बाजार में यह बड़ी गिरावट कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में 20% के भारी उछाल के कारण आई, जो बढ़कर $107.5 प्रति बैरल के पार निकल गया। इसने महंगाई (Inflation) को लेकर चिंताएं बढ़ा दीं और निवेशकों का सेंटिमेंट (Sentiment) बिगाड़ दिया।
भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) के बढ़ते संकेतों के साथ, बाजार में चौतरफा बिकवाली हुई, जिससे पिछले दो हफ्तों की बढ़त पर भी पानी फिर गया। बेंचमार्क सेंसेक्स (Sensex) 999.79 अंक ( 1.29%) की गिरावट के साथ 76,664.21 पर बंद हुआ।
वहीं, निफ्टी (Nifty) 275.10 अंक ( 1.14%) लुढ़ककर 23,897.95 पर आ गया। यह लगातार तीसरी सत्र की गिरावट थी। हफ्ते के प्रदर्शन की बात करें तो सेंसेक्स 2.33% और निफ्टी 1.87% नीचे आए, जो पिछले छह हफ्तों में सबसे खराब साप्ताहिक प्रदर्शन रहा।
बाजार की तस्वीर दो बिल्कुल विपरीत सेक्टरों की कहानी कह रही थी। जहां Information Technology (IT) सेक्टर बुरी तरह पिटा, वहीं Fast-Moving Consumer Goods (FMCG) कंपनियों ने कुछ मजबूती दिखाई।
खासकर Infosys के FY27 के लिए 1.5% से 3.5% तक के कमजोर आउटलुक (Outlook) और HCL Technologies के तिमाही नतीजों (Q4) के उम्मीद से कम रहने का असर IT शेयरों पर साफ दिखा। इस वजह से निफ्टी IT इंडेक्स हफ्ते भर में 10.31% गिर गया। IT सेक्टर का औसत P/E (Price-to-Earnings ratio) इस वक्त लगभग 21.2 के आसपास है।
इसके बिल्कुल विपरीत, Nestlé India ने दमदार नतीजे पेश करते हुए 10.56% की छलांग लगाई। इसने कंज्यूमर डिमांड (Consumer Demand) की मजबूती का संकेत दिया, जो ऐसे अनिश्चित माहौल में अक्सर रक्षात्मक (Defensive) कदम मानी जाती है।
बाजार में पैसे के प्रवाह (Investor Flows) की बात करें तो विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने इस हफ्ते ₹11,444.85 करोड़ के शेयर बेचे। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने ₹9,782.05 करोड़ की खरीदारी करके कुछ सहारा देने की कोशिश की।
कुल मिलाकर, हफ्ते भर में बाजार का मार्केट कैप (Market Capitalization) ₹4.15 लाख करोड़ कम हो गया।
ऐतिहासिक तौर पर, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल हमेशा लंबे बाजार में गिरावट का कारण नहीं बना है, लेकिन भारत की 85% कच्चे तेल आयात पर निर्भरता इसे और संवेदनशील बनाती है, क्योंकि यह रुपये पर दबाव और महंगाई बढ़ा सकता है।
फिलहाल, बाजार के सामने भू-राजनीतिक जोखिम और अमेरिका जैसे देशों के सेंट्रल बैंकों (Central Banks) के सख्त मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) अपनाने की आशंकाएं मंडरा रही हैं। US Federal Reserve के फैसलों पर खास नजर रहेगी।
IT सेक्टर के लिए, क्लाइंट्स के बजट कट (Budget Cuts) और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के चलते मार्जिन (Margin) पर दबाव की आशंका बनी हुई है। Infosys और HCL Tech जैसे शेयरों पर विश्लेषकों (Analysts) की राय 'होल्ड' (Hold) या 'न्यूट्रल' (Neutral) बनी हुई है, और टारगेट प्राइस (Target Price) में ज्यादा तेजी की गुंजाइश नहीं दिख रही।
इसके अलावा, कच्चे तेल के झटके से भारतीय रुपये (Rupee) का कमजोर होना भी एक बड़ा जोखिम है, जिससे इंपोर्ट कॉस्ट (Import Cost) और महंगाई बढ़ सकती है।
