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Oracle का बड़ा दांव: AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भारत में **12,000** नौकरियां खत्म!

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AuthorAditya Rao|Published at:
Oracle का बड़ा दांव: AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भारत में **12,000** नौकरियां खत्म!
Overview

Oracle भारत में लगभग **12,000** नौकरियों में कटौती कर रहा है। यह कंपनी के ग्लोबल AI इंफ्रास्ट्रक्चर में अरबों डॉलर के निवेश की रणनीति का हिस्सा है। ऐसे में, कंपनी क्लाउड राइवल्स से कड़ी प्रतिस्पर्धा और गिरते रुपये जैसी आर्थिक चुनौतियों से निपट रही है।

AI की रेस में Oracle: बड़े निवेश की तैयारी

Oracle अपने ग्लोबल स्ट्रैटेजी के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश कर रहा है, जिसके चलते भारत में लगभग 12,000 कर्मचारियों को हटाया जा रहा है। यह कंपनी के उन बड़े ग्लोबल कटौतियों का हिस्सा हो सकता है जो 30,000 कर्मचारियों को प्रभावित कर सकती हैं। यह कदम Oracle को जनरेटिव AI की दौड़ में Microsoft, AWS और Google जैसे दिग्गजों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए अपनी क्षमताएं बढ़ाने की ओर इशारा करता है। कंपनी अपने क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर (OCI) के विस्तार और Fusion Cloud एप्लीकेशन्स व NetSuite जैसे अपने SaaS पेशकशों में एडवांस्ड AI फीचर्स जोड़ने के लिए अरबों डॉलर लगा रही है। Oracle, Cohere जैसे AI डेवलपर्स के साथ पार्टनरशिप करके एंटरप्राइज-ग्रेड सॉल्यूशंस प्रदान कर रहा है। इस छंटनी का मुख्य उद्देश्य ऑपरेशन्स को सुव्यवस्थित करना और AI टैलेंट व इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर रिसोर्सेज को री-अलोकेट करना है, जो इंडस्ट्री के उस ट्रेंड को दर्शाता है जहाँ पारंपरिक भूमिकाएं बदल रही हैं या AI-फोक्स्ड स्किल्स द्वारा बदली जा रही हैं।

1 अप्रैल, 2026 तक Oracle के शेयर लगभग $145.23 पर ट्रेड कर रहे थे, जिसका प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेशियो 25-28 के बीच था और मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब $400-420 बिलियन था।

भारत की आर्थिक चुनौतियाँ

Oracle भारत में मुश्किल आर्थिक माहौल का भी सामना कर रहा है। भारत की GDP ग्रोथ 2027 के फाइनेंशियल ईयर में घटकर 6.5% रहने का अनुमान है, जिसका एक कारण ऊंची तेल की कीमतें और वैश्विक संघर्षों से सप्लाई चेन की दिक्कतें हैं। महंगाई भी एक चिंता का विषय है, और अगर तेल $100 प्रति बैरल के आसपास रहता है तो कंज्यूमर प्राइस 5% से ऊपर जा सकते हैं। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होने की उम्मीद है, जो 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत तक 90-95 तक पहुंच सकता है। इससे इंपोर्ट की लागत बढ़ेगी।

AI टैलेंट वॉर: प्रतिस्पर्धा का माहौल

जहां Oracle स्ट्रक्चरिंग कर रहा है, वहीं भारतीय IT सेक्टर में कंपटीटर्स, खासकर AI रोल्स में, अपने वर्कफोर्स का विस्तार कर रहे हैं। TCS और Infosys जैसी कंपनियां AI, क्लाउड और डेटा एनालिटिक्स में स्किल्ड प्रोफेशनल्स के लिए आकर्षक वेतन और बोनस के साथ नई हायरिंग प्रोग्राम चला रही हैं। AI टैलेंट की यह जोरदार मांग, जो 30-40% बढ़ रही है और ऊंचे वेतन दिला रही है, Oracle की छंटनी के बिल्कुल विपरीत है। यह टैलेंट वॉर AI-संचालित ग्रोथ और ऑटोमेशन की ओर व्यापक इंडस्ट्री शिफ्ट को दर्शाता है।

एग्जीक्यूशन, कर्ज और मनोबल पर चिंताएं

Oracle की महत्वपूर्ण छंटनी से यह चिंता बढ़ गई है कि कंपनी अपने AI और क्लाउड निवेश को तेज करते हुए सुचारू रूप से डिलीवरी और कस्टमर ऑपरेशन्स को कैसे मैनेज कर पाएगी। कर्मचारियों को अचानक टर्मिनेशन ईमेल्स मिलने और सिस्टम एक्सेस खोने की खबरें वर्कफोर्स के मनोबल को प्रभावित कर सकती हैं और कानूनी चुनौतियों का कारण बन सकती हैं। वित्तीय रूप से, Oracle अपने AI विस्तार के लिए $45-50 बिलियन का डेट फाइनेंसिंग जुटाने की योजना बना रहा है। लगभग 3.66 के अपेक्षाकृत उच्च डेट-टू-इक्विटी रेशियो के साथ, यह वित्तीय दबाव बढ़ाता है। AI इंटीग्रेशन के प्रयासों के बावजूद, Oracle को क्लाउड-नेटिव प्रोवाइडर्स से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।

भविष्य का दृष्टिकोण

Oracle की लंबी अवधि की सफलता उसके एंटरप्राइज ऐप्स और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर में जनरेटिव AI को इंटीग्रेट करने पर निर्भर करेगी। एनालिस्ट्स के पास Oracle स्टॉक पर 'मॉडरेट बाय' रेटिंग है, जिसका प्राइस टारगेट लगभग $262.91 है। हालांकि, निकट भविष्य में एग्जीक्यूशन, वर्कफोर्स को स्थिर करने और प्रतिस्पर्धियों की प्रतिक्रियाओं जैसी चुनौतियाँ होंगी। इस AI पिवट की सफलता Oracle की इन बाधाओं को दूर करने और तेजी से बदलते जनरेटिव AI मार्केट में लीडिंग पोजीशन हासिल करने की क्षमता से मापी जाएगी।

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