यह एनर्जी क्रंच सिर्फ सप्लाई की अस्थायी समस्या नहीं है, बल्कि देश की जियोपॉलिटिकल (Geopolitical) कमजोरियों को भी उजागर करता है। पिछले एक दशक से पाकिस्तान इंपोर्टेड फ्यूल (Imported Fuel) पर बहुत ज्यादा निर्भर हो गया है, जिससे उसके पब्लिक फाइनेंस (Public Finance) और आर्थिक स्थिरता पर भारी दबाव पड़ा है।
एलएनजी (LNG) की कमी और ग्रिड पर असर
पाकिस्तान का पावर ग्रिड (Power Grid) भारी कमी से जूझ रहा है, जिसमें पीक डिमांड (Peak Demand) 22,000 मेगावाट से ऊपर जाने पर भी रोजाना 4,500 से 6,500 मेगावाट तक की कमी देखी जा रही है। लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की जो कमी आई है, वो पावर जनरेशन (Power Generation) और इंडस्ट्रीज (Industries) के लिए मुख्य ईंधन है। कतर (Qatar) जैसे बड़े सप्लायर (Supplier) द्वारा एक 'डिस्प्शन इवेंट' (Disruption Event) घोषित करने के बाद एलएनजी (LNG) की शिपमेंट्स (Shipments) रुक सी गई हैं। इससे गैस-आधारित पावर प्लांट ठप पड़ गए हैं, जिससे जनरेशन में 3,200 मेगावॉट से ज्यादा की कमी आई है। हाइड्रोपावर (Hydropower) का उत्पादन कम होना इस समस्या को और बढ़ा रहा है। एनर्जी मिनिस्टर (Energy Minister) औवेस लेघारी ने माना है कि कुछ इलाकों में 8 से 16 घंटे तक की लोड-शेडिंग (Load-shedding) हो रही है, जो ऑफिशियल 'लोड मैनेजमेंट' (Load Management) से कहीं ज्यादा है। इंडस्ट्रीज (Industries) को रोजाना 8 घंटे तक की लोड-शेडिंग झेलनी पड़ रही है, जिससे लोकल मैन्युफैक्चरिंग (Local Manufacturing) और एक्सपोर्ट (Export) के वादे बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।
स्ट्रक्चरल कमजोरियां सामने आईं
पाकिस्तान के एनर्जी सेक्टर (Energy Sector) में लंबे समय से अंडर-इन्वेस्टमेंट (Under-investment), इंपोर्टेड फॉसिल फ्यूल (Imported Fossil Fuel) पर अत्यधिक निर्भरता और इंटीग्रेटेड पॉलिसी प्लानिंग (Integrated Policy Planning) की कमी रही है, जिसके चलते एनर्जी सिक्योरिटी (Energy Security) कमजोर है। करीब एक दशक पहले, घरेलू उत्पादन घटने के बाद पाकिस्तान ने एलएनजी (LNG) की ओर रुख किया था। हालांकि शुरुआत में यह रणनीति किफायती लगी, लेकिन इसने देश को ग्लोबल प्राइस शॉक्स (Global Price Shocks) और सप्लाई डिसरप्शन (Supply Disruptions) के प्रति बेहद संवेदनशील बना दिया है। पावर जनरेशन के एक बड़े हिस्से को चलाने वाली इंपोर्टेड एलएनजी (Imported LNG) पर यह निर्भरता पाकिस्तान को मार्केट वोलेटिलिटी (Market Volatility) का शिकार बनाती है। भारत (India) जैसे पड़ोसी देश जहां सालाना 15 गीगावॉट से ज्यादा सोलर इंफ्रास्ट्रक्चर (Solar Infrastructure) बढ़ा रहे हैं, वहीं बांग्लादेश (Bangladesh) भी लंबी अवधि के एलएनजी (LNG) सौदे कर रहा है। पाकिस्तान में रिन्यूएबल्स (Renewables) का विस्तार हो रहा है, लेकिन यह पूरी तरह से उसकी कमजोरी को दूर नहीं कर पाया है। देश की कुल जनरेशन कैपेसिटी (Generation Capacity) करीब 46,605 मेगावॉट है, लेकिन इनएफिशिएंट यूटिलाइजेशन (Inefficient Utilization) और फ्यूल की कमी इसकी प्रभावशीलता को रोक रही है।
सोलर पावर का सहारा
इस लगातार बने हुए संकट के बीच, 2022 के एनर्जी शॉक के बाद पाकिस्तान में डिस्ट्रीब्यूटेड सोलर कैपेसिटी (Distributed Solar Capacity) का तेजी से विस्तार एक अहम सहारा साबित हुआ है। इस 'लोगों द्वारा संचालित सोलर क्रांति' (People-led Solar Revolution) ने 2020 से 12 अरब डॉलर तक के ऑयल और गैस इंपोर्ट (Oil and Gas Imports) को टालने में मदद की है। सोलर पैनल की घटती लागत और ग्रिड में अतिरिक्त पावर फीड करने के सरकारी इंसेंटिव (Incentives) ने रूफटॉप सोलर (Rooftop Solar) को घरों और बिजनेसेज के लिए एक आकर्षक और किफायती विकल्प बना दिया है। 2024 में ग्रिड-सप्लाईड इलेक्ट्रिसिटी (Grid-supplied Electricity) में सोलर पावर जनरेशन (Solar Power Generation) का हिस्सा लगभग एक-पांचवां पहुंच गया है। यह इंपोर्टेड फ्यूल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन की दिक्कतों से एक अहम सुरक्षा कवच प्रदान करता है। यह ग्रोथ पाकिस्तान के सोलर सेक्टर को ग्लोबल एलएनजी (LNG) प्राइस शॉक्स के प्रति अपनी भेद्यता को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जो उन क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं के बिल्कुल विपरीत है जो अभी भी फॉसिल फ्यूल वोलेटिलिटी (Fossil Fuel Volatility) के भारी जोखिम में हैं।
गहरी स्ट्रक्चरल कमजोरियां और कॉन्ट्रैक्ट देनदारियां
पाकिस्तान की ऊर्जा समस्याएं गहरी स्ट्रक्चरल वीकनेसेज (Structural Weaknesses) और पिछली पॉलिसी की गलतियों से उपजी हैं। लंबी अवधि के, सख्त 'टेक-या-पे' (Take-or-Pay) एलएनजी (LNG) कॉन्ट्रैक्ट्स (Contracts), जिनमें से कुछ जल्द ही री-नेगोशिएट (Re-negotiate) होने वाले हैं, एक बड़ा फाइनेंशियल बोझ बन गए हैं। अनुमान है कि इन कॉन्ट्रैक्ट्स से सालाना 378 मिलियन डॉलर का नुकसान हो रहा है, क्योंकि गिरती मांग और बढ़ते रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) के उपयोग के कारण गैस का सरप्लस (Surplus) हो गया है। इंपोर्टेड फ्यूल पर यह भारी निर्भरता, जो देश के ऊर्जा स्रोतों का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है, उसके फॉरेन करेंसी रिजर्व्स (Foreign Currency Reserves) को खत्म कर रही है। यह इंटरनेशनल प्राइस शॉक्स (International Price Shocks) के प्रति अर्थव्यवस्था को और भी कमजोर बनाता है, जिससे इन्फ्लेशन (Inflation) बढ़ता है और एक्सपोर्ट कॉम्पिटिटिवनेस (Export Competitiveness) को नुकसान पहुंचता है। फेडरेशन ऑफ पाकिस्तान चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FPCCI) ने बार-बार 'एनर्जी इमरजेंसी' (Energy Emergency) की मांग की है, और बताया है कि भारत, बांग्लादेश, चीन और वियतनाम जैसे क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी घरेलू ऊर्जा मूल्य दबावों को अधिक प्रभावी ढंग से प्रबंधित करते हैं। पिछली पॉलिसी की असफलताएं, जिसमें पावर जनरेशन कैपेसिटी (Power Generation Capacity) विस्तार में फ्यूल ऑयल (Fuel Oil) पर जोर देना और असंगत रेगुलेटरी एनफोर्समेंट (Regulatory Enforcement) शामिल हैं, ने इन मुद्दों को और बढ़ा दिया है, जिससे देश महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश (Infrastructure Investment) के बावजूद ऊर्जा असुरक्षित बना हुआ है।
भविष्य का नजरिया
पाकिस्तान के एनर्जी सेक्टर का तत्काल भविष्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है, जो एलएनजी (LNG) शिपमेंट्स की त्वरित बहाली और बेहतर हाइड्रोपावर (Hydropower) आउटपुट पर निर्भर करता है। हालांकि सरकार स्पॉट एलएनजी (Spot LNG) की खरीद पर विचार कर रही है, लेकिन इससे जुड़ी अधिक लागत एक फिस्कल दुविधा पेश करती है। देश का घरेलू संसाधनों की ओर रणनीतिक बदलाव, जिसमें बेहतर सोलर डिप्लॉयमेंट (Solar Deployment), न्यूक्लियर (Nuclear) और हाइड्रोपावर (Hydropower) शामिल हैं, दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि, इंपोर्टेड फ्यूल पर स्ट्रक्चरल निर्भरता (Structural Dependence) और मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट्स की देनदारियों के लिए व्यापक सुधारों की आवश्यकता है। इसमें प्रोक्योरमेंट (Procurement) में अधिक लचीलापन और भविष्य के संकटों को कम करने तथा आर्थिक लचीलेपन (Economic Resilience) को सुनिश्चित करने के लिए ऊर्जा दक्षता (Energy Efficiency) और संरक्षण (Conservation) पर निरंतर ध्यान देना शामिल है।
