भू-राजनीतिक वजह (Geopolitical Trigger)
पश्चिमी एशिया में जारी संकट ने वैश्विक ईंधन आपूर्ति में खलल डाल दिया है। ईरान और अमेरिका के बीच नाजुक सीजफायर की स्थिति और होरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से आवाजाही में आई बाधाओं के कारण, पाकिस्तान के लिए तेल की उपलब्धता कम हो गई है और आयात की लागत 2.6 गुना बढ़ गई है।
अर्थव्यवस्था पर असर (Economic Fallout)
प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने इस बात पर चिंता जताई है कि इस अचानक हुई बढ़ोतरी ने देश के सार्वजनिक वित्त पर भारी दबाव डाला है, खासकर ऐसे समय में जब पाकिस्तान पहले से ही भारी कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती लागतों को पूरा करने के लिए सब्सिडी देने से सरकारी भंडार खतरनाक रूप से खाली हो सकता है। PM Sharif ने यह भी कहा कि वर्तमान भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने देश की 2 साल की आर्थिक तरक्की को पीछे धकेल दिया है।
कूटनीतिक कोशिशें (Diplomatic Maneuvers)
पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सहायता पर निर्भर है। बढ़ती आयात लागत और क्षेत्रीय अस्थिरता को कम करने के लिए, इस्लामाबाद कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय हो गया है। डिप्टी प्राइम मिनिस्टर Ishaq Dar और आर्मी चीफ Asim Munir ने ईरान और अमेरिका के नेताओं से मुलाकात कर तनाव कम करने की अपील की है। ईरान के अधिकारियों के साथ भी सीजफायर को लेकर बातचीत जारी है।
