AI का बढ़ता दबदबा: 200 से ज्यादा अर्थशास्त्रियों ने चेताया, नौकरियों पर मंडरा रहा है खतरा!

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AuthorNeha Patil|Published at:
AI का बढ़ता दबदबा: 200 से ज्यादा अर्थशास्त्रियों ने चेताया, नौकरियों पर मंडरा रहा है खतरा!

दुनिया भर के 200 से ज्यादा प्रमुख अर्थशास्त्रियों और टेक लीडर्स ने मिलकर सरकार से AI के कारण नौकरियों के खत्म होने पर तुरंत कार्रवाई की मांग की है। उनकी चेतावनी है कि यह बदलाव इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन जैसा हो सकता है, लेकिन बहुत तेजी से होगा, जिससे अर्थव्यवस्था पर बड़ा जोखिम मंडरा रहा है। एक सर्वे में 99% बिजनेस एग्जीक्यूटिव्स का मानना है कि अगले दो सालों में AI के कारण कंपनियों में कर्मचारियों की संख्या कम होगी।

AI का बढ़ता खतरा: अर्थशास्त्रियों की बड़ी चेतावनी

दुनिया भर के 200 से ज़्यादा जाने-माने अर्थशास्त्रियों, जिनमें सोलह नोबेल पुरस्कार विजेता और कई बड़े टेक लीडर्स शामिल हैं, ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के कारण नौकरियों पर पड़ने वाले असर को लेकर तत्काल नीतिगत कार्रवाई की मांग की है। एक खुले पत्र में, जिसे "We Must Act Now" का नाम दिया गया है, इन विशेषज्ञों का तर्क है कि AI का तेजी से विकास एक ऐसे आर्थिक परिवर्तन को जन्म दे सकता है जो औद्योगिक क्रांति (Industrial Revolution) के पैमाने जैसा होगा, लेकिन कहीं ज़्यादा तेज गति से होगा। इस बदलाव से जहां एक ओर आर्थिक विकास के नए अवसर पैदा होंगे, वहीं दूसरी ओर बड़े पैमाने पर नौकरियों के खत्म होने का गंभीर जोखिम भी है।

आर्थिक बदलाव की रफ्तार

इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्री एरिक ब्रायनजोल्फसन (Erik Brynjolfsson) और एंथ्रोपिक (Anthropic) के सह-संस्थापक जैक क्लार्क (Jack Clark) और पूर्व गूगल सीईओ एरिक श्मिट (Eric Schmidt) जैसे टेक जगत के दिग्गज भी शामिल हैं। उनका मानना है कि अगले दशक में AI की क्षमताएं काफी बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञों की मुख्य चिंता यह है कि मौजूदा आर्थिक समझ और नियामक ढांचे इस तकनीक के तेजी से विस्तार के साथ तालमेल नहीं बिठा पा रहे हैं। ब्रायनजोल्फसन ने तो यहां तक कहा है कि नौकरियों पर पड़ने वाला असर एक आने वाली सुनामी जैसा है, और सरकारों और प्राइवेट टेक कंपनियों के बीच सक्रिय सहयोग के बिना, कर्मचारियों को गंभीर अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है।

नौकरियों में कटौती का बढ़ता सबूत

यह चेतावनी सिर्फ सैद्धांतिक आर्थिक मॉडल तक सीमित नहीं है। पिछले अठारह महीनों के वास्तविक नौकरी के आंकड़ों से भी यह रुझान साफ दिख रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2025 में लगभग 50,000 लोगों को AI से जुड़े ऑपरेशनल बदलावों के कारण अपनी नौकरी गंवानी पड़ी। चालू वर्ष में, मेटा (Meta), अमेज़ॅन (Amazon), स्नैप (Snap) और पिनटेरेस्ट (Pinterest) जैसी कई बड़ी टेक कंपनियों ने सार्वजनिक रूप से AI इंटीग्रेशन को अपनी वर्कफोर्स में कटौती का एक कारण बताया है।

यह ट्रेंड मई 2026 में किए गए 12,000 ग्लोबल बिजनेस एग्जीक्यूटिव्स के एक सर्वे से और भी पुख्ता होता है। सर्वे के नतीजों से पता चला कि 99% लीडर्स को उम्मीद है कि AI के इंटीग्रेशन से अगले चौबीस महीनों में उनकी कंपनी में कुल कर्मचारियों की संख्या कम हो जाएगी। निवेशकों के लिए, यह बदलाव बताता है कि टेक्नोलॉजी, कंज्यूमर सर्विसेज और प्रोफेशनल सर्विसेज जैसे सेक्टर की कंपनियां ऑटोमेशन के जरिए लागत में कटौती के आक्रामक उपाय कर सकती हैं, जिससे अल्पकालिक अवधि में मुनाफे (Profit Margins) और ऑपरेटिंग मॉडल में बदलाव आ सकता है। बाजार के लिए मुख्य रूप से यह देखना होगा कि सरकारें अगर कोई पॉलिसी गार्डरेल्स लागू करती हैं, तो वे कॉर्पोरेट जगत की AI से मैन्युअल प्रक्रियाओं को बदलने की होड़ के साथ कैसे इंटरैक्ट करती हैं, जो लंबी अवधि में व्यावसायिक स्थिरता और सामाजिक प्रभाव को प्रभावित कर सकता है।

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