिछले कामों के एवज में मिल रही हो। इसी वजह से, पेंशनर्स भी उन्हीं स्टैंडर्ड डिडक्शन नियमों का फायदा उठा सकते हैं जो एक्टिव नौकरी करने वाले कर्मचारी उठाते हैं। टैक्स की गलतियों से बचने और सही टैक्स प्लानिंग के लिए इस नियम को समझना बहुत ज़रूरी है।
कैसे काम करेगा डिडक्शन?
पेंशनर को कितना स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलेगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि वे फाइनेंशियल ईयर के लिए कौन सा टैक्स रिजीम चुनते हैं। पुराने टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) के तहत, पेंशनर्स ₹50,000 तक का स्टैंडर्ड डिडक्शन ले सकते हैं। वहीं, अगर उन्होंने नए टैक्स रिजीम (New Tax Regime) को चुना है, तो यह सीमा बढ़ाकर ₹75,000 तक हो जाती है। यह डिडक्शन आपकी कुल पेंशन आय से टैक्स की गणना (Tax Calculation) से पहले घटाया जाता है, जिससे टैक्स स्लैब के हिसाब से अच्छी-खासी बचत हो सकती है।
पेंशन आय का वर्गीकरण
यह डिडक्शन इसलिए संभव है क्योंकि इनकम टैक्स एक्ट पेंशन आय को सैलरी आय की तरह ही मानता है। जब किसी व्यक्ति को पूर्व नियोक्ता (Ex-Employer) से नियमित मासिक पेंशन मिलती है, तो टैक्स डिपार्टमेंट इसे सैलरी आय की श्रेणी में रखता है। नतीजतन, सैलरी आय से जुड़े टैक्स लाभ, जैसे कि स्टैंडर्ड डिडक्शन, पेंशनर्स को भी मिलते हैं। यह नियम तब भी लागू होता है जब व्यक्ति सक्रिय रूप से काम कर रहा हो या पूरी तरह से रिटायर हो चुका हो।
टैक्सपेयर्स को क्या ध्यान रखना चाहिए?
टैक्स फाइलिंग करते समय रिटायर्ड लोगों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि डिडक्शन सही ढंग से दर्ज किया गया हो, ताकि किसी तरह की टैक्स त्रुटि से बचा जा सके। टैक्स नियम बजट घोषणाओं और नीतिगत अपडेट के आधार पर बदल सकते हैं। इसलिए, यह हमेशा सलाह दी जाती है कि पेंशनर्स को अपनी आय का विवरण ध्यान से देखना चाहिए और फाइलिंग सीजन के दौरान किसी टैक्स प्रोफेशनल से सलाह लेनी चाहिए। रिटायर्ड लोगों के लिए मुख्य बात यह है कि वे अपने लिए सबसे फायदेमंद टैक्स रिजीम (पुराना या नया) चुनें, क्योंकि यही तय करेगा कि उन पर कौन सी डिडक्शन लिमिट लागू होगी।
