क्रूड ऑयल में हाहाकार! मिडिल ईस्ट संकट से कच्चे तेल की कीमतें रॉकेट पर, फेड रेट कट की उम्मीदों पर फिरा पानी

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
क्रूड ऑयल में हाहाकार! मिडिल ईस्ट संकट से कच्चे तेल की कीमतें रॉकेट पर, फेड रेट कट की उम्मीदों पर फिरा पानी
Overview

मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tension) ने ग्लोबल मार्केट्स में हलचल मचा दी है। टेंशन के कारण कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में **करीब 14%** का भारी उछाल आया है, जिसने इन्फ्लेशन (Inflation) को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं और फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को धूमिल कर दिया है।

मध्य पूर्व संकट का सीधा असर

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के आसपास समुद्री शिपिंग की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इस तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent crude oil) की कीमतें लगभग 14% उछलकर $72.48 के स्तर से बढ़कर $82.60 प्रति बैरल पर पहुंच गईं। अमेरिकी नौसेना की ओर से जहाजों को एस्कॉर्ट (escort) करने और बीमा गारंटी देने की घोषणा के बावजूद, बाजार में अस्थिरता बनी हुई है।

इन्फ्लेशन (Inflation) को फिर लगी आग

तेल की कीमतों में यह तेज उछाल सीधे तौर पर इन्फ्लेशन (Inflation) को हवा दे रहा है। गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) के एनालिस्ट्स (analysts) का अनुमान है कि अगर तेल की कीमतों में 10% की बढ़ोतरी होती है, तो कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) में 0.28% की वृद्धि हो सकती है। इससे सालाना इन्फ्लेशन (Inflation) बढ़कर 3.0% तक पहुंच सकता है। इतिहास गवाह है कि तेल के झटके अक्सर महंगाई को बढ़ाते हैं और आर्थिक दबाव पैदा करते हैं। बढ़ी हुई ट्रांसपोर्टेशन और मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट (manufacturing cost) अंततः उपभोक्ताओं पर ही पड़ने की आशंका है।

फेडरल रिजर्व (Fed) की मुश्किल बढ़ी

ऊंची तेल कीमतों और बढ़ती इन्फ्लेशन (Inflation) की चिंताओं ने फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को काफी कम कर दिया है। हालांकि फेड ने जनवरी 2026 में दरों को स्थिर रखा था, लेकिन अब बाजार का मानना है कि 17-18 मार्च को होने वाली अगली मीटिंग में भी दरें अपरिवर्तित रह सकती हैं। 2026 के लिए पहले की गई कई रेट कट (rate cut) की भविष्यवाणियों को बदला जा रहा है, और कुछ अनुमान तो इन्फ्लेशन (Inflation) के जोखिमों को देखते हुए केवल एक या दो कट या कोई भी कट न होने की ओर इशारा कर रहे हैं। न्यूयॉर्क फेड प्रेसिडेंट जॉन विलियम्स (John Williams) ने भी कहा है कि आगे की कटौती इन्फ्लेशन (Inflation) के दबाव कम होने पर निर्भर करेगी। बढ़ती चिंताओं के बीच, यूएस 10-साल ट्रेजरी यील्ड (Treasury yield) भी लगभग 4.06% के स्तर पर बना हुआ है।

इमर्जिंग मार्केट्स (EMs) पर गहराता संकट

इमर्जिंग मार्केट्स (EMs) इस संकट से खास तौर पर प्रभावित होने वाले हैं। एनालिस्ट्स (analysts) का कहना है कि इससे उनके बाहरी बैलेंस, करेंसी (currency) और कैपिटल फ्लो (capital flow) पर दबाव बढ़ेगा। भारत जैसे देश, जिनके पास तेल के भंडार सीमित हैं, सप्लाई में रुकावटों के प्रति बहुत संवेदनशील हैं। गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड (Brent crude) के $70 से $85 तक बढ़ने पर इमर्जिंग एशिया में इन्फ्लेशन (Inflation) 0.7 प्रतिशत अंक बढ़ सकता है और आर्थिक ग्रोथ 0.5% घट सकती है। निवेशक यूएस डॉलर (US Dollar) जैसी सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख कर रहे हैं, जिसके चलते इमर्जिंग मार्केट इक्विटी (equity) और करेंसी इंडेक्स (currency index) में गिरावट देखी जा रही है।

वैश्विक बाजारों में डर का माहौल

अमेरिका के अलावा, दुनिया भर के बाजार इस तनाव से जूझ रहे हैं। हांगकांग के शेयर 2.6% से ज्यादा गिरे, भारत का बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) अप्रैल 2025 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया और रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर चला गया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स (KOSPI index) 11% से ज्यादा गिर गया, जिससे ट्रेडिंग अस्थायी रूप से रोकी गई। यूरोप में प्राकृतिक गैस की कीमतों में भी उछाल आया है, जो ऊर्जा की उपलब्धता और लागत को लेकर चिंताएं बढ़ा रहा है। भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने के साथ, यूएस डॉलर इंडेक्स (US Dollar index) में मजबूती देखी जा रही है, जो निवेशकों के सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ने का संकेत है।

आगे का रास्ता मुश्किल

हालांकि सरकारी हस्तक्षेप ने कुछ समय के लिए बाजारों को शांत किया है, लेकिन बुनियादी जोखिम अभी भी बने हुए हैं। यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार जा सकती हैं, जो अमेरिकी शेयरों को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकती है। यह लगातार मूल्य वृद्धि पहले से ही 'जिद्दी' अमेरिकी इन्फ्लेशन (Inflation) के लिए एक गंभीर खतरा पैदा करती है, जिससे फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) को दरों को लंबे समय तक रोके रखने या यहां तक कि और अधिक सख्ती करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है, जो मंदी (stagflation) की स्थिति पैदा कर सकता है। इमर्जिंग मार्केट्स (EMs) के लिए स्थिति और भी गंभीर है, जहां तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से करेंसी संकट और कैपिटल आउटफ्लो (capital outflow) का खतरा मंडरा रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से तेल टैंकरों को निकालने में अमेरिकी नौसेना की भूमिका उसे सीधे खतरे में डालती है, जिससे सीधे सैन्य टकराव का खतरा बढ़ जाता है।

भविष्य का अनुमान

बाजार की धारणा नाजुक बनी हुई है और यह मध्य पूर्व संघर्ष के कम होने और तेल की कीमतों की दिशा पर बहुत अधिक निर्भर है। एनालिस्ट्स (analysts) आगे भी अस्थिरता की उम्मीद कर रहे हैं, और निवेशक किसी भी और व्यवधान या सुरक्षा में सुधार के संकेतों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) की बारीकी से निगरानी करेंगे। फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) की भविष्य की नीति महत्वपूर्ण रूप से इन्फ्लेशन (Inflation) डेटा पर निर्भर करेगी, जो अब भारी रूप से ऊर्जा लागत से प्रभावित है, जिससे निकट भविष्य में रेट कट (rate cut) के लिए कोई भी स्पष्ट मार्गदर्शन अनिश्चित बना हुआ है।

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