PLI स्कीम्स का कमाल: भारत में ₹2.4 लाख करोड़ का निवेश, 14 लाख से ज्यादा नौकरियां!

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AuthorNeha Patil|Published at:
PLI स्कीम्स का कमाल: भारत में ₹2.4 लाख करोड़ का निवेश, 14 लाख से ज्यादा नौकरियां!

भारत की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम्स ने कमाल कर दिया है! इन स्कीम्स के तहत अब तक **₹2.4 लाख करोड़** का भारी निवेश आ चुका है और **14.15 लाख** से ज्यादा नई नौकरियां पैदा हुई हैं। सरकार की इस पहल का मकसद 14 अहम सेक्टर्स में डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना और इम्पोर्ट पर निर्भरता कम करना है।

Detailed Coverage

भारत की मैन्युफैक्चरिंग स्ट्रैटेजी का मुख्य आधार

प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) पहल भारत की औद्योगिक रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है। जुलाई 2026 तक, इन स्कीम्स के तहत कुल निवेश ₹2.4 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। भारत को एक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लक्ष्य से, इन स्कीम्स में सरकार की ओर से ₹1.91 लाख करोड़ की वित्तीय प्रतिबद्धता के साथ 14 प्रमुख सेक्टर्स को शामिल किया गया है। इस प्रोग्राम का मुख्य फोकस कंपनियों को डोमेस्टिक प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना है, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और एक्सपोर्ट में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।

इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा में बड़ी कामयाबी

इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर ने डोमेस्टिक प्रोडक्शन के जरिए इम्पोर्ट को बदलने में उल्लेखनीय प्रगति दिखाई है। मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग में 2.4 गुना का विस्तार हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप अब देश में इस्तेमाल होने वाले 99.2% मोबाइल हैंडसेट यहीं बनाए जा रहे हैं। इस बदलाव से मोबाइल फोन इम्पोर्ट में 77% की भारी कमी आई है, जिससे इलेक्ट्रॉनिक्स कैटेगरी में ट्रेड बैलेंस को बेहतर बनाने में मदद मिली है।

इसी तरह, फार्मास्युटिकल सेक्टर ने पॉलिसी-समर्थित मैन्युफैक्चरिंग के प्रभाव को दिखाया है। स्कीम में भाग लेने वाली कंपनियों ने ₹3.64 लाख करोड़ से अधिक की कुल बिक्री दर्ज की है। एक महत्वपूर्ण उपलब्धि 191 बल्क ड्रग्स और 26 जरूरी एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (APIs) के लिए लोकल मैन्युफैक्चरिंग की स्थापना है, जिन्हें पहले मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजारों से सोर्स किया जाता था। इस बदलाव से जरूरी दवाओं और मेडिकल उपकरणों, जैसे कि स्थानीय रूप से निर्मित सीटी स्कैनर्स और एमआरआई सिस्टम के लिए डोमेस्टिक सप्लाई चेन में सुधार हुआ है।

इंफ्रास्ट्रक्चर और कंज्यूमर गुड्स पर असर

इलेक्ट्रॉनिक्स और दवाओं के अलावा, इस स्कीम ने टेलीकॉम और कंज्यूमर अप्लायंस इंडस्ट्रीज को भी प्रभावित किया है। टेलीकॉम सेक्टर में, स्वदेशी 4G टेक्नोलॉजी को विकसित करने और 5G नेटवर्किंग उपकरणों के लिए आधार बनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। वहीं, व्हाइट गुड्स सेगमेंट में एयर कंडीशनर कंपोनेंट्स के लोकल प्रोडक्शन में बड़ी उछाल देखी गई है। कंप्रेसर मैन्युफैक्चरिंग क्षमता 1 मिलियन से बढ़कर 10 मिलियन यूनिट हो गई है, जो घरेलू उपकरणों के लिए लोकल वैल्यू एडिशन में एक महत्वपूर्ण वृद्धि दर्शाता है।

सरकारी निगरानी और चुनौतियां

हालांकि प्रोग्राम ने नतीजे दिए हैं, लेकिन यह अभी भी प्रगति पर है। कैबिनेट सेक्रेटरी के नेतृत्व में सचिवों के एक सशक्त समूह (Empowered Group of Secretaries) द्वारा इन स्कीम्स के एग्जीक्यूशन की निगरानी की जाती है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे अपने इच्छित लक्ष्यों को पूरा करें। धीमी प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंटेशन या रेगुलेटरी बाधाओं जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार नियमित रूप से प्रगति की समीक्षा करती है। दिशा-निर्देशों को सुव्यवस्थित करने और पात्रता मानदंडों का विस्तार करने के लिए संशोधन किए गए हैं ताकि कंपनियां प्रदान किए गए वित्तीय प्रोत्साहनों का प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकें। निवेशकों को फंड वितरण चक्रों और इन मैन्युफैक्चरिंग सुविधाओं के पूरी तरह से चालू होने पर कंपनियों की उच्च क्षमता उपयोग स्तर बनाए रखने की क्षमता के संबंध में भविष्य के अपडेट पर नज़र रखनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.