जियोपॉलिटिकल टेंशन का 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' और तेल का बवंडर
'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' नाम के इस जियोपॉलिटिकल एक्शन ने ग्लोबल फाइनेंसियल मार्केट्स में तुरंत एक बड़ा झटका दिया, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी साफ देखा गया। कच्चे तेल (Crude Oil) के दाम $115 प्रति बैरल के पार जा पहुंचे, जिससे दालal Street में चौतरफा बिकवाली शुरू हो गई। बेंचमार्क Nifty इंडेक्स 2% गिरकर 23,900 पर कारोबार कर रहा था और अब यह जनवरी की 5 तारीख के अपने उच्चतम स्तर से 10% से ज्यादा नीचे आ चुका है। Sensex में भी शुरुआती कारोबार में 1,700 से अधिक अंकों की भारी गिरावट देखी गई।
सेक्टरों में तबाही
शुरुआती ट्रेडिंग सेशन में ज्यादातर इंडेक्स में इसका असर तेजी से और बुरी तरह देखा गया। Nifty PSU Bank, Nifty Auto और Nifty Transportation & Logistics में सबसे ज्यादा गिरावट आई। बैंकों में 3.54% की गिरावट देखी गई, क्योंकि बढ़ती तेल कीमतों के कारण महंगाई (Inflation) को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं, जिससे 2026 में RBI द्वारा ब्याज दरों में संभावित कटौती में देरी हो सकती है। State Bank of India 5.46% गिरा, और ICICI Bank व Axis Bank जैसे बड़े प्राइवेट लेंडर्स में भी काफी गिरावट आई।
Maruti Suzuki India, Eicher Motors और Bajaj Auto सहित ऑटोमोबाइल कंपनियों के शेयरों में करीब 4.5% की गिरावट आई। इन कंपनियों को बढ़ी हुई इनपुट कॉस्ट और डिमांड में कमी के डर से जूझना पड़ा। Tata Motors Passenger Vehicles में 5.65% की गिरावट आई।
InterGlobe Aviation (IndiGo) जैसी एविएशन कंपनियों को भी तुरंत झटका लगा, क्योंकि एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की लागत सीधे कच्चे तेल की कीमतों से जुड़ी होती है, जिससे यह स्टॉक 52-हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गया। इसी तरह, UltraTech Cement जैसी सीमेंट कंपनियों को बढ़ी हुई एनर्जी कॉस्ट से मार्जिन पर दबाव का सामना करना पड़ा, जबकि Asian Paints जैसी पेंट कंपनियों को कच्चे तेल से बने उत्पादों की इनपुट प्राइस बढ़ने की मार झेलनी पड़ी।
ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) पर खतरा
संघर्ष के दूसरे हफ्ते में Bharat Petroleum Corporation, HPCL और Indian Oil Corporation जैसी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के लिए यह विनाशकारी साबित हुआ। ये कंपनियां, जो अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर कच्चा तेल खरीदती हैं और घरेलू रेगुलेटेड रेट पर फ्यूल बेचती हैं, उनके रिफाइनिंग मार्जिन (Refining Margins) बुरी तरह प्रभावित हुए क्योंकि कच्चा तेल $100 को पार कर $119 प्रति बैरल तक पहुंच गया था। UBS ने कच्चे तेल में आई इस तेजी का हवाला देते हुए Indian Oil Corporation की रेटिंग को 'Sell' में डाउनग्रेड कर दिया।
अपस्ट्रीम प्रोड्यूसर्स को फायदा
इसके बिल्कुल विपरीत, अपस्ट्रीम ऑयल प्रोड्यूसर्स को फायदा हुआ। Oil And Natural Gas Corporation (ONGC) Nifty 50 की उन चुनिंदा स्टॉक्स में से एक थी जो हरे निशान में कारोबार कर रही थी, क्योंकि उन्हें कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का लाभ मिला। Oil India और Reliance Industries की अपस्ट्रीम प्रॉपर्टीज ने भी रिफाइनिंग सेक्टर की दिक्कतों के मुकाबले मजबूती दी।
डिफेंस सेक्टर: एक अपवाद
बाजार में व्यापक गिरावट के बीच, डिफेंस सेक्टर मजबूती का एक अकेला क्षेत्र बनकर उभरा। Nifty India Defence इंडेक्स 2 मार्च को बंद होने वाला एकमात्र सेक्टरल इंडेक्स था, जिसने युद्ध प्रभावित हफ्ते में करीब 1.7% का शुद्ध लाभ दर्ज किया। Paras Defence and Space Technologies एक शानदार परफ़ॉर्मर रहा, जो एक ही सत्र में 11% से अधिक उछल गया। Bharat Dynamics और BEL ने भी मजबूत बढ़त दर्ज की, जिसमें BEL ने ऑल-टाइम इंट्राडे हाई को छुआ।
निवेशक प्रवाह और रुपये पर दबाव
बाजार की इस उथल-पुथल ने विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के बड़े पैमाने पर पैसे निकालने को भी बढ़ावा दिया, जिन्होंने 9 मार्च से पहले के चार सत्रों में भारतीय इक्विटी से करीब ₹21,000 करोड़ निकाले। घरेलू संस्थानों ने इस बिकवाली के दबाव का एक बड़ा हिस्सा संभाला। भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले ₹92.35 के नए निचले स्तर को छूते हुए काफी कमजोर हो गया। सोमवार सुबह ही BSE-लिस्टेड फर्मों के कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन में ₹3 लाख करोड़ की गिरावट बताई गई।