PSU Dividend Surge: सरकारी खजाने में बंपर इनकम! बजट के दबाव के बीच मिली बड़ी राहत

ECONOMY
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
PSU Dividend Surge: सरकारी खजाने में बंपर इनकम! बजट के दबाव के बीच मिली बड़ी राहत
Overview

सरकारी खजाने के लिए एक बड़ी खुशखबरी है! पब्लिक सेक्टर कंपनियों (PSUs) ने इस फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) के लिए तय टारगेट से कहीं ज़्यादा, **₹73,204 करोड़** से अधिक का डिविडेंड (Dividend) पहले ही दे दिया है। यह रकम बजट के दबाव को कम करने में सरकार के लिए काफी मददगार साबित हो रही है, खासकर तब जब टैक्स रेवेन्यू ग्रोथ (Tax Revenue Growth) धीमी पड़ गई है।

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रिकॉर्ड PSU डिविडेंड ने बढ़ाई सरकारी आय

10 मार्च 2026 तक जुटाए गए ₹73,204 करोड़ के डिविडेंड से न केवल चालू फाइनेंशियल ईयर 2026 का टारगेट पार हो गया है, बल्कि यह भी साफ हो गया है कि सरकारी कमाई के लिए सरकारी कंपनियों पर निर्भरता कितनी बढ़ गई है। यह आंकड़ा, फाइनेंशियल ईयर खत्म होने से हफ्तों पहले ही आ गया है, जो दर्शाता है कि एनर्जी कंपनियों जैसे Coal India और ONGC के दमदार प्रदर्शन की बदौलत इस बार डिविडेंड का रिकॉर्ड बन सकता है।

प्रमुख एनर्जी कंपनियों की बात करें तो, Coal India ने ₹10,271 करोड़, ONGC ने ₹10,002 करोड़, IOCL ने ₹5,818 करोड़ और BPCL ने ₹5,171 करोड़ का योगदान दिया है। ये कंपनियां, जिनमें से कई आकर्षक वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रही हैं, अक्सर पारंपरिक बचत योजनाओं से बेहतर डिविडेंड यील्ड (Dividend Yield) देती हैं। उदाहरण के लिए, Coal India का डिविडेंड यील्ड लगभग 7% और ONGC का 5% है। यह लगातार आय सरकार के लिए बेहद ज़रूरी है, खासकर तब जब FY26 के पहले आठ महीनों में कुल टैक्स रेवेन्यू ग्रोथ घटकर करीब 4% रह गई है।

इस विविध आय स्रोत में नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (NIIF) का भी योगदान रहा, जिसने ₹3,031 करोड़ का डिविडेंड दिया। इस तरह के नॉन-टैक्स रेवेन्यू (Non-Tax Revenue) में बढ़ोतरी सरकारी फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit) को कंट्रोल करने के लिए महत्वपूर्ण है, जो FY26 के लिए GDP का 4.4% रखा गया है, जो पिछले साल के 4.8% से सुधार है।

हालांकि, भविष्य में इतने बड़े डिविडेंड भुगतान पर कुछ चुनौतियां भी हैं। रिपोर्ट्स बताती हैं कि PSU कंपनियों की रणनीति में बदलाव आ रहा है, और वे मुनाफे को डिविडेंड के रूप में बांटने के बजाय कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) और री-इन्वेस्टमेंट (Re-investment) में ज़्यादा लगा रही हैं। इससे भविष्य में डिविडेंड कम हो सकता है। इसके अलावा, सरकार की इन डिविडेंड पर निर्भरता उसे कमोडिटी कीमतों (Commodity Prices) की अस्थिरता के प्रति संवेदनशील बनाती है, जिसका सीधा असर प्रमुख एनर्जी PSU की कमाई पर पड़ता है। अगर PSU की कमाई पर कोई बड़ी गिरावट आती है, तो सरकार को उधार बढ़ाने या खर्चों में कटौती जैसे उपायों का सहारा लेना पड़ सकता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.