मिडिल ईस्ट संकट से कच्चे तेल में उछाल
मध्य पूर्व में बढ़ते संकट के चलते India Crude Oil बास्केट $120.84 प्रति बैरल तक पहुंच गया है। यह फरवरी के मुकाबले करीब 75% की भारी बढ़ोतरी है। इस बढ़ी हुई कीमत का सीधा असर भारत के इम्पोर्ट बिल पर पड़ रहा है, जिससे महंगाई की चिंता बढ़ गई है और आम आदमी के बजट पर दबाव बढ़ गया है। आपको बता दें कि भारत अपनी ज़रूरत का 85% से ज़्यादा कच्चा तेल इम्पोर्ट करता है।
एक्सपर्ट की मांग: फ्यूल को GST के दायरे में लाएं
जाने-माने ऑयल इकोनॉमिस्ट Kirit Parekh ने इस मुद्दे पर जोर देते हुए कहा है कि सरकार को अब पेट्रोल और डीज़ल को गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) के तहत लाना चाहिए। उन्होंने वित्त मंत्री से अपील की है कि पेट्रोलियम उत्पादों पर एक समान टैक्स लगाने के लिए GST काउंसिल की मीटिंग बुलाई जाए।
राज्यों के रेवेन्यू का मसला
Parekh ने माना कि इससे कुछ राज्यों को रेवेन्यू में एडजस्टमेंट करना पड़ सकता है, लेकिन सुझाव दिया कि केंद्र सरकार इसके लिए मुआवज़े का मैकेनिज्म बना सकती है। यह एक अहम पहलू है क्योंकि अकेले फाइनेंशियल ईयर 2025 में ही राज्य सरकारों ने पेट्रोल-डीज़ल पर लगने वाले VAT और सेल्स टैक्स से ₹3 लाख करोड़ से ज़्यादा का रेवेन्यू इकट्ठा किया था, जिससे कई कल्याणकारी योजनाएं चलती हैं। उदाहरण के तौर पर, दिल्ली में पेट्रोल पर लगने वाला VAT प्रति लीटर करीब ₹15.40 है।
GST के फायदे और महंगाई का खतरा
फ्यूल को GST के दायरे में लाने से पूरे देश में टैक्स की दरें एक समान हो जाएंगी, जिससे राज्यों के बीच कीमतों का अंतर कम होगा। यह ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को भी बड़ी राहत देगा जो मौजूदा समय में बढ़ती वैश्विक कीमतों से जूझ रही हैं। साथ ही, ग्राहकों को भी वैश्विक अनिश्चितता के बीच कीमतों में अधिक स्थिरता मिल सकती है। अगर यह बदलाव नहीं होता है, तो ऑयल मार्केटर्स द्वारा कीमतों में और बढ़ोतरी से सीधे तौर पर हर सेक्टर में महंगाई बढ़ सकती है, जिससे आर्थिक दबाव और गहरा जाएगा।